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रेवाड़ी की रहने वाली साक्षी सिंघल ने लिखी इबारत बनी सीए

Ajeybharat/Rewari/रेवाड़ी की रहने वाली साक्षी सिंघल ने सीए की परीक्षा पास कर नगरवासियों का नाम रोशन किया है। यह कामयाबी साक्षी सिंघल ने महज 22 वर्ष की उम्र में हासिल की है।बुधवार को साक्षी सिंघल को उनके पिता पवन सिंघल समेत अनेक लोगों ने मिठाई खिलाकर बधाई दी। साक्षी सिंघल रेवाड़ी के प्रतिष्ठित  परिवार से जुड़ी हैं और कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने 18 जुलाई 2017 को सीए की परीक्षा पास की थी।  

मेहनत से पूरा किया मुश्किल सफर
सीए बनना आज के दौर में अधिकतर युवाओं का सपना होता है। लेकिन यह मुकाम हासिल करने के लिए जो मेहनत और वक्त लगता है, वह कई युवाओं को सफर अधूरा छोड़ने पर ही मजबूर कर देता है।रेवाड़ी की साक्षी सिंघल ने यह भी साबित किया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं।

साक्षी सिंघल ने बताया कि आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नही हैं। कड़ी मेहनत और लगन से हर मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है। वह अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने पिता पवन सिंघल  और अपनी माता को देना चाहती हैं। साक्षी सिंघल की इस कामयाबी पर उनके परिवार में भी खुशी का माहौल है। अजेयभारत परिवार की तरफ से भी साक्षी सिंघल को हार्दिक शुभकामनाएं 

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स्कूली बच्चों व शिक्षकों ने किया पौधारोपण

Ajeybharat/Gurugram/राजकीय माध्यमिक विद्यालय फाजिलपुर झाड़सा गुरुग्राम में वन महोत्सव के दौरान  पौधारोपण अभियान चलाया गया। इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों ने बच्चों ने पौधे लगाए।

विद्यार्थियों ने पिछले वर्ष रोपित किए गए पौधों की वर्ष भर देखभाल भी की थी जिसके सुखद परिणाम आने के
चलते बच्चों ने पौधारोपण को लेकर अत्यधिक उत्साह था। मुख्य अध्यापिका महेंद्र यादव ने पौधे बच्चों को वितरित किए और अपने-अपने घर पर लगाने का आह्वान किया। विद्यार्थियों को वनों का महत्व बताते हुए कहा कि ‘‘वन है तो जीवन है’’ हमें हर वर्ष अपने रहने के स्थान
के आस-पास पौधारोपण करना चाहिए तथा अपने परिचितों को भी इस बारे में जागरूक करना चाहिए। साथ ही भारत मुटरेजा ने बच्चों से अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनकी देखभाल करने का आह्वान किया। इस मौके पर राकेश कुमार, श्रीमती पूनम कुमारी आदि स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।


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कुछ चीजों के English meaning जिन्हें पढ़कर आप Ajeybharat के फैन बन जाओगे

  • जब हम किसी को दिमाग में नंगा करते है तो उसे ‘Apodyopsis’ कहते है.
  • बूँदो से बचने के लिए जब कही पर आश्रय मिलता है तो उसे ‘Ombrifuge’ कहते है.
  • मन में एक सवाल उठा और आपने तुरंत अंदर ही अंदर खुद को उसका जवाब दे दिया तो उसे ‘Sermocination’ कहते है.
  • पत्तों से टकराकर जब हवा शोर करती है तो उसे ‘Psithurism’ कहते है.
  • अपने ही बाल खुद काटने को ‘Self-tonsorialism’ कहते है.
  • आइसक्रीम या कुछ ज्यादा ठंडा खाने पर जो सिर में दर्द होता है तो उसे ‘Sphenopalatine ganglioneuralgia’ कहते है.
  • किसी समझौते या डील के बाद जब दो आदमी हाथ मिलाते है तो उसे ‘Famgrapsing’ कहते है.
  • नया अंडरवियर पहनने के बाद जो uncomfortable feeling आती है उसे ‘Shivviness’ कहते है.
  • दूर तक चलने के बाद टांगो में जो दर्द महसूस किया जाता है उसे ‘Hansper’ कहते है.
  • जिससे चूतड़ो पर ज्यादा बाल होते है उसे ‘Dasypygal’ कहते है. और सुंदर कूल्हों को ‘Callipygian’ कहते है.
  • गाली देने के बाद मन को जो संतुष्टि मिलती है उसे ‘Lalochezia’ कहते है.
  • केले को छिलने पर उसके अंदर जो लंबी-सी पतली-सी लकीरें उतरती है तो उसे ‘Phloem bundles’ कहते है.
  • आपकी नाक के बिल्कुल नीचे होंठो पर जो दो लकीरों की नाली सी बनी हुई है उसे ‘Philtrum’ कहते है.
  • इंजेक्शन लगने या कुछ चुभने पर जो फीलिंग आती है उसे ‘Paresthesia’ कहते है.
  • ऐसी लिखाई जो पढ़ी नही जाती, जैसे: डाॅकटरो की लिखाई. तो उसे ‘Griffonage’ कहते है.
  • पेंसिल के पीछे जो धातु वाला भाग होता है उसे ‘Ferrule’ कहते है.
  • मोमबत्ती के जले हुए और यूज किए हुए भाग को ‘Snaste’ कहते है.
  • जूतों की डोर के सिरे पर जो प्लास्टिक होती है उसे ‘Aglet’ कहते है.
  • हमारी दोनो आइब्रो के बीच जो जगह होती है उसे ‘Glabella’ कहते है.
  • Tommorow के बाद जो अगला दिन आता है उसे “Overmorrow” कहते है.

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YMCA यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

अजेयभारत.कॉम /फरीदाबाद/वाईएमसीए यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया, पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेकर पौधे वितरित किए गए. सराय ख्वाजा स्कूल की छात्राओं ने योगा के विभिन्न आसन क्रियाएं और आत्म रक्षा का प्रदर्शन किया।

Celebration-of-International-Yoga-day-in-YMCA-University-Faridabad


वाईएमसीए यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ संजय कुमार शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। दो घंटे तक चले योग उत्सव में विभिन्न योग क्रियाएं कराई गई जिसमें यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर, टीचिंग नॉन टीचिंग स्टाफ, महिलाओं, विद्यार्थियों एवं बच्चों ने भाग लिया। योग समापन के उपरांत सभी को पौधे वितरित किये गए।

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Sandeep Maheshwari ये Quotes आपकी ज़िंदगी बदल सकते हैं..

Sandeep Maheshwari Quotes in Hindi
संदीप माहेश्वरी के Quotes आपकी ज़िदगी बदल सकते हैं

Sandeep maheshwari Sandeep Maheshwari Wiki : क्या आप संदीप माहेश्वरी को जानते हैं ? अगर नही जानते तो आज जान जाइए.. Q कि ये एक ऐसा शख्स हैं जो आपकी ज़िंदगी बदल सकता हैं। कहने को तो “संदीप” एक आम-सा नाम हैं, और आप संदीप नाम के बहुत से लोगो को जानते होंगे.. लेकिन आज हम जिस संदीप के बारे में बताने जा रहे हैं वो स्पेशल हैं ..Q कि इस Sandeep ने न सिर्फ अपनी life चेंज की हैं बल्कि seminaar करके लाखों-करोड़ो लोगो को एक बेहतर ज़िंदगी जीने के लिए inspire किया हैं. आइए जानते हैं ऐसे Quotes जो आपकी ज़िंदगी बदल सकते हैं..

