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पंजाबी समाज के भेदभाव को दूर करने के लिये पंजाबी आयोग का गठन हो


फरीदाबाद । राष्टृीय पंजाबी महाशक्ति मंच के राष्टृीय अध्यक्ष हरीश चन्द्र आज़ाद ने बताया कि हरियाणा में पंजाबी मु यमंत्री बनाने के लिये मैने करीब पाँच वर्ष संर्घष किया और प्रदेश में सबसे पहले पंजाबी मु यमंत्री का आवाज़ हमारे राष्टृीय मंच द्वारा ऊठाई गई तब लोग हम पे हंसा करते थे कि हरियाणा में पंजाबी मु यमंत्री बनना वह वाब है जिसको भगवान भी पूरा नही कर सकते लेकिन हमारे संर्घष ने हि मत नही हारी और प्रदेश में पंजाबी अलख सात वर्ष पहले जगाई थी और इस संर्घष को इतना मजबूत बना दिया और हमारे पक्के इरादे देखकर धीरे धीरे प्रदेश की राजनिति पार्टीयां मानने लगी कि पंजाबियों के सिवा प्रदेश की सत्ता पर काबिज़ होना नामु किन है और हर पार्टी ने पंजाबी कार्ड खेला लेकिन पंजाबी समाज जान चुका था कि पंजाबी मु यमंत्री का सपना केवल और केवल भाजपा पूरा कर सकती है इसलिये पंजाबी समाज ने भाजपा का दिल खोलकर साथ दिया । पंजाबी समाज ने मेरा वह ब्यान सही साबित कर दिया कि जिसके साथ पंजाबी उसके हाथ सत्ता की चाबी ।
हरीश आज़ाद ने कहा कि हमने उस समय मनोहर लाल खटर जी का नाम मुयमंत्री के लिये ऊछाला जब खटर जी ने चुनाव लडऩे का सोचा भी नही होगा । हमारी यह दूरगामी सोच भी सही साबित हुई और मनोहर लाल खटर जी मु यमंत्री बने । आज पंजाबी समाज खटर जी से केवल यही उ मीद लगाता है कि वह जात-पात से ऊपर ऊठकर सर्वजन के हित के लिये काम करें और किसी भी जात से भेदभवा न करें जैसा कि हमारी कौम के साथ बाकि सरकारों ने किया क्योंकि हम भेदभाव का दर्द अच्छी तरह से समझते हैं । पंजाबी समाज हमेशा से देश भक्त रहा है और जात-पात से कोसों दूर रहा है जिसका उदाहरण पंजाबी समाज ने 28 दिस बर को करनाल में पंजाबी मु यमंत्री और पंजाबी विधायकों के स्वागत में दिया और मंच से साफ ऐलान किया कि पंजाबी समाज आरक्षण नही चाहता केवल पंजाबी समाज के साथ हुए भेदभाव पर मरहम लगाना चाहता है ।
हरीश आज़ाद ने कहा कि मुल्क दी शान पंजाबी हैं जैसे शानोशौकत की बात हो या किसी से अपमान जताने की या जिन्दगी का भरपूर आन्नद लेने की तो कोई भी जान जाता है कि यहां बात पंजाबियों की हो रही है । पंजाबी समाज आज भी हरियाणा में भेदभाव का दर्द नही भूला पा रहा क्ंयोकि पंजाबियों के सियासत मंद लोगों ने इतना भेदभाव किया है कि उनको वह दर्द भूलाने में बर्सों लग जायेगें । अब यह बात हमारे पंजाबी नेताओं को समझानी है कि इस दर्द की वह क्या दवा निकालते हैं ।
आज़ाद ने कहा कि सबसे पहले प्रदेश में पंजाबी आयोग का गठन किया जाना चाहिये और प्रदेश में लगभग सुचारू रूप से वर्षों से काम कर रही पंजाबी संस्थाओं को साथ लेकर एक ऐजंडा बनाना होगा क्योंकि पंजाबी समाज का दर्द बिना पंजाबी संस्थाओं के नही समझा जा सकता आज पंजाबी समाज अपने पंजाबी मु यमंत्री और पंजाबी विधायकों को टुकटक़ी लगाये देख रहा है कि वह अपने समाज के साथ हुए भेदभाव और उनको प्रदेश पर हश्यिे से ऊपर कैसे ऊठाया जा सकता है । उन्होने कहा कि हम आज भी यह नही कहते कि प्रदेश सरकार जात-पात की राजनिति करे लेकिन जैसे प्रदेश सरकार पिछली सरकार से हुई गलतीयों और भ्रष्टाचार की जाँच कर रही है उसी तरह प्रदेश सरकार पंजाबी समाज के साथ हुई राजनिति ज्यादतीयों को ऊजागर करके उन पर मरहम लगाये और इसके लिये सबसे सही हल है कि प्रदेश की छोटी बड़ी सभी पंजाबी संस्थाओं को साथ लेकर पंजाबी आयोग का गठन किया जाये और इसका भार पंजाबी संस्थाओं को दिया जाये ।

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