आखिर इस रामायण में क्यों लिखा है ‘बिस्मिल्लाह’ ?

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भारत विविधताओं से भरा देश है और यहाँ कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जिन्हें देखकर पता चल जाता है कि क्यों ये देश कई धर्म-जातियों कई भाषाओं के होते हुए भी एकता के सूत्र में बंधा हुआ है. ऐसा ही एक उदाहरण इस रामयण से भी मिलता है जो सन् 1715 में लिखी गई थी.

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1715 में सुमेर चंद ने संस्कृत में लिखी गई रामायण का फ़ारसी में अनुवाद किया था और कौमी एकता के लिए उन्होंने इसकी शुरुआत ‘बिस्मिल्लाह’ शब्द लिखकर की थी. जिस प्रकार राम केवल हिन्दुओं के देवता नहीं है बल्कि प्राचीन संस्कृति के एक प्रतीक चिन्ह हैं वैसे ही ये रामायण भी गंगा-जामुनी तहजीब का एक जीवंत उदाहरण है. उन्होंने इसकी प्रस्तावना तीन पन्नों में लिखी और ये प्रस्तावना सोने के पानी से लिखी गई.

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अब फारसी में लिखी गई इस रामयण का अनुवाद हिंदी में करके रामपुर रजा लाइब्रेरी ने प्रकाशित किया है. टाउनहॉल में लगे देश के पहले राष्ट्रीय संस्कृत पुस्तक मेले में पहली बार फ़ारसी भाषा से हिंदी में अनुदित इस ग्रंथ की प्रतियां पाठकों के लिए उपलब्ध हैं.

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ये दुनिया की एक अनूठी रामायण इसलिए भी क्योंकि इसमें चित्रों को भी बड़े ही अच्छे तरीके से शामिल किया गया है. तीन खंडों में प्रकाशित हुई इस रामायण में 258 चित्र शामिल किये गए हैं.

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