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देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। वाजपेयी ने अपनी पढ़ाई-लिखाई कानपुर में की। अपने कॉलेज के समय से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बन गए थे। उन्होंने राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कानपुर के एक कॉलेज से किया। जिसके बाद उन्होंने एलएलबी बीच में ही छोड दी और राजनीति में पूरी तरह सक्रीय हो गए।राजनीति में उन्होंने अपना पहला कदम अगस्त 1942 में रखा, जिसके बाद 1951 में वाजपेयी भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्य बनेे। अटल 1957 से 1977 तक (जनता पार्टी की स्थापना तक) जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। साथ ही 1968 से 1973 तक वे भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर आसीन रहे। 1955 में वाजपेयी ने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गए। इसके बाद 1957 में जन संघ ने उन्हें लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर तीन लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ाया। वाजपेयी लखनऊ और मथुरा में चुनाव हार गए,स लेकिन बलरामपुर से चुनाव जीतकर वे लोकसभा पहुंचे।
1977 में वाजपेयी पहली बार गैर कांग्रेसी विदेश मंत्री बने। मोरारजी देसाई की सरकार में वह 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया और देश का गौरव बढ़ाने के लिए ऎसा करने वाले वे पहले भारतीय विदेश मंत्री थे। 1980 में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर उन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की।
16 मई, 1996 को वो पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई, 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा। इसके बाद 1998 में हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा अन्य दलों के मुकाबले सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आई। विभिन्न दलों ने आगे बढ़ते हुए भाजपा को समर्थन दिया और इस तरह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) बना। वाजपेयी को एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। हालांकि, एआईएडीएमके के समर्थन वापसी के बाद उनकी 13 महीने की सरकार 17 अपे्रल 1999 को महज एक वोट से विश्वास मत हासिल नहीं कर पाई।
वहीं, विपक्ष के भी आंकड़े नहीं जुटाने के बाद देश में एक बार फिर आम चुनाव हुए। इन चुनावों में एनडीए गठबंधन को एक बार फिर जीत मिली और 1999 से लेकर 2004 तक वाजपेयी ने सफलतापूर्वक सरकार चलाई। वे एनडीए सरकार के पहले ऎसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने गैर-कॉग्रेसी प्रधानमंत्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए।
File Photo
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