1. अगर मेरे जैसा लड़का जो दब्बू था.. जो शर्माता था.. वो अगर स्टेज पर आकर बोल सकता हैं तो दुनिया का कोई भी आदमी कुछ भी कर सकता हैं।

2. ज़िन्दगी में कभी भी कुछ करना हैं तो सच बोल दो, घुमा-फिरा कर बात मत करो।

3. जो मन करे वही करो.. Q कि यह दिन दोबारा नही आने वाला।

4. आज मैं जो कुछ भी हूँ, अपनी failures की वज़ह से हूँ।

5. सफलता Experience से आती हैं और Experience.. Bad experience से।

6. जो लोग अपनी सोच नही नही बदल सकते वो जिंदगी में कुछ नही बदल सकते।

7. तुम अपने दिमाग को कंट्रोल कर लो, नहीं तो फिर यह तुम्हें कंट्रोल करेगा।

8. किसी भी काम में अगर आप अपना 100% देंगे तो आप सफल हो जाएंगे।

9. पैसा उतना ही ज़रूरी हैं जितना कार में पेट्रोल, न कम, न ज्यादा।

10. जिस व्यक्ति ने अपनी आदतें बदल लीं उसका कल अपने आप बदल जाएगा, और जिसने नहीं बदलीं, उसके साथ कल भी वही होगा जो आज तक होता आया हैं।

11. अगर आप उस इंसान की तलाश कर रहे हैं जो आपकी ज़िन्दगी बदलेगा, तो आईने में देख लें।

12. अगर आप महानता हासिल करना चाहते हैं तो इजाजत लेना बंद किजिए।

13. गलतियां इस बात का सबूत हैं कि आप कम से कम प्रयास तो कर रहे हैं।

14. एक ‘इच्छा’ कुछ नहीं बदलती, एक ‘निर्णय’ कुछ बदलता हैं, लेकिन एक ‘निश्चय’ सब कुछ बदल देता हैं।

15. सफलता हमेशा अकेले में गले लगाती हैं.. लेकिन असफलता हमेशा सबके सामने तमाचा मारेगी.. यही जीवन हैं।

16. चाहे तालियां गूँजें या फीकी पड़ जाएँ, अंतर क्या हैं ? इससे मतलब नहीं है कि आप सफल होते हैं या असफल. बस काम करिये, कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता।

17. मैं सिर्फ good luck को मानता हूँ, bad luck नाम की इस दुनिया में कोई चीज नहीं, क्योंकि जो होता हैं अच्छे के लिए होता हैं। इसका मतलब हमारे साथ कुछ बुरा भी हो रहा हैं तो बुरा लग रहा हैं बुरा हैं नहीं, आज बुरा लग रहा हैं आगे आने वाले टाइम पर पता चलता हैं कि वो भी अच्छे के लिए हुआ हैं।

18. वो क्या सोचेगा…ये मत सोचो…वो भी यही सोच रहा हैं. एक समय लोग मुझसे कहते थे.. ये ले दस रुपये और मेरी photo खींच दे.. अगर मैं यही सोचता कि लोग क्या कहेंगे तो मैं आज यहाँ नहीं होता.. “दुनिया का सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग”।

19. सीखो सबसे, परन्‍तु follow किसी को मत करो।

20. अगर आपके पास ज़रूरत से ज़्यादा हैं तो उसे उनसे बाँटिये जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत हैं।

21. मैं इस वजह से successful नहीं हूँ कि कुछ लोगों को लगता हैं कि मैं successful हूँ.. मैं इस वजह से successful हूँ Q कि मुझे लगता हैं कि मैं successful हूँ..

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Sex Worker की बेटी ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप जीत कर पलट दी क़िस्मत की बाज़ी

जिन मुश्किलों और संघर्षों का ज़िम्मेदार हम अकसर क़िस्मत या ईश्वर को ठहरा देते हैं, कुछ लोग उन्हीं मुश्किलों से लड़कर आगे निकल जाते हैं और क़िस्मत को भी मात दे देते हैं. शायद यही ख़्याल आएगा आपको इस लड़की की कहानी जानकर.

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप जीतने वाली 19 साल की अश्विनी ने अपनी ज़िन्दगी में बहुत से उतार-चढ़ाव देखे हैं. फ़ेसबुक पेज Humans of Bombay पर इस लड़की की कहानी शेयर की गई. मगर इस मुस्कुराते चेहरे के पीछे जितना दर्द और संघर्ष छिपा है, उसको कोई तस्वीर नहीं बयां कर सकती.

Source: Topyaps

अश्विनी की मां एक सेक्स वर्कर थीं. उन्होंने महज़ 8 साल की उम्र में अश्विनी को ख़ुद से दूर एक एनजीओ में भेज दिया. यहां से शुरू हुआ अश्विनी का सफ़र, आज न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी तक पहुंच गया.

Humans of Bombay के पेज पर अश्विनी ने लिखा,

'मैं ज़िन्दगी भर भागती रही. मैं जब 5 साल की थी तो अपनी मां से डरकर भाग गई, जो कि एक सेक्स वर्कर थीं. वो लिपस्टिक जैसी छोटी सी चीज़ भी गुम हो जाने पर भी मुझे बुरी तरह पीट देती थीं.
शुरूआती दिनों में उनके साथ की मेरी कुछ यादें हैं. मैं अपने दोस्तों के साथ बिल्डिंग में छुपा-छुपी खेल रही थी और ग़लती से पीछे खड़ी Bikes से टकरा गई. वो सब गिरती चली गईं. चौकीदार ने हमें बिल्डिंग में बंद कर दिया और मां से शिकायत कर दी. उसके बाद मेरी मां चिल्लाते हुए झाड़ू लेकर मेरी तरफ़ आई. मैं बहुत तेज़ डर गई और तेज़ी से भाग गई'.

एनजीओ हॉस्टल में ग़लतियों पर पीटा और भूखा रखा जाता था

Source: stringerpress

मां ने अश्विनी को जिस एनजीओ हॉस्टल में भेजा था वहां के नियम इतने कड़े थे कि नियमों को तोड़ने पर अश्विनी को बुरी तरह पीटा जाता और कई दिनों तक भूखा रखा जाता. 10 साल तक उसे गालियां और भूख सहनी पड़ी क्योंकि उसकी मां इस बीच गुज़र चुकी थीं और अब उसका कोई नहीं था. छोटी सी उम्र में ज़िन्दगी की नई शुरुआत करना कठिन था. उसकी कुछ सहेलियां भागकर क्रांति नाम की एक संस्था, जो लड़कियों की देखभाल करती थी, में चली गईं. अश्विनी भी एक दिन वहां चली गई.

'क्रांति' एनजीओ अश्विनी की ज़िन्दगी में सचमुच क्रांति लेकर आया. उसने वहां रहते हुए अलग-अलग Art Forms के बारे में सीखा. उसने पश्चिम बंगाल में थियेटर और हिमाचल में फ़ोटोग्राफ़ी सीखी. इस संस्था के माध्यम से उसने पूरा भारत घूमा. इसके साथ ही उसने गुजरात के एक एनजीओ के साथ और दिल्ली में दलित समुदाय के साथ काम किया. अश्विनी एक आर्ट थेरेपिस्ट बनना चाहती है ताकि उन लोगों की मदद कर सके, जो ख़ुद को अभिव्यक्त नहीं कर सकते.

अश्विनी की मदद को सामने आए लोग 

अपने सपने को पूरा करने के लिए उसने न्यूयार्क यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया. उसका आवेदन तो स्वीकार किया ही गया साथ ही उसे स्कॉलरशिप भी मिल गई. स्कॉलरशिप के अंतर्गत अश्विनी की पढ़ाई का पूरा ख़र्च यूनिवर्सिटी वहन करेगी, पर रहने-खाने का ख़र्च उसे ख़ुद ही उठाना होगा.

