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सर्दी के साथ ही बढ़ी कंबल की मांग, चाईनीज कंबल से परहेज
भारतीय कंबल ने फिर बाजार में बिखेरी अपनी गर्माहट
नेहा वालिया, लोहारू। 

नवंबर माह के मध्य में सर्दी की दस्तक के साथ ही बाजारों में कंबल की बिक्री भी शुरू हो गई है। बाजारों में अनेक वैरायटी के कंबल दुकानों पर उपलब्ध है तथा उनकी वैरायटी के हिसाब से ही उनकी कीमत तय है। लेकिन इस बार बाजार में चाईना मेड कंबल सस्ता होने के बाद भी ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पा रहा है। लोगों द्वारा चाईनीज सामान के बहिष्कार का असर यहां भी देखने को मिल रहा है। गौरतलब है कि चाईना-मेड उत्पादों ने पिछले कुछ सालों से भारतीय बाजार में न केवल अपना साम्राज्य स्थापित किया है, बल्कि भारतीय लघु उद्योगपतियों को भी करारा झटका दिया है। 



इन सब परिस्थितियों के बावजूद कंबल बाजार ने इस बार चाईना मेड कंबल को बाजार से बाहर करते हुए एक बार पुन: अपने पांव जमा लिए हैं और इसके साथ ही पानीपत, जालंधर व अमृतसर में बने कंबल, ग्राहकों की पहली पसंद बन गए। वर्ष 2011 में जब डालर की कीमत भारत में पचास रूपए आंकी जाती थी तो चाईना के कंबलों ने भारतीय कंबलों की गर्माहट चुरा ली थी तथा कंबल निर्माता भारी परेशानी झेल रहे थे। दुकानदारों ने बताया कि करीब 5 से 6 वर्ष पहले चाईना मेड कंबल ने मार्केट में भारी धूम मचाई थी और कपड़े की दुकानों के सामने कंबलों के ढ़ेर लगे दिखाई देते थे लेकिन अब ग्राहकों ने पुन: स्वदेशी कंबल खरीदने शुरू कर दिए हैं। चाईनीज कंमबी की कीमत बाजार में 400 से 600 रूपयें के बीच है जबकि भारतीय कंबल की कीमत 800 से 1500 के बीच है तो ऊंची कीमत में भी वैरायटी अनुसार उपलब्ध है।

कंबल विक्रेता होशियार सिंह प्रजापत का कहना है कि वर्ष 2011 में जब चाईना का कंबल जब कस्बे की मार्केट में आया था तो उसमें मिलने वाले लाभ को देखकर दुकानदार चकाचौंध हो गए थे तथा बिना किसी गारंटी के धड़ाधड़ कंबल बेचने में जुट गए थे। चाइना मेड कंबल से भले ही कंबल विक्रेताओं ने अपना मुनाफा डबल कमा लिया लेकिन भारतीय कंबल निर्माताओं के मुंह से एक बार रौनक गायब हो गई थी और वे अपने कंबल उद्योग को बंद करने बारे सोचने पर मजबूर हो गए थे। गुणवता के हिसाब से भारतीय कंबल की गर्माहट व उसकी लाइफ ज्यादा है जबकि चाइना मेड कंबल सस्ते होने के बावजूद भी लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए। दुकानदारों के अनुसार चाइना मेड उत्पाद भारतीय बाजार में तेजी से आए थे 
लेकिन अब ग्राहक इन उत्पादों से ऊब चुका है। इन उत्पादों के चमक दमक देखकर एक बार ग्राहक इनकी और आकर्षित जरूर हो जाता है, मगर बाद में गुणवता को देखते हुए ये उत्पाद ग्राहक के मन से उतर जाते हैं। कंबल बाजार में भी ऐसा ही हुआ और धीरे धीरे चाइना मेड कंबल का भूत ग्राहकों के सिर से उतरने लग गया। दूसरा कारण ये भी रहा कि डालर में उछाल के बाद चाईना मेड कंबल मार्केट से गायब होने लगा है। भारतीय कंबल की गर्माहट पुन: बाजार में आ चुकी है जिसका असर कंबल निर्माताओं के साथ-साथ थोक विक्रेताओं के चेहरे पर भी आसानी से देखने को मिल रहा है। वहीं गृहणियों की माने तो चाईना की चीज बिकती तो बहुत है लेकिन टिकती नहीं है।

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