प्रदेश में 1 अक्तूबर से शुरू होगी बाजरे की सरकारी खरीद

0
27

इस बार किसानों को बाजरे के मिलेंगे 1950 रुपये क्विंटल के भाव, अन्य प्रदेशों की आवक पर रहेगी रोक
एसीएस रामनिवास व मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से अधिकारियों को दिए बाजरा खरीद प्रबंधों के निर्देश
पुलिस नाकाबंदी करके दूसरे प्रदेशों से बाजरा लाने पर लगाएगी रोक 

 

हिसार:

प्रदेश में बाजरे की सरकारी खरीद 1 अक्तूबर से शुरू की जाएगी और हरियाणा में किसानों द्वारा पैदा किए गए बाजरे का एक-एक दाना खरीदा जाएगा जिसके लिए किसानों को 1950 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। लेकिन साथ ही अन्य प्रदेशों से बाजरा लाकर यहां बेचने पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी। दूसरे प्रदेशों से सस्ते दामों पर बाजरा खरीदकर यहां महंगे दामों पर बाजरा बेचने के आढतियों के प्रयास इस बार सफल नहीं होने दिए जाएंगे।
यह बात खाद्यापूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रामनिवास ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान अधिकारियों से कही। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, कृषि विभाग के महानिदेशक डीके बेहरा ने भी अधिकारियों को खरीद प्रबंधों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान बाजरा खरीद के लिए प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई पुख्ता योजना को जिला स्तर पर अमलीजामा पहनाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई और अधिकारियों को जरूरी हिदायतें दी गईं।

हरियाणा में 6.80 लाख टन बाजरे की आवक का अनुमान :
एसीएस रामनिवास ने बताया कि हरियाणा में इस साल बाजरे की रिकॉर्ड 6.80 लाख टन आवक होने का अनुमान है। दूसरी तरफ राजस्थान में बाजरे का उत्पादन 27 लाख टन होने का अनुमान है और वहां यह 1250 रुपये क्विंटल की दर से सहज उपलब्ध है। आढ़तियों द्वारा वहां से सस्ते दामों पर बाजरा लाकर यहां महंगे भाव पर बेचने की आशंका के चलते सरकार ने फुल पू्रफ योजना बनाई गई है ताकि सरकार द्वारा दिए जा रहे समर्थन मूल्य का फायदा प्रदेश के किसानों को ही मिले।
 

क्या है सरकार की योजना :
उन्होंने बताया कि प्रदेश में जिन किसानों ने बाजरा बोया है, पटवारियों के माध्यम से उनकी गिरदावरी करवाई जा चुकी है। इसके अलावा 18 सितंबर तक सभी किसानों का मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण करके यह जानकारी ले ली जाएगी कि उन्होंने कितने एकड़ में बाजरा बोया है। किसानों के पंजीकरण का कार्य निर्धारित समयावधि में पूरा करने के लिए उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को व्यापक दिशा-निर्देश दिए। किसानों के पंजीकरण के बाद राजस्व व कृषि विभाग के विवरणों का मिलान किया जाएगा ताकि धांधली होने की गुंजाइश बिल्कुल खत्म हो जाए। 
 

यह रहेगी खरीद प्रक्रिया :
एसीएस ने बताया कि 1 अक्तूबर से मंडियों में किसानों के बाजरे की खरीद शुरू की जाएगी। शुरू में हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन व हैफेड द्वारा निजी खरीददारों व कंपनियों से मुकाबला करते हुए कर्मशियल तरीके से ढाई-ढाई लाख टन बाजरा खरीदा जाएगा। सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा पहले दिन 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बाजरा खरीदा जाएगा। यदि कोई निजी कंपनी अथवा खरीददार 1600 या इससे अधिक दर पर बाजरा खरीदना चाहे तो खरीद सकता है। यह खरीद दर प्रतिदिन बढ़ाई जाती रहेगी। पूरी खरीद प्रक्रिया ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से की जाएगी जिससे मार्केट फीस की चोरी पर पूरी तरह से रोक लगेगी। सरकारी अथवा निजी एजेंसी द्वारा खरीद के बाद उस दर के अनुसार किसान के खाते में सीधा भुगतान किया जाएगा। खरीदे गए दामों व न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच का अंतर भावांतर भरपाई योजना की तर्ज पर अलग से सरकार द्वारा किसान के खाते में भिजवाया जाएगा। इससे किसान को बाजरे का पूरा 1950 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिलेगा, फिर चाहे उसकी फसल सरकारी एजेंसी खरीदे या निजी खरीददार। बाद में खाद्यापूर्ति विभाग द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए 1 लाख टन बाजरे की खरीद की जाएगी।​
 