Source: Ketto

अश्विनी को वहां रहने और खाने के लिए लगभग 10 लाख रुपये चाहिए थे और उसके पास इतनी बड़ी रकम नहीं थी. Humans of Bombay पेज ने अश्विनी की मदद करने के लिए उसकी कहानी शेयर की. उसकी मदद के लिए कई लोग आगे आये और अब तक 11 लाख से ज़्यादा रुपये इकट्ठा हो चुके हैं. आर्थिक मदद के अलावा भी न्यूयॉर्क में रहने वाले कुछ भारतीयों ने अश्विनी को अपने घर पर रुककर पढ़ाई पूरी करने का ऑफ़र दिया है.

अश्विनी की इस कहानी में हर इन्सान के लिए एक प्रेरणा है कि मुश्किलें कभी भी इन्सान के इरादों से बड़ी नहीं हो सकतीं. हौसला हो तो अंधेरी गलियों से निकलकर इन्सान, न सिर्फ़ रौशनी में आ सकता है, बल्कि दुनिया को रौशन भी कर सकता है.

 

Source: topyaps

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95 प्रतिशत नम्बर लाने वाले ऋषि ने सिर्फ़ परीक्षा ही पास नहीं की, बल्कि कैंसर को भी हराया है

कहते हैं कि लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. कुछ ऐसे ही हैं रांची के ऋषि. कैंसर पीड़ित इस छात्र ने वो कारनामा कर दिखाया, जिसके बाद हर कोई इन्हें सलाम करने में हिचक नहीं रहा.

इस बार आए 12वीं के रिज़ल्ट में ऋषि ने 95 प्रतिशत नम्बर प्राप्त किये हैं. लेकिन ये नम्बर जिस परिस्थिति में आए हैं वो काबिले तारीफ़ है. साल 2014 में 10वीं की परीक्षा के दौरान ऋषि को हड्डियों का कैंसर हो गया था. इस कारण वो अपनी परिक्षा नहीं दे पाए थे. इलाज़ के दौरान उन्होंने 2015 में अपनी बोर्ड की परीक्षा दी और पास हुए.

Source: HT

ऋषि की हालत का पता इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें हर तीसरे महीने दिल्ली के एम्स में इलाज़ के लिए आना पड़ता है. ऐसे में उनकी पढ़ाई पर भी गहरा असर पड़ता था. लेकिन इन सब परेशानियों के बीच ऋषि ने कभी भी पढ़ाई को नहीं छोड़ा.

इतना ही नहीं, ऋषि ने अपने इस स्ट्रगल को शब्दों में भी उतारा है. उन्होंने 'Patient-Patient' नाम की एक किताब भी लिखी है, जो ऑनलाइन वेबसाइट पर काफ़ी बिक रही है.

Source: Yourstory

ऋषि को अभी वक़्त लगेगा पूरी तरह से इस बीमारी से उबरने में. लेकिन अपनी इस परेशानी के बावजूद ऋषि ने अपने सपनों का पीछा करना नहीं छोड़ा और आज उनके नम्बर उनकी जीत की कहानी बयां कर रहे हैं.

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हरियाणा बोर्ड ने 10 वीं कक्षा की गलत मेधा सूची जारी की, दो कर्मचारी निलंबित !

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने सोमवार को 10वीं कक्षा की गलत मेधा सूची जारी कर दी, जिसे लेकर उसे असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। हालांकि बाद में इस गलती को सुधार लिया गया। इस संबंध में दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक कंप्यूटर से जुड़ी गड़बडी के कारण ऐसा हुआ। इस साल के परीक्षा परिणाम उत्साहजनक नहीं रहे हैं और प्राय: परीक्षा देने वाला हर दूसरा छात्र उतीर्ण नहीं हो सका है। इतनी बड़ी गलती की भनक लगते ही बोर्ड ने दोबारा दो घंटे बाद नई लिस्ट जारी कर पहले की लिस्ट में टॉप रहे बच्चे से माफी मांगी और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा ना होने का आश्वासन दिया है।

गौरतलब है कि पहली लिस्ट में फतेहाबाद की मोनिका को 500 में से 493 अंको के साथ पहले नंबर पर, 491 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर भिवानी के रूपेश को तथा 490 अंक पाने पर फतेहाबाद की अंजलि, हिसार के रवि कुमार एवं जींद के रजत को तीसरा टॉपर बताया गया था। बोर्ड ने सुधार के बाद जो नई टॉपर लिस्ट जारी की है उसके बाद सिरसा के युद्धवीर ने 499 अंक लेकर प्रदेश में पहला स्थान पाया है। वहीं 496 अंक लेकर जींद के सुमित  ने दूसरा तथा 495 अंक लेकर जींद की ही सोनम व पलवल के राकेश ने तीसरा स्थान पाया है। इस पूरे मामले के बाद बोर्ड चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह व सचिव अनिल नागर ने दोबारा से नई लिस्ट जारी की। बोर्ड चेयरमैन व सचिव ने बताया कि पहली लिस्ट गलत जारी हुई वो कंप्यूटर द्वारा किसी विषय में 100 अंक लेने वाले बच्चों को डी ग्रेड में डाल दिया जिससे उनके अंक 100 की बजाय 90 काऊंट हो गए। उन्होंने बताया कि ये तकनीकी गलती थी।

चेयरमैन व सचिव ने गलत लिस्ट जारी होने पर पहली लिस्ट में टॉप दर्शाए गए बच्चों से माफी मांग और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी। उन्होंने बताया कि  इस गलती पर जिस कंपनी ने रिजल्ट तैयार किया है उसपर दो लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है और रिजल्ट की जांच करने वाले दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। बोर्ड चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह ने बताया कि एक हजार 23 बच्चों ने किसी ना किसी विषय में 100 अंक प्राप्त किए थे, जिनके टॉपर लिस्ट के दौरान 90 काऊंट हो गए थे। बोर्ड सचिव अनिल नागर ने बताया कि जब वो चेयरमैन के साथ बैठकर टॉपर बच्चों के अंक जांच रहे थे तो पूरी गलती का पता चला। उन्होंने बताया कि नई टॉपर लिस्ट के बाद पहली टॉपर लिस्ट के बच्चों के अंको में कोई फैरबदल नहीं हुआ है। भले ही अब बोर्ड प्रशासन माफी मांगे लेकिन बोर्ड की इस लापरवही से पहले लिस्ट के टॉपर रहे बच्चों को मायूसी हाथ लगी है।

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Fake थी ख़बर किCM योगी आदित्यनाथ ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों से आरक्षण को हटा दिया है

कल से आपने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ के उस फ़ैसले की बड़ी वाह-वाही सुनी होगी, जिसके हिसाब से, 'उन्होंने UP के प्राइवेट मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में रेज़र्वेशन को ख़त्म करने का ऑर्डर दिया.' आपकी ख़ुशी पर ज़रा-सा लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं, असल में योगी ने ऐसा कोई फ़ैसला नहीं लिया और ये ख़बर पूरी तरह से Fake है.

Source: One India

कल शाम से ही वाह-वाही की इस बाढ़ की शुरुआत की, India Today के उस अति-उत्साही आर्टिकल ने, जिसने बिना जांच किये ये न्यूज़ छाप दी. उनकी देखा-देखी कई Desktop Journalists ने बिना News Source की जांच किये, इसे पब्लिश कर दिया. थोड़ी देर में ये ख़बर फैल गयी कि योगी ने मेडिकल कॉलेजों से आरक्षण हटाने का निर्णायक फ़ैसला दे दिया.


