लड़कियों के बाएं हाथ में रक्षा सूत्र क्यों बांधा जाता है ?

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सनातन धर्म में (रक्षा सूत्र) कलावा धार्मिक कारण से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक कारणों से भी बांधना शुभ है. कलावा जिसे मौली कहते हैं. किसी भी शुभ कार्य से पहले या कोई भी पूजा करने से पहले तिलक किया जाता है और हाथों पर रक्षा सूत्र बांधते हैं फिर पूजा शुरू की जाती है.

लेकिन क्या आप जानते हैं, ये रक्षा सूत्र क्यों बाधी जाती है. कलावा बांधने की परंपरा तब से चली आ रही है, जब से महान, दानवीरों में अग्रणी महाराज बलि की अमरता के लिए वामन भगवान ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था। इसे रक्षा कवच के रूप में भी शरीर पर बांधा जाता है. कलाई पर कलावा बांधने से जीवन पर आने वाले संकट से रक्षा होती है। क्योंकि इस तरह त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों की कृपा प्राप्त होती है.

कलावा का धागा कच्चे सूत से तैयार किया जाता है और यह कई रंगों जैसे, लाल, पीला, सफेद या नारंगी रंगों का होता है। इसे बांधने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है. वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार कलाई पर जहां कलावा बांधा जाता है। शरीर के उस हिस्से से शरीर के कई प्रमुख अंगों तक पहुंचने वाली नसें गुजरती हैं. इसलिए ऐसे में रक्त संचार तीव्र और कलावा के जरिए सकात्मक ऊर्जा का संचार पूरे शरीर में होता रहता है.

कलावा, कलाई की नसों को दुरुस्त रखता है. कलावा बांधने से कलाई की नसों में रक्त का संचार अच्छे होने की वजह से रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और लकवा जैसे गंभीर रोगों से काफी हद तक सुरक्षा मिलती है.धार्मिक दृष्टि से बताया जाता है कि इंद्र जब वृत्रासुर से युद्ध करने जा रहे थे तब इंद्राणी शची ने इंद्र की दाहिनी भुजा पर रक्षा-कवच के रूप में कलावा बांध दिया था और इंद्र इस युद्ध में विजयी हुए. उसके बाद से ये रक्षा सूत्र बांधा जाता है। वहीं इसके बांधने से अनुष्ठान की बाधांए दूर हो जाती है। शास्त्रों का ऐसा मत है कि कलावा बांधने से त्रिदेव, ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा तीनों देवियों लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है. ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति विष्णु की अनुकंपा से रक्षा बल मिलता है और शिव दुर्गुणों का विनाश करते हैं.

इसी प्रकार लक्ष्मी से धन, दुर्गा से शक्ति एवं सरस्वती की कृपा से बुद्धि प्राप्त होती है। वहीं अगर वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो स्वास्थ्य के अनुसार रक्षा सूत्र बांधने से कई बीमारियां दूर होती है, जिसमें कफ, पित्त आदि शामिल है. शरीर की संरचना का प्रमुख नियंत्रण हाथ की कलाई में होता है, अतः यहां रक्षा सूत्र बांधने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है. ऐसी भी मान्यता है कि इसे बांधने से बीमारी अधिक नहीं बढती है.

ब्लड प्रेशर, हार्ट एटेक, डायबीटिज और लकवा जैसे रोगों से बचाव के लिये मौली बांधना हितकर बताया गया है.
मौली यानी रक्षा सूत्र शत प्रतिशत कच्चे धागे ,सूत, की ही होनी चाहिए. मौली बांधने की प्रथा तब से चली आ रही है जब दानवीर राजा बलि के लिए वामन भगवान ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था.

रक्षा सूत्र कब और कैसे धारण करे ?
पुरुषों और अविवाहित कन्याओं के दाएं हाथ में और विवाहित महिलाओं के बाएं हाथ में रक्षा सूत्र बांधी जाती है. जिस हाथ में कलावा या मौली बांधें उसकी मुट्ठी बंधी हो एवं दूसरा हाथ सिर पर हो. इस पुण्य कार्य के लिए व्रतशील बनकर उत्तरदायित्व स्वीकार करने का भाव रखा जाए। पूजा करते समय नवीन वस्त्रों के न धारण किए होने पर मौली हाथ में धारण अवश्य करना चाहिए। धर्म के प्रति आस्था रखें. मंगलवार या शनिवार को पुरानी मौली उतारकर नई मोली धारण करें, संकटों के समय भी रक्षासूत्र हमारी रक्षा करते हैं.

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