प्रधान सचिव खुल्लर ने दी विस्तृत जानकारी :
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने बताया कि बाजरे के उत्पाद बनाने वाली कंपनियां खुद या उनके लिए आढ़ती पहले खेतों में जाकर सीधे ही किसानों से औने-पौने दामों पर बाजरा खरीद लेते थे जिससे किसानों को नुकसान होता था और मार्केट फीस की भी चोरी होती थी। लेकिन अब प्रत्येक खरीददार को मंडी में आकर ही बाजरा खरीदना पड़ेगा क्योंकि यहां वह सरकारी एजेंसियों से मुकाबला करते हुए उनसे अधिक भाव पर लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दर पर बाजरा खरीद सकता है। इसमें किसान को हर हाल में फायदा होगा, क्योंकि मंडी में लाया गया उसका बाजरा चाहे किसी एजेंसी द्वार किसी दाम पर खरीदा जाए लेकिन सरकार द्वारा बीच के अंतर को पूरा करते हुए किसान को 1950 रुपये की दर से ही भुगतान किया जाएगा।
 

किसानों के लिए सुझाए परामर्श :
उन्होंने बताया कि कृषि अधिकारी किसानों को तीन काम करने के लिए समझाएं। पहला, वे 18 सितंबर तक ई-दिशा पोर्टल पर हर हालत में अपना रजिस्टे्रशन करवाएं जिसके लिए कृषि विभाग उनकी मदद करेगा। दूसरा, वे अपना बाजरा हरियाणा की किसी भी मंडी में बेचें लेकिन 1 अक्तूबर से पहले न बेचें, क्योंकि दाम में अंतर का भुगतान 1 अक्तूबर के बाद बेचे गए बाजरे पर ही लागू होगा। तीसरा, वे मंडी में बाजरा बेचने के बाद जे-फार्म जरूर लें। इसके साथ ही किसानों को यह भी बताया जाए कि वे किसी के बहकावे में आकर ई-पोर्टल पर कोई गलत सूचना न भरें।
 

एसपी को नाके लगाने के निर्देश :
उन्होंने पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों की प्रादेशिक सीमाओं पर नाके लगाकर यह सुनिश्चित करें कि अन्य प्रदेशों से बाजरा हरियाणा में न आने पाए। इसके लिए नाकों की संख्या को बढ़ाकर निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने फसल खरीद के परंपरागत तरीके से अति आधुनिक प्रणाली को अपनाने की पहल की है जो पूरे देश में एक उदाहरण साबित होगी जिसका सीधा लाभ किसान को होगा। उन्होंने कहा कि किसानों व आढ़तियों की मदद के लिए सभी मंडियों में प्रशासन द्वारा हेल्प डेस्क बनाए जाएंगे जहां आढ़तियों को खरीद प्रक्रिया का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। 
 

वीसी में ये रहे मौजूद :
वीडियो कॉन्फ्रेंस में पुलिस अधीक्षक शिवचरण, अतिरिक्त उपायुक्त अमरजीत सिंह मान, बरवाला एसडीएम पृथ्वी सिंह, हांसी एसडीएम राजीव अहलावत, कृषि उपनिदेशक डॉ. विनोद फोगाट, डीएफएससी सुभाष सिहाग, एफसीआई से प्रदीप श्योराण, वीरभान सिंह, रामकुमार लोहान व विभिन्न खरीद एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here