पहले न्यूज़ ब्रेक करने की होड़ में इंडिया टुडे ने ये भी कह डाला कि पहले ये फ़ैसला समाजवादी पार्टी की सरकार का था, जिसे योगी Implement कर रहे हैं.

इस Fake न्यूज़ का भांडा-फोड़ किया New Indian Express में, जब उन्होंने Principal Secretary, Medical Education से इस बारे में बयान लिया. उन्होंने ऐसे किसी भी फ़ैसले को झूठ बता दिया.

The Wire में छपे आर्टिकल में ये बात साफ़-साफ़ लिखी हुई है कि इस बाबत 2006 में पॉलिसी बनाई गयी थी, जिसमें अभी तक कोई बदलाव नहीं आया है. ये बात Times of India को दिए Quote में Director General Medical Education, डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने कही.

Source: Education Flash

10 मार्च के ऑर्डर के हिसाब से, अखिलेश यादव की सरकार ने मेडिकल और डेंटल के PG कोर्सेज़ के लिए NEET (National Eligibility cum Entrance Test) की मेरिट लिस्ट – 2017 के हिसाब से एक नयी एडमिशन पॉलिसी रिलीज़ की थी. इस ऑर्डर के क्लॉज़ 7 के हिसाब से, प्राइवेट मेडिकल और डेंटल कॉलेज में PG कोर्सेज़ के लिए SC/ST/OBC के लिए किसी भी तरह का आरक्षण नहीं होगा.

इस ख़बर से एक बात तो तय है कि प्रत्रकारिता जिन स्तंभों पर खड़ी हुई थी, आज वो जर्जर हो चुके हैं.

 

Source: The Wire 

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How to remember English tenses easily

 

Tenses are important thing when you learn English. Tenses are transformation of the forms of the verb associated with time. Therefore, in control of tenses, you must know the transformation of the form of the verb. In English there are approximately 16 forms of tenses which are developed by four basic tenses. For some people memorize the tenses are difficult, so in this opportunity, I will share some tips how to remember tenses quickly and easily. The first thing, you must understand are about “past form” and “continuous form”. Because both tenses are used to build the others form. Four basic forms of tenses which will be developed are:

  • Simple present tense
  • Future tense
  • Present perfect tense
  • Future perfect tense

Past form is usually made by change infinitive form or the first form of verb to second form of verb. For example:

Go → went
Play → played
Write → wrote, etc
 

Continuous form is made by adding “ing” after infinitive form. In this case, the verb must be changed into present participle. And you must use “be” before present participle. For example:

Go → going
Play → playing
Write → writing, etc

If you can understand about “past form” and “continuous form”, you will be able to make the others tenses form easily and also remember it quickly. Look at the basic form of tense below:

  • Simple present tense
  • Future tense 
  • Present perfect tense 
  • Future perfect tense

You will develop the first basic form of tense that is “Simple present tense”. Look at some steps below:

  • Change simple present tense into continuous form, and you can get present continuous tense.
  • Change simple present tense into past form, and you can get simple past tense.
  • Change simple past tense into continuous form, and you can get past continuous tense.

Those are simple steps to develop basic tense. These are the structure of tenses above

1. Simple present : S + V1
2. Present continuous : S + to be (am, is, are) + Verb in “ing form”
3. Simple past : S + V2
4. Past continuous : S + to be (was, were) + Verb in “ing form”

Please remember, don’t forget to put “be” after subject. Some steps above are also used to
develop the others basic form of tenses. So there will be 16 tenses:


1. Simple present : S + V1
2. Present continuous : S + to be (am, is, are) + Verb in “ing form”
3. Simple past : S + V2
4. Past continuous : S + to be (was, were) + Verb in “ing form”
5. Future : S + shall/will + bare infinitive
6. Future continuous : S + shall/will + be + Verb in “ing form”
7. Past future : S + should/would + bare infinitive
8. Past future continuous : S + should/would + be + Verb in “ing form”
9. Present perfect : S + has/have + V3
10. Present perfect continuous : S + has/have + been + Verb in “ing form”
11. Past perfect : S + had + V3
12. Past perfect continuous : S + had + been + Verb in “ing form”
13. Future perfect : S + shall/will + have + V3
14. Future perfect continuous : S + shall/will + have + been + Verb in “ing form”
15. Past future perfect : S + should/would + have + V3
16. Past future perfect continuous : S + should/would + have + been + Verb in “ing form”

 

 

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सुनी-सुनायी,मिलें बांचे में बांटे अनुभव और पढाया पाठ

दमोह/मध्यप्रदेश सरकार के विशेष अभियान “मिलें बांचे”के तहत जहां राज्य के मुखिया शिवराज सिंह चौहान सहित मंत्री,नेता,शासकीय सेवकां ने सहभागिता की तो वहीं जिले में भी यह क्रम जारी रहा जहां बडी संख्या में नियमानुसार पंजीयन कराकर लोगों ने शासकीय विघालयों में छात्र-छात्राओं के मध्य पहुंचे। बच्चों के मध्य अपने अनुभव बांटे,उनको आगे बढने कामयाब होने के गुर भी बतलाये। पढाया और पढा भी जिसको लेकर जहां शिक्षकों एवं बच्चों में अलग उत्साह देखने को मिला जबकि उक्त योजना में सम्मिलित हुये लोगों की प्रसन्नता का तो ठिकाना नहीं रहा।

पत्रकार भी बने मास्टर-

प्रदेश सरकार की उक्त योजना में जिले के ही रंगकर्मी,समाजसेवी एवं पत्रकार डा.एल.एन.वैष्णव एवं डा.श्रीमती हंसा वैष्णव ने भी शहर एवं ग्रामीणांचलों के विद्यालयों में मिल कर बांचा। सुबह निर्धारित समय से प्रारंभ हुआ यह सिलसिला संध्या तक जारी रहा। मांगज वार्ड ईमलाई के समीप प्राथमिक शाला में श्रीमती वैष्णव ने लगभग एक घंटे से अधिक पल बिताये।वहीं गुरूगोविन्द माध्यमिक शाला में पहुंचते ही डा.वैष्णव के मानस पटल पर बचपन के वह पल सामने आने लगे जो कभी उन्होने यहां बिताये थे। उन्होने सिर रखकर मिट्टी को प्रणाम किया। अपनी पूज्य मां को भी याद किया जिन्होने लगभग 20 बर्ष अधिक समय कमला पुत्री शाला में सेवायें दी। ज्ञात हो कि डा.वैष्णव की प्राथमिक शिक्षा गुरूगोविन्द विद्यालय में ही हुई थी। इस अवसर पर यहां भाजपा के जिलाध्यक्ष देवनारायण श्रीवास्तव श्री ताम्रकार जी,निर्गुण खरे,श्रीमती श्रुति जैन,श्री साहु ने भी अनुभव साझा किये।वहीं प्रधानाध्यपक नारायण प्रसाद चौबे,शिक्षक हृदेश कुमार पटेरिया,सतेन्द्र शर्मा,श्रीमती उर्मिला गौतम,कृष्णकांत दुबे,श्रीमती मालती खरे,ललिता राज एवं सुभाष कुमार ताम्रकार की उपस्थिति रही।

भूरी में मिले बांचे में बच्चों रहा उत्साह-

जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम भूरी की कन्या प्राथमिक शाला में सेवानिवृत स्टेनो-टू-कलेक्टर एच.एन.श्रीवास्तव एवं पत्रकार द्वय श्रीवैष्णव द्वारा बच्चों के मध्य घंटो बिताये। जीवन में सफल होने और आगे बढने के लिये श्री श्रीवास्तव ने अनेक मार्ग बतलाये। वहीं गीत,कविताओं के वाचन एवं कहानियों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को ज्ञान देने का प्रयास किया गया।इस अवसर पर शिक्षक संजय पाठक,देवेन्द्र असाटी,श्रीमती सरिता पाठक,जालम सिंह,गुलाब सिंह,नारायण विश्वकर्मा,धमेन्द्र मुडा,अमर साहु एवं सत्यम पाठक की विशेष उपस्थिति रही।

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कक्षा 2 के बच्चों ने एक दिव्यांग लड़की की मदद के लिए अपनी पॉकेट मनी बचा कर खरीदी व्हीलचेयर

राजस्थान के गांधीनगर जिले के छोटे-छोटे बच्चों ने एक ज़रूरतमंद लड़की की मदद करने का जो नायाब तरीका निकाला है, उसे जानकर आपका भी दिल गदगद हो जाएगा. छोटे-छोटे बच्चों ने जो महान काम किया है, वो हम सबके लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है. सच कहूं, तो अगर आप किसी की दिल से मदद करना चाहते हैं, तो आर्थिक बैकग्राउंड और उम्र कुछ मैटर नहीं करता.

