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‘द मेडिसिटी आर द हेलसिटी’, मां की मौत पर बेटी ने मेदांता के खिलाफ सोशल मीडिया पर छेड़ी जंग



नई दिल्लीः स्टाफ की कथित लापरवाही से मां की मौत के बाद एक बेटी ने गुणगांव के मशहूर मेदांता हास्पिटल के खिलाफ सोशल मीडिया पर जंग छेड़ दी है। बेटी के दुखड़े को तंमाम लोग फेसबुक वॉल से शेयर कर अस्पतालों के पैसे चूसने के रवैये पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। बेटी ने मेदातां-द मेडिसिटी आर द हेलसिटी हेडिंग से लिखी पोस्ट पर हास्पिटल की सर्विसेज पर सवाल उठाए हैं। कहा है कि हास्पिटल की लापरवाही से उसने अपनी मां खो दी। इस नाते सबको हास्पिटल के प्रति आगाह कर रही है। फेसबुक पर इस मशहूर हास्पिटल के खिलाफ पोस्ट लिखा है दिल्ली की नंदिनी सिन्हा ने। नंदिनी ने हास्पिटल स्टाफ की लापरवाही कुछ यूं बयां की है। डाक्टर ने सर्जरी नहीं बोला, नर्सिंग स्टाफ ने लिख दिया नंदिनी के मुताबिक उन्होंने अपनी मां को बीते छह फरवरी को mitral valve replacement surgery के लिए एडमिट कराया। दो दिन बाद नर्सिंग स्टाफ ने चार लाख रुपये की व्यवस्था करने को कहा। बताया गया कि बाईपास सर्जरी होगी। वह किसी तरह चार लाख रुपये का इंतजाम कर हास्पटिल पहुंची। इस दौरान मन में जिज्ञासा हुई कि मां को बाईपास सर्जरी की कहां जरूरत पड़ गई, जिस इलाज के लिए भर्ती हुई है उसमें तो नार्मल सर्जरी होती है। इस पर नंदिनी ने चिकित्सकों से संपर्क किया तो पता चला कि सर्जरी के लिए उन्होंने बोला ही नहीं था। यह सुन नंदिनी दंग रह गई। पड़ताल में पता चला कि नर्सिंग स्टाफ ने पर्चे पर लापरवाही से बाईपास सर्जरी का जिक्र कर दिया। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के बीच बातचीत में कुछ कंफ्यूजन पैदा होने से यह हाल हुआ। इससे साफ पता चलता है कि स्टाफ ने कितनी भारी लापरवाही बरती। आरोपः मौत के बाद भी वेंटीलेटर पर रख पैसे वसूले  नंदिनी का आरोप है कि एक महीने बाद उनकी मां की हालत फिर खराब होने पर मेदांता हास्पिटल में भर्ती कराया गया।  जहां हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया। बाद में जब घर के लोगों और रिश्तेदारों ने शरीर का स्पर्श किया तो पता चला कि सब कुछ ठंडा पड़ गया है। जिससे पता चला कि शरीर में जान नहीं है। बावजूद इसके मां  को वेंटीलेटर पर रखा गया। ताकि पैसे वसूले जा सकें। मंगाई एक लाख की एक ड्रग नंदिनी ने लिखा है कि जब उसने मां के बेजान शरीर के बारे में चिकित्सकों को बताया तो उन्होंने वेंटीलेटर पर जिंदगी बचाने का तर्क देकर शरीर रखने की सलाह दी।  इसके लिए एक लाख रुपये की Thrombolysis नामक ड्रग  मंगाई गई। मगर जब जिस्म में जान ही नहीं थी तो ये दवाएं किस काम की।  हास्पिटल का इलाज में किसी तरह की लापरवाही से इन्कार  इस मामले में पक्ष लेने के लिए इंडिया संवाद का हास्पिटल के संबंधित चिकित्सक से संपर्क नहीं हो सका। मगर हास्पिटल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मरीज के इलाज में स्टाफ ने किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती। मेदांता हास्पिटल की सुविधाएं विश्वस्तरीय हैं। इस नाते देॆश ही नहीं दुनिया में इसकी ख्याति है। हर मरीज के इलाज में पूरी सावधानी और तत्परता बरती जाती है। आरोप गलत हैं।

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