अधिकारी दिल से जुड़ेंगे तभी किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए समझा सकेंगे : मान

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अतिरिक्त उपायुक्त एएस मान ने फसल अवशेष प्रबंधन मुहिम के सार्थक परिणाम लाने के लिए कृषि अधिकारियों में भरा जोश

हिसार, 15 सितंबर।

अतिरिक्त उपायुक्त अमरजीत सिंह मान ने कहा कि गांवों में जाकर किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए समझाने का अभियान तभी सार्थक होगा जब कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी दिल से ग्रामीणों से जुड़ेंगे और इस कार्य को केवल ड्यूटी की औपचारिकता नहीं बल्कि समाज में बदलाव के मिशन के रूप में लेंगे। एडीसी मान ने यह बात जिला सभागार में कृषि विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए कही। प्रशिक्षण शिविर में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ मुकेश जैन ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से अधिकारियों-कर्मचारियों को उन तमाम कृषि उपकरणों की कार्यप्रणाली व संचालन की जानकारी दी जो फसल अवशेष प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और इन पर सरकार द्वारा 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। कृषि उपनिदेशक डॉ. विनोद फोगाट ने भी अधिकारी-कर्मचारियों को अभियान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।

अतिरिक्त उपायुक्त एएस मान ने कहा कि धान कटाई का सीजन शुरू होने वाला है। अमूमन किसान यह मानते हैं कि फसल निकालने के बाद बचे हुए अवशेषों में आग लगा देने से उन्हें अगली फसल के लिए खाली भूमि मिल जाएगी। लेकिन आग लगाने के बाद भूमि और वातावरण को जो नुकसान पहुंचता है, उसका वे अनुमान नहीं लगा सकते हैं। भूमि के भीतर मौजूद छोटे-छोटे मित्र कीट जिन्हें नंगी आंखों से देखा भी नहीं जा सकता है, आग की गर्मी से जलकर खत्म हो जाते हैं जिससे भूमि के बंजर होने की शुरुआत हो जाती है। 
उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं, अवशेषों को आग लगाने से पैदा होने वाला धुआं केवल उस गांव, जिला या हरियाणा ही नहीं, साथ लगते दिल्ली और अन्य राज्यों तक की हवा को दूषित कर देता है जिससे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक तकलीफ होती है। दूसरी तरफ, सरकार फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 50 से 80 प्रतिशत सब्सिडी देकर अवशेष प्रबंधन उपकरण किसानों को दिलवा रही है। जो किसान ये उपकरण नहीं खरीद सकते, वे इन्हें किराए पर लेकर अवशेषों को मिट्टी में मिला सकते हैं जिससे न केवल भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी बल्कि पर्यावरण भी दूषित नहीं होगा।


उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी धान बिजाई वाले गांवों में जागरूकता शिविर लगाने जाएं तो इसे केवल ड्यूटी की औपचारिकता न मानें बल्कि व्यावहारिक तौर पर ग्रामीणों के मन से मन मिलाकर उन्हें इस अभियान का हिस्सा बनाएं। जब वे आपकी टीम का हिस्सा बन जाएंगे तो न केवल खुद अवशेषों को आग लगाने से परहेज करेंगे बल्कि दूसरों को भी ऐसा न करने के लिए समझाएंगे। इस अभियान को सफल बनाने के लिए एडीओ और अन्य अधिकारी-कर्मचारी ड्यूटी टाइम के बाद भी ग्रामीणों से संपर्क कायम करें और अपने आप को उस गांव व परिवार का हिस्सा बना लें। ऐसा करके वे निश्चित तौर पर इस मुहिम को सफल बना सकेंगे। जागरूकता कार्यक्रम में सरपंच, नंबरदार सहित गांव के ज्यादा से ज्यादा मौजिज लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने विभिन्न प्रकार की कहानियों व किस्सों के माध्यम से कृषि अधिकारियों को समझाया कि बेहतर परिणाम के लिए वे किस रणनीति के तहत प्रभावशाली परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार फसल की कटाई करने वाले हार्वेस्टर कंबाइन के साथ अब एसएमएस (स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम) यंत्र जोडक़र रखना अनिवार्य है। ऐसा न करने वाले व्यक्ति की कंबाइन को जब्त कर लिया जाएगा तथा उस पर जुर्माना लगाकर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि हरसैक द्वारा उपग्रह की मदद से यह पता लगाया जाएगा कि किस खेत में आग लगाई गई है। इसकी सूचना मिलते ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व कृषि अधिकारियों द्वारा खेत के मालिक पर जुर्माना व कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इस संबंध में किसानों को पहले से ही पूरी जानकारी कृषि अधिकारी उपलब्ध करवा दें ताकि वे फसल अवशेष जलाने की गलती न करें।

एडीसी मान ने कहा कि कृषि अधिकारी व कर्मचारी बाजरा बोने वाले सभी किसानों से संपर्क करके अगले दो दिन के भीतर मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाना भी सुनिश्चित करें ताकि उनकी बाजरा फसल को सरकार द्वारा निर्धारित 1950 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा सके। जिस किसान का पंजीकरण इस पोर्टल पर नहीं होगा उसका बाजरा सरकार द्वारा नहीं खरीदा जाएगा। इसलिए किसान हित में इस कार्य को हर हाल में 18 सितंबर तक पूरा किया जाना आवश्यक है।

हकृवि विशेषज्ञ मुकेश जैन ने कहा कि किसानों को यह समझाया जाना जरूरी है कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए वे किस यंत्र से क्या काम ले सकते हैं। किसानों को यह सब बताने से पहले कृषि अधिकारी स्वयं कृषि उपकरणों के संचालन के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें ताकि वे किसानों को अच्छी प्रकार समझा सकें। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से किसानों को सब्सिडी पर उपलब्ध करवाए जा रहे सभी 8 यंत्रों की कार्यप्रणाली, संचालन व फायदों के बारे में अधिकारियों को विस्तार से जानकारी दी। कृषि उपनिदेशक डॉ. विनोद फोगाट ने भी फसल अवशेष जलाने पर रोक के लिए चलाए जा रहे अभियान व विभागीय गतिविधियों की जानकारी उपस्थितगण को दी।

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