दरअसल, कक्षा 2 में पढ़ने वाले बच्चों के समूह की नज़र स्कूल के एक फंक्शन में शारीरिक रूप से अक्षम लड़की पर पड़ी. जब बच्चों ने उस लड़की की स्थिति देखी, तो उनसे मदद किये बगैर रहा नहीं गया. इसलिए उन बच्चों ने उसकी मदद के लिए अपनी-अपनी पॉकेट मनी बचा-बचाकर एक व्हीलचेयर खरीदने की सोची.

Source: hindustantimes.com

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दस साल की बोलने और सुनने में दुर्बल ऊषा एक गरीब कृषि मजदूर की बेटी है. एक दिन वो श्री गांधीनगर में Stepping Stone English Modern School में फंक्शन देखने गई थी. ऊषा सरकारी स्कूल में पढ़ती है और फंक्शन में वो अपने एक परिचित के साथ गई थी.

कुछ दिनों बाद जब क्लास 2 की स्टूडेंट ख्याति ने शारीरिक रूप से विकलांग एक औरत को दो पहियों वाली स्कूटर को चलाते हुए देखा, तो तुरंत उसे ऊषा का ख्याल आया. उसके दिमाग में अचानक सवाल आया कि आखिर ऊषा क्यों नहीं ऐसी हो सकती. उसने अपने दादा से ये पूरा माजरा बताया. उसके दादा ने सलाह दी कि अगर वह लड़की मदद लेना चाहती है, तो अपनी पॉकेट मनी का इस्तेमाल कर उसकी मदद की जा सकती है.

Representative image source: indiamart.com

उसके बाद क्या था, छोटी बच्ची ख्याति ने इस विचार को अपने क्लास के 25-30 बच्चों के सामने में रखा और पूछा कि क्या वो सभी इस नेक काम में शामिल होना चाहते हैं? विचारशील छात्र दिव्यांग ऊषा की मदद को तैयार हो गये. सभी ने उषा के लिए व्हीलचेयर खरीदने के लिए सौ से लेकर हज़ार रुपये तक अपनी पॉकेट मनी से जमा किये. स्कूल प्रशास ने भी इस पहल की सराहना की.

स्कूल के डायरेक्टर विकास शर्मा ने कहा, हम लोग ये देखकर काफ़ी खुश थे कि ये छोटे-छोटे बच्चे इस नेक और महान काम के लिए अपनी पॉकेट मनी इकट्ठा कर रहे थे. हमने भी छोटा सा योगदान दिया है

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21 तस्वीरों में दिखेगी इतनी खूबसूरत Hand Writing कि आप चूमना चाहेंगे लिखने वाले की कलम

सबकी चाहत होती है कि उसकी हैण्ड राइटिंग इतनी सुन्दर हो कि लोग तारीफ़ करें. लाख मेहनत करके भी कुछ लोग डॉक्टर की तरह ही लिख पाते हैं, जबकि कुछ लोगों के हाथों में न जाने क्या जादू होता है कि कलम उठाते ही काग़ज पर मोतियां बरसाने लगते हैं. मेरे कुछ दोस्त तो अपनी कॉपी पर अपनी हैण्ड राइटिंग में लिखे किसी नोट को पढ़ नहीं पाते हैं. वैसे एक बात तो है, अच्छी हैण्ड राइटिंग लोगों को बहुत आकर्षित करती है.

हम इस आर्टिकल में आपको दिखाने जा रहे हैं कुछ ऐसी ही तस्वीरें, जिसमें लोगों की बेहद खूबसूरत हैण्ड राइटिंग है. आपको पहले ही बता देना चाहते हैं कि इनमें से कोई भी प्रिंटेड नहीं है. अब देखिये ज़रा इन तस्वीरों को.

ग़ज़ब की खूबसूरती है वाह!


लगता है उंगलियों में प्रिंटर है.


ये कॉफ़ी मग पर हाथ से लिखा गया है.


आपको पता है कि यहां Minimum लिखा है.


इस नोट्स से तो लड़के रात भर पढ़ लेंगे.


लिखने वाले के हाथों में कालरूपी जादू है.


इससे परफेक्ट पांच लिखा हुआ आपने कहीं नहीं देखा होगा.


और ये लगा एकदम परफेक्ट टिक.


अगर इस हैण्ड राइटिंग में गाली भी लिख दी जाये तो लोग पढ़ेंगे.


आख़िर कोई कैसा इतना प्यारा लिख सकता है?


इस हैण्ड राइटिंग को देख कर ही टीचर A+ दे देगा.


बस कलम से नहीं, चाक से भी लिख कर दिल जीता जा सकता है.


देखिये कितनी ख़ूबसूरती से Y लिखा हुआ है.


कलम इनके हाथों में गर्व महसूस करती होगी.


दुनिया का सबसे खूबसूरत हस्ताक्षर.


काश हमें भी ऐसा टीचर मिल जाता.


ये अजीब तो है पर खूबसूरत भी है.


ऐसी काम की लिस्ट मिले तो कोई आलस नहीं करेगा.


ये हुबहू एक जैसी है, कहीं कोई बदलाव नहीं.


विश्वास कीजिये ये कॉपी-किताब नहीं है.


और अंत में ये रही दिल को छू जाने वाली लिखावट.


बताइए एक ये लोग हैं, जिनकी कलम से मोती झड़ते हैं और एक हम जैसे लोग होते हैं, जिनका खुद का लिखा कभी खुद को ही समझ नहीं आता. टीचर हमारी कॉपी देख कर जो उपमाएं देते थे, उसे सबके सामने बताने में भी शर्म आती है. खैर, अच्छी हैण्ड राइटिंग में आप अपने दुशमन को भी कुछ लिख कर देंगे तो वो माफ कर देगा.

