विदर्भ में पिछले 72 घंटे में 12 किसानों ने की आत्महत्या, फसल नष्ट होने से थे परेशान

मुंबई. महाराष्ट्र के विदर्भ में किसानों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले 72 घंटों में 12 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। विदर्भ जन आंदोलन समिति के चीफ किशोर तिवारी ने इन आत्महत्याओं के पीछे की वजह बताई है कि इन लोगों ने फसल नष्ट हो जाने के कारण मौत को गले लगाया है। किशोर तिवारी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, फसलें तबाह होने के कारण विदर्भ के 12 किसानों ने आत्महत्या की है। ये सभी किसान पश्चिमी विदर्भ के कपास उगाने वाले क्षेत्र से हैं।
किशोर तिवारी के अनुसार, आत्महत्या करने वाले किसान- चिखालवर्धा गांव निवासी सैयद अंसार अली, देहगांव निवासी खुशाल कपासे, मानकिन्ही गांव निवासी पुनाजी मानवर, तंबा गांव निवासी सोमेश्वर वाडे और निग्नूर निवासी मारोती राठौर हैं। ये सभी किसान यवतमाल जिले के रहने वाले हैं।
इनके अलावा वर्धा जिले के भी तीन किसानों ने मौत को गले लगाया है। इनके नाम हैं पिंपलगांव निवासी मधुकर अदसर, देवली निवासी विट्ठल तावड़े और पिंपलगांव निवासी मरोटी गोडे हैं। इनके अलावा दो अन्य किसानों ने भी आत्महत्या की है जिनमें शिवानी गांव निवासी शिवानंद गीते, और गवथला निवासी सुनील रखुंडे हैं। वासिम और अमरावती जिलों में भी दो किसानों ने आत्महत्या की है। इन मौतों के बारे में पीटीआई से बात करते हुए विदर्भ जन आंदोलन समिती के चीफ किशोर ने बताया कि विदर्भ में किसानों की आत्महत्या का मामला काफी गंभीर है।

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