25 पैसे के प्रॉफिट से शुरु किया था सुभाष कपूर ने बिजनेस, खड़ी कर दी 200 करोड़ की स्टीलबर्ड हैलमेट कंपनी

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सभी तरह के कारोबार में किया ट्राई

सुभाष कपूर का काम कपड़े को काटने का होता था और बाकी भाई उसे सिलते और पैक करते थे। वह तब मैट्रिक में थे और तब वह एग्जाम देने जाते लेकिन पहले कपड़ा काटकर जाते। काम में हाथ बंटाने के लिए मैट्रिक के बाद पढ़ाई नहीं कर पाए। पाउच बनाने वाले कारोबार के अलावा उनकी फैमिली ने ऑयल फिल्टर का कारोबार किया।

1963 में बनाई स्टीलबर्ड

13 मार्च 1963 को उन्होंने स्टीलबर्ड इंडस्ट्री की नींव रखी। उनकी ये पार्टनरशीप दिल्ली में नवाबगंज में थी। इसके बाद उन्हें कभी वापिस नहीं मुड़ना पड़ा। अगले दो साल में वह ट्रैक्टर के लिए 280 तरह के ऑयल फिल्टर बनाने लगे।

उनके दोस्त भी अब उनसे सलाह लेने आने लगे। तब वह किसी दोस्त को हेलमेट बनाने की सलाह दे रहे थे क्योंकि तब सरकार हेलमेट को अनिवार्य करने जा रही थी। एक दिन वाशरूम में दिमाग में आया कि दूसरे को सलाह देने की जगह वह स्वयं हेलमेंट क्यों नहीं बनाते। साल 1976 में उन्होंने हेलमेट बनाने का प्लान किया।

 

दिल्ली में हेलमेट बन गया अनिवार्य

70 के दशक से पहले हेलमेट पहनना अनिवार्य नहीं था। तब देश में ज्यादातर हेलमेट इंपोर्ट होते थे। साल 1976 में दिल्ली सरकार ने हेलमेट अनिवार्य कर दिया। वह फाइबर ग्लास कपंनी पिलकिंगटन लिमिटेड के लोगों को जानते थे जिन्होंने उन्हें हेलमेट बनाने की जानकारी दी।

वह हेलमेट बनाने लगे। वह दिल्ली की कुछ दुकानों में हेलमेट बेचने लगे। उन्होंने इसकी कीमत 65 रुपए तय कि लेकिन दुकानदार 60 रुपए करना चाहते थे। सुभाष के मुताबिक वह दुकानदारों के दबाव में नहीं आए क्योंकि उनको पता था कि उनके पास कोई ऑप्शन नहीं है।

जब हेलमेट की डिमांड बढ़ी तो दुकानदार उनसे हेलमेट मांगने लगे। उन्होंने एक दिन 2.5 लाख रुपए मार्केट से कलेक्ट करे।

विज्ञापन से मिला फायदा

उन्होंने यह पैसा न्यूजपेपर और दूरदर्शन पर विज्ञापन पर खर्च किया। इसका फायदा उन्हें मिला और हेलमेट की डिमांड कई गुना बढ़ गई। उन्होंने इसकी कीमत 65 रुपए से बढ़ाकर 70 रुपए कर दी। उनका बिजनेस दौड़ने लगा था और फिर उन्होंने साल 1980 में मायापुरी में अपना प्लांट खोला। अब सुभाष कपूर के दो बच्चें बेटा राजीव और बेटी अनामिका है। अब सुभाष कपूर के बेटे राजीव कपूर स्टीलबर्ड हेलमेट के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।

अब हैं 8 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट

अब स्टीलबर्ड के पास दिल्ली ऑफिस में 1,700 से अधिक कर्मचारी हैं। बीते 4 दशक में उन्होंने हेलमेट बनाने वाली करीब 8 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई है। उनके तीन प्लांट हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले, दिल्ली और नोएडा में 2 यूनिट है। उनकी कंपनी रोजाना 9,000 से 10,000 हेलमेट और एक्सेसरी पीस रोजाना बनाती है। इनकी रेन्ज करीब 900 रुपए से 15,000 रुपए तक है। कंपनी का टर्नओवर 200 करोड़ रुपए है।

इटली की कंपनी के साथ किया टाईअप

उन्होंने इटली की सबसे बड़ी हेलमेट बनाने वाली कंपनी बिफे के साथ भी टाईअप किया है। वह करीब 4,000 वैराइटी के हेलमेट बनाते हैं। स्टीलबर्ड श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, ब्राजील, मॉरिशियस और इटली में हेलमेट और एक्सेसरी एक्सपोर्ट करते हैं।

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