 

Source: Canyouactually

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सरकार की योजना में लगता पलीता,जिम्मेदार कौन? शिक्षा मित्र भी हुआ फेल,नये एप की तैयारी

डा.एल.एन.वैष्णव
भोपाल/ भले ही मध्यप्रदेश सरकार सब पढें,सब बढें के लक्ष्य को लेकर लगातार प्रयास कर रही हो उसके लिये करोडों रूपयों को खर्च कर रही हो परन्तु योजना में पलीता लगाने में लगे कुछ नाकारा,लापरवाहों के कारण सरकार की मंशा पर पानी फिरता देखा जा सकता है। गिरता शिक्षा का स्तर और इसमें होने वाली लापरवाही के एक नहीं अनेक उदाहरण सामने आते ही रहते हैं। जिनके कंधों पर शिक्षा देने की जिम्मेदारी है उनमें से अधिकांशों का राजनीति के प्रति रूझान और अन्य शिक्षा को छोड अन्य गतिविधियों में रूचि भी लगातार चर्चाओं में बनी रहती है। 
भांजियां छोड रही स्कूल-
मध्यप्रदेश राज्य का नाम उन प्रदेशों में होना जिनमें छात्राओं का बीच में ही पढाई छोडने वाले प्रदेश हों तो प्रश्न तो उपजेंगें ही न ? ( मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार) तीन बर्षों का रिकॉर्ड पर नजर डालें तो बर्ष 2012-13 7.79 16.39 बर्ष 2013-14 11.51 27.91 एवं बर्ष 2014-15 8.12 25.97 छात्राओं ने विघालय जाना छोडा है।देश के पांच फिसड्डी पांच राज्यों में मप्र का नाम होना विभाग के जिम्मेदार लोगों की कार्य क्षमता पर प्रश्न चिन्ह अंकित करता है? विदित हो कि राज्य सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान किसी भी प्रकार से बच्चियों की शिक्षा में धन की कमी नहीं रख रहे है। विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन भी किया जा रहा है जिसमें करोडों रूपयों खर्च किया जा रहा है। इसके बाद भी छात्राओं के स्कूल छोडने की संख्या में ईजाफा होना निश्चित रूप से विभिन्न प्रकार के प्रश्न शिक्षा विभाग के कर्णधारों के उपर तो अंकित होता ही है? 

शिक्षा मित्र हुआ फेल, नये एप तैयारी-
शिक्षा के स्तर को उंचा उठाने के लिये सरकार के द्वारा किये गये प्रयासों में जोडे गयी एक और योजना फेल हो गयी या कर दी गयी इस बात को लेकर भी लगातार चर्चाओं का बाजार गर्म है? शिक्षा मित्र एप पूरी तरह फेल हो चुका है जिसके चलते प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के स्वप्न को ध्वस्त करने की दिशा में लगे लोगों को कामयाबी मिलने की चर्चा है। ज्ञात हो कि प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की शत प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा तैयार कराया गया था। जानकारों की माने तो विभाग की मंशा इसके माध्यम से स्कूलों में शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस योजना प्रारंभ करने की थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग पांच माह पूर्व उक्त एप को लांच किया गया था। जिसको प्रदेश के शासकीय शिक्षकों को मोबाईल पर डाउनलोड करना था जिसके बाद विद्यालय में शिक्षक की उपस्थिति इसी से दर्ज कराना थी। विद्यालय में पहंुचने और बंद होने के समय और स्थान की जानकारी इससे सीधे संबधित विभाग को प्राप्त हो जाती। सूत्र बतलाते हैं कि राज्य के लगभग  4 लाख शिक्षकों में से दो लाख ने उक्त एप को मोबाईल पर डाउनलोड किया था जिसको उन्होने भी बंद कर दिया है। सूत्र बतलाते हैं कि सरकार अब शासकीय सेवा आचरण नियम में संशोधन करने की योजना पर कार्य कर रही है। कानून के जानकारों की माने तो शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत एक साल में 220 दिन शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य होना चाहिए। वहीं 800 दिन प्राथमिक शालाओं में होना अनिवार्य बतलाया गया है।  एक सप्ताह में करीब 45 घंटे शिक्षक की उपस्थिति अनिवार्य है।  अधिनियम मेें संशोधन कर शिक्षकों की उपस्थिति को तय किया जाएगा। शिक्षक संशोधित नियमों के अनुसार नहीं चलता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। यह उपस्थिति मैसेज के द्वारा ही लगानी होगी। जिसे पोर्टल पर दर्ज किया जायेगा। देखा जाये तो सरकार पूरी तरह कमर कस चुकी है वह किसी भी स्थिति में योजना को फेल होना नहीं देना चाहती तो योजना को फेल करने में लगे लोगों को छोडना भी नहीं चाहती।

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हर बच्चा बन सकता है जीनियस के विजेताओं को पुरस्कार वितरण:सतीश राज देशवाल

जींद | दसवीं शैक्षिक प्रतियोगिता हर बच्चा बन सकता है जीनियस के विजेताओं को स्कूल जाकर पुरस्कार वितरण करने के अभियान में जींद खंड में पहुंचे प्रतियोगिता के मुख्य आयोजक सतीश राज देशवाल ने 14 सरकारी व निजी विद्यालयों का दौरा करते हुए खंड स्तर पर प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार हासिल करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। उन्होंने खंड स्तर में प्रथम स्थान पर रहे महा सिंह मेमोरियल स्कूल ब्रहा खुर्द में पांचवी कक्षा के मिलन, सातवी कक्षा की शीतल, नौवी कक्षा की मोनिका व दसवी की दीप्ति को टेबलेट, सातवी कक्षा की छात्रा रितु, नौवी की किरण, दसवी की अंजू को साईकल, 3 छत के पंखे, 5 इमरजेंसी लाइट, 2 प्रेस, 15 एजुकेशनल किट देकर सम्मानित किया जबकि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय निदानी में चौथी कक्षा के नवीन , नौवी कक्षा की ज्योति, दसवी कक्षा का अंशू को टेबलेट, सातवी कक्षा की शिवम्, नौवी कक्षा की निधि व दसवी कक्षा की अंजू को साईकल, 1 छत का पंखा, 2 इमरजेंसी लाइट, 2 प्रेस, 4 एजुकेशनल किट, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इंटेल कलां में तीसरी कक्षा की मुस्कान, पांचवी कक्षा के सौरभ को टेबलेट, तीसरी कक्षा की स्वीटी, चौथी कक्षा के तलाश, पांचवी कक्षा के कपिल व आठवी कक्षा के हरमल को साईकल, 2 छत के पंखे, 3 इमरजेंसी लाइट, 2 प्रेस, 11 एजुकेशनल किट, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खरक राम जी में 1 प्रेस, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इक्कास में 1 इमरजेंसी लाइट, 1 एजुकेशनल किट, आर.डी. पब्लिक स्कूल राधना में 2 एजुकेशनल किट, दफ्फ़ोदिल्ल्स पब्लिक स्कूल निदाना में 1 एजुकेशनल किट, राजकीय कन्या उच्च विद्यालय ललित खेडा में 2 एजुकेशनल किट, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सिंधवी खेडा में 1 एजुकेशनल किट, राजकीय उच्च विद्यालय ब्रहा कलां में आठवी कक्षा के साहिल को टेबलेट, छठी कक्षा की हिमांशु को साईकल, 2 छत के पंखे, 1 इमरजेंसी लाइट, 1 प्रेस, 7 एजुकेशनल किट, राजकीय माध्यमिक विद्यालय इंटेल खुर्द में छठी कक्षा की सरला को टेबलेट, 1 छत का पंखा, 2 एजुकेशनल किट, राजकीय माध्यमिक विद्यालय अशरफगढ़ में सातवी कक्षा के राहुल को टेबलेट, 3 एजुकेशनल किट, राजकीय प्राथमिक विद्यालय सिंधवी खेर में 1 प्रेस, 1 एजुकेशनल किट, राजकीय प्राथमिक विद्यालय इंटेल खुर्द में 2 छत के पंखे, 1 इमरजेंसी लाइट, 1 प्रेस, 3 एजुकेशनल किट प्रदान किये गए |
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पावर ग्रिड कॉर्पोशन के सहयोग से शहर में होगी हरियाली-मलैया

डा.एल.एन.वैष्णव

दमोह/आने वाले दिनों में नगर में चारों हरियाली छा जायेगी और यह सब पावर ग्रिड कार्पोरेशन के द्वारा किये सहयोग से संभव हो सकेगा। मिशन ग्रीन में दिये गये पूरे सहयोग के लिये धन्यवाद देते हुये यह आशा करता हूं कि जिले के विकास में कार्पोशन का लगातार योगदान रहेगा यह बात स्थानीय विधायक एवं प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत कुमार मलैया ने कही। श्री मलैया पावर ग्रिड कार्पोरेशन द्वारा आयोजित कन्या छा़त्रावासों को पलंग वितरण कार्यक्रम में उपस्थितों को संबोधित कर रहे थे। श्री मलैया ने कहा कि कस्तूरबा कन्या छात्रावासों हेतु 500 पलंग प्रदान किये जा रहे है, जो कि सराहनीय कार्य है। उन्होने कहा कि उपक्रम शासकीय हो या प्राईवेट जब अच्छे व्यक्ति उनमें आ जाते हैं तो अच्छे काम होते हैं। श्री मलैया ने कहा कि आपके द्वारा बनाये गये हाल में मैने स्वयं बैठक ली है काफी अच्छा कार्य हुआ है। अपने सारगर्भित उद्बोधन के दौरान उन्होने नगर के बेलाताल के सौंन्द्रीयकरण एवं छात्रावासों को गद्दे भी प्रदान करने का आग्रह किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि श्री मलैया,पथरिया विधायक लखन पटैल, सहायक महाप्रबंधक बीए लाल,जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डा.जे0सी0जटिया,अनुविभागीय दण्डाधिकारी वृजेन्द्र रावत,तहसीलदार मनोज श्रीवास्तव ने दीप प्रज्जवलन कर किया। 

आत्मीय स्वागत,मानवंदना-
पावर ग्रिड कार्पोरेशन के सहायक महाप्रबंधक बीएल लाल ने मंत्री मलैया का पुष्पहार के साथ ही खादी के शाल से स्वागत एवं मान वंदना की। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों का भी स्वागत श्री लाल ने किया।

विकास एवं समाजिक कार्यो के लिये कृत संकल्पित-
इस अवसर पर शब्दों के माध्यम से स्वागत करते हुये अपने प्रतिवेदन में पावर ग्रिड कार्पोरेशन के सहायक महाप्रबंधक बीएल लाल ने कहा कि पूरे देश सहित जिले में भी पावर ग्रिड के द्वारा विकास में सहभागिता और सामाजिक कार्य किये जा रहे हैं। उन्होने कहा कि मिशन ग्रीन दमोह में हमने पूरा खर्च उठाते हुये अपना दायित्व निभाया है। समीप के ही ग्राम खेजरा में शासकीय विद्यालय में बाउंड्री वाल के साथ छात्र-छात्राओं को खेलने के लिये भी सामग्री प्रदान की है। श्री लाल ने बतलाया कि ग्राम तिदौनी में कम्यूनिटि हाल का निर्माण कराया तो वहीं अनेक मेडीकल एवं रक्तदान शिविरों का आयोजन भी किया है। पावर ग्रिड कार्पोशन द्वारा जिले में अनेक प्रकार के जनहितेषी करने की योजना है।

यह रहे उपस्थित-
इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष मालती असाटी, पुलिस अधीक्षक तिलक सिह, जिला शिक्षा अधिकारी पीपी सिंह, जिला परियोजना समन्वय शिक्षा मिशन हेमन्त खेरवार, पावर ग्रिड कार्पोरेशन के अधिकारी, कर्मचारियों के साथ ही गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सफल संचालन राजीव अयची ने किया।

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9 साल की उम्र में इस बच्चे का दिमाग इतना तेज़ है कि सुपर-30 संचालक आनंद कुमार रह गये दंग

जिस उम्र में बच्चे अपनी ज़िद और शरारतों की वजह से सबको परेशान कर देते हैं, उसी उम्र में एक बच्चा ऐसा भी है, जिसको न ही महंगे वीडियो गेम्स चाहिए और न ही कोई खिलौना. 9 साल का ये बच्चा इस उम्र में मंगल ग्रह के बारे में इतना ज़्यादा जानता है, जितना हम और आप नहीं जानते. इस उम्र में उसके ज्ञान का स्तर इतना ऊंचा है कि बड़े-बड़ों को उससे जलन होने लगती है. इस होनहार बच्चे का नाम है कौटिल्य.

Source: MorungExpress

अभी हाल ही की बात है, जब उसके पिता और दादाजी उसे महान गणितज्ञ आनंद कुमार के पास ले गये थे. आनंद कुमार वही गणितज्ञ हैं, जो गरीब बच्चों को आईआईटी की तैयारी करवाने के लिए सुपर-30 नाम की कोचिंग चलाते हैं. इस मुलाकात में आनंद कुमार को हैरान कर दिया, क्योंकि उनसे उम्र में बहुत कम ये लड़का बिलकुल ऐसे बात कर रहा था, जैसे दोनों ने एक ही साथ पढ़ाई की हो. कौटिल्य ने सुपर-30 के विद्यार्थियों से भी बात की.

जो मुकाम आनंद ने हासिल किया है, वैसा करने की काबिलियत सबके पास नहीं होती. हम कौटिल्य को आनंद कुमार के पास इसलिए ले गये थे ताकि आनंद जी बच्चे की काबिलियत को देखते हुए उसको भविष्य के लिए बेहतर मार्गदर्शन दें. – जे.के. शर्मा, कौटिल्य के दादाजी

Source: MorungExpress

भविष्य में कौटिल्य एक खगोलीय वैज्ञानिक बनना चाहता है. चंडीगढ़ के पास स्थित पंचकुला गांव का रहने वाला ये बच्चा भवन विद्यालय में पांचवीं कक्षा का छात्र है. इस उम्र में उसके पास मंगल ग्रह पर चल रही रिसर्च के सारे अपडेट्स हैं. इस बच्चे में अभी से आकंड़ों को सहेजने और भौगालिक लोकेशन की पहचान करने का हुनर है. जब शुरू-शुरू में हर बात को लेकर वो प्रश्न करता था, तो उसकी जिज्ञासा से परेशान होकर घरवालों ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिकों से बात की.उन्होंने इसे कुदरती देन बताया और सबको समझाया कि इस पर विशेष ध्यान दें, इसका टैलेंट बेकार नहीं जाना चाहिए.

Source: Saharasamay

अपने ज्ञान और विलक्षण प्रतिभा के कारण कौटिल्य ने 'कौन बनेगा करोड़पति' के सेट पर भी सबको चकित कर दिया था. बाद में अमिताभ बच्चन ने ट्वीट करके इस 'वंडर किड' के टैलेंट की प्रशंसा की. – सतीश कुमार, कौटिल्य के पिता

इस बच्चे में अपनी उम्र के अन्य बच्चों से कहीं ज़्यादा समझ, ज्ञान और पोटेंशियल है. इसको बिलकुल जो ठीक लगे, वही करने देना चाहिए. मैं इस बच्चे से बहुत ज़्यादा प्रभावित हूं और इसके लिए मुझसे जो कुछ हो पाएगा, मैं उसके लिए तैयार हूं. – आनंद कुमार

सही कहा गया है कि विद्वानों के पांव पालने में ही दिख जाते हैं. हम कौटिल्य के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं.

 

Feature Image: MorungExpress

Source: News18

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हर बच्चा बन सकता है जीनियस :सतीश राज देशवाल

खरखोदा व राई खंड में दसवी शैक्षिक प्रतियोगिता हर बच्चा बन सकता है जीनियस के विजेताओ को स्कूल जाकर पुरस्कार वितरण करने पहुंचे प्रतियोगिता के मुख्य आज आयोजक सतीश राज देशवाल ने 6 सरकारी एवं निजी विद्यालयों का दौरा करते हुए खंड स्तर पर प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार हासिल करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। उन्होंने खरखोदा के प्रताप सिंह मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल खरखोदा में जिला स्तर में प्रथम स्थान पर रहे सातवी कक्षा की छात्र अक्षय को लैपटॉप, खंड स्तर में प्रथम स्थान पर रहे चौथी कक्षा के छात्र केशव, आठवी कक्षी की ईशा व दसवी कक्षा के प्रिंस को टेबलेट, आठवी कक्षा की छात्रा अंजली व दसवी कक्षा के उत्तम सिंह को साईकल, 3 छत के पंखे, 5 इमरजेंसी लाइट, 3 प्रेस, 6 एजुकेशनल किट देकर सम्मानित किया जबकि उन्होंने तक्षिला पब्लिक स्कूल खरखोदा में तीसरी कक्षा के छात्र विवेक को टेबलेट, पांचवी कक्षा की सानिया व सातवी कक्षा की अंजली को साईकल, 3 छत के पंखे, 1 इमरजेंसी लाइट, 2 प्रेस, 7 एजुकेशनल किट, राई खंड के रोज वैली पब्लिक स्कूल राठधना में नौवी कक्षा की छात्रा सुचिता को टेबलेट, 1 छत का पंखा, 1 इमरजेंसी लाइट, 5 एजुकेशनल किट, लखी राम मेमोरियल पब्लिक स्कूल हलालपुर में तीसरी कक्षा के छात्र अंशुल, चौथी कक्षा की छात्रा सुहानी को टेबलेट, 3 प्रेस, 6 एजुकेशनल किट, एम.डी. शिक्षा सदन गढ़ी बाला की पांचवी कक्षा की प्रतीक को टेबलेट, छठी कक्षा की छात्रा वाणी, आठवी का अगम, नौवी कक्षा का अमित को साईकल, 2 इमरजेंसी लाइट, 2 प्रेस, 5 एजुकेशनल किट, राजकीय माध्यमिक विद्यालय झिन्जौली में सातवी कक्षा की छात्रा शीतल को टेबलेट, आठवी कक्षा के सागर को साईकल, 1 इमरजेंसी लाइट प्रदान किये गए |

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गोपाल जी की हिम्मत के सामने पैरालिसिस भी हार मान गया, 20 वर्षों से बच्चों में बांट रहे हैं ज्ञानदीप

ऊपर खुला आसमान, ज़मीन पर बिछी बोरियां और उन बोरियों पर बैठा देश का भविष्य. पहली नज़र में ये नज़ारा किसी गांव के सरकारी स्कूल का लगता है, पर ऐसा ही कुछ दृश्य उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर से कुछ किलोमीटर दूर कच्छवा माझी पट्टी में भी देखने को मिलता है, जहां एक मास्टर जी खेत के किनारे बने बगीचे में पिछले 20 सालों से देश का भविष्य संवारने में लगे हुए हैं.


कहने को तो ये एक आम-सी बात लगती है, पर मास्टर जी की कहानी जानने के बाद शायद ये कहानी आम नहीं रह जाती.

बचपन में माता-पिता का हाथ सर से उठना क्या होता है, इसे शायद आप और मैं नहीं समझ सकते हैं. इसके बावजूद खुद को इस काबिल बनाना कि वो मेडिकल की परीक्षा में बैठ सकें और एक कॉलेज में दाखिल ले सकें, किसी संघर्ष से कम नहीं. पर सब कुछ वैसा ही हो, जैसा हम चाहते हैं, ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता है. कुछ ऐसा ही गोपाल जी के साथ भी हुआ, जो मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के बाद जब घर की तरफ आ रहे थे तब रास्ते में एक एक्सीडेंट का शिकार हो गए. इस एक्सीडेंट में गोपाल जी की जान तो बच गई, पर ज़िन्दगीभर के लिए कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया और उनकी ज़िन्दगी व्हीलचेयर पर आ कर थम गई. जिस वक़्त इंसान को परिवार की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है, उसी वक़्त में परिवार ने भी मुंह मोड़ लिया. गोपाल जी के दोनों भाइयों ने उनसे किनारा कर लिया और अपनी-अपनी ज़िन्दगी में मशरूफ हो गए.


ये गोपाल जी की हिम्मत ही थी, जो इतना सब कुछ होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक दोस्त के सहारे मिर्ज़ापुर पहुंचे, जहां उन्हें दोस्त की सिफारिश पर एक छत मिली. यहां पहुंचने के बाद गोपाल जी ने देखा कि जिस देश के भविष्य को स्कूल में आने वाले कल की आधारशिला रखनी चाहिए थी, वो यहां गलियों में आवारा, गलियां देते हुए घूम रहा है. गांव में कोई स्कूल न होने की वजह से बच्चे सारा दिन गलियों में आवारागर्दी करते रहते, कभी किसी से लड़ाई करते, कभी चोरी करते. देश के भविष्य को इस तरह से बर्बाद होता देख गोपाल जी ने खुद ही उसे संवारने का जिम्मा उठाया और एक स्कूल चलाना शुरू किया. इस स्कूल में दीवारों और छत के नाम पर थे, तो बस बगीचे में खड़े पेड़ और ऊपर खुला नीला आसमान, जिसकी ओट में कक्षाएं चलनी शुरू हुईं और कब 20 साल गुजर गए, खुद गोपाल जी को नहीं पता चला.


इन 20 सालों में सरकारें आईं-गईं और पीछे छोड़ गईं, तो बस झूठे दिलासे और चुनावी वादें. जो कभी कहती कि गोपाल जी के लिए पेंशन की व्यवस्था करेंगे, कभी कहती इस बार चुनाव जीतने पर स्कूल की बिल्डिंग पक्का, पर चुनावों के बाद ये वादे खोखले ही साबित होते.


स्कूल की फीस के नाम पर गांव वाले गोपाल जी को दो वक़्त की रोटी तो दे देते हैं, पर वो सम्मान और हक़ कहां हैं, जो उन्हें सरकार और प्रशासन से मिलना चाहिए था?


उनके द्वारा पढ़ाये गए कई छात्र सरकारी नौकरी में सेवाएं दें रहे हैं, पर गोपाल जी आज भी बिना किसी वेतन और पेंशन के इस देश की बुनियाद को मज़बूत कर रहे हैं.


एक तरफ ऐसे लोगों की कमी नहीं, जो आये दिन सरकार और प्रशासन से देश सेवा के नाम पर खुलने वाले NGO के लिए पैसा ले कर अपनी जेबें भर रहे हैं. दूसरी तरफ सरकार के पास ऐसे लोगों की सुध लेने का ही समय नहीं, जो नि:स्वार्थ भाव से एक मज़बूत देश की आधारशिला रख रहे हैं.


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अपने लैपटॉप की ‘F’ और ’J’ Key पर हाथ रखिये. आखिर उन पर ये उभार क्यों हैं?

लैपटॉप के बटनों पर उंगलियां चलाते हुए शायद ही आपने कभी ध्यान दिया हो कि प्लेन सरफेस पर कुछ उभार भी है. चलो अगर नहीं किया तो अभी अपने लैपटॉप के J और F बटन को देखिये. इन दोनों पर आपको एक छोटी-सी लाइन उभरी हुई दिखाई देगी.


बटनों पर उभरी ये लाइन्स आपकी उंगलियों को निर्देश देने का काम करती हैं कि कौन-कौन से बटन किन उंगलियों के लिए बने हैं.


इन उभारों की ही वजह से आप बिना कीपैड की तरफ देखे आसानी से टाइपिंग कर लेते हैं. ऐसे ही उभार को आप अपने मोबाइल कीपैड पर नोटिस कर सकते हैं, जो कि 5 नंबर पर होता है.


Source: quora

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