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न्यूटन के 312 वर्ष पुराने तीसरे नियम में 36 वर्षो की मेहनत के बाद भारतीय वैज्ञानिक द्वारा संशोधन

अमेरिकन ऐसोसिएसन आफ फिजिक्स टीचर्ज (American Association of Physics Teachers), भारतीय साईस काग्रेस (Indian Science Congress) और वैज्ञानिक संस्थाओं (scientific institutions) अन्य द्वारा प्रथम स्वीकृति एंव सराहना ।
कुछ प्रयोगो की आवश्यकता जिन पर 8-10 लाख रुपया खर्च होगे। सरकार से प्रयोगों की सुविधाओं की प्रार्थना।

भाग 1 (Part I)भूमिका (Background):-
न्यूटन से पहले अपने अलग ढंग से गति का तीसरा नियम फ्रांस के गणितज्ञ और दार्शनिक जिकारते ने 1644 में अपनी पुस्तक में दिया था। न्यूटन ने अपना तीसरा नियम अपनी पुस्तक प्रिसीपिया में 1686 दिया। न्यूटन के नियम के अनुसार
क्रिया (पहली वस्तु द्वारा लगाया बल ) = प्रतिक्रिया (दूसरी वस्तु द्वारा लगाया गया बल)
यह नियम सभी वस्तुओ, सभी अवस्थाओं में प्रयुक्त होता है अर्थात सार्वभौमिक है।
भारत में यह नियम मैकाले (Macaulay) और बिलियम बैंटिक (Lord William Bentinck) के प्रयत्नों से इंग्लिश ऐजूकेशन एक्ट 1835 (English Education Act 1835) के तहद आया। तभी से यह विद्यार्थियो को प्रशासनिक नियम की तरह पढ़ाया जाता है।
खामिया (Limitations):
यह नियम सभी आकार ,विशेषताओं , प्रकार पर लागू होता है। सभी वस्तुओ पर क्रिया (पहली वस्तु द्वारा लगाया बल), प्रतिक्रिया (दूसरी वस्तु द्वारा लगाया बल) के सटीक बराबर और विपरीत होना चाहिए।
विभिन्न वस्तुएः (different bodies) ऊन, लकड़ी, स्प्रिंग, स्टील, च्यूंगम, गुंथा आटा स्पंज आदि।
विभिन्न विशेषतांए (characteristics): लचीलापन, नर्मता, कठोरता, आकृति आदि
विभिन्न आकार(different shapes): गोला, अर्धगोलाकार, सुई, त्रिभुज शंकु, सपाट आदि
इन सभी अवस्थाओं में वस्तु का आकार और विशेषताएं महत्वपूर्ण रोल अदा करती है। पर विज्ञान के सम्बद्व साहित्य में 220 देशो में इस तरह के विशिष्ठ प्रयोग किये ही नहीं गए है। कई अवस्थाओं में नियम को मोटे या गुणात्मक तौर पर ही रटाया जाता है। इन सब घटकों समायोजित करने के लिए अजय शर्मा ने नियम में संशोधन किया है।
प्रतिक्रिया ≠ क्रिया या प्रतिक्रया = k क्रिया
k समानुपात का गुणांक है जो वस्तु के आकार, विशेषताओं आदि की व्याख्या करता है।
आरम्भिक शोध पत्र और अवधारणा(Initial research paper and concept):
इस सम्बन्ध में पहला शोध पत्र प्रगति प्रकाशन (मेरठ) की शोध पत्रिका ऐक्टा सिनेसिया इडिका में 1999 में प्रकाशित हुआ था।
इस विषय पर दूसरा शोधपत्र कनांडा के अन्र्तराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रिसर्च जरनल फिजिक्स ऐसेज में 2016 में प्रकाशित हुआ। इसे प्रकाशक की बेवसाइट से 25 अमरीकी डालर में खरीदा जा सकता है। लिंक

भाग 2 (PART II)यूरोप, अमेरिका चीन में न्यूटन के तीसरे नियम को गलत साबित करने के लिए करोड़ों , अरबों रुपया खर्च किया जा रहा है। इससे व्यावसायिक अन्तरिक्ष यात्राओं के लिए सबसे सस्ता विकल्प उपलब्ध होगा।
2016 में नासा के वैज्ञानिको ने ‘प्रोपलसन एंड पावर’, जरनल में एक शोधपत्र प्रकाशित किया जिसमें सूक्ष्म राकेट का माडल बिना पीछे की ओर धक्के, (धुंआ , गैस आदि) से आगे बढ़ा। इसमें आगे की ओर धक्का अंसुतिलित माइक्रोबेव (microwaves) द्वारा दिया गया। यहां अत्याधुनिक प्रयोगों में न्यूटन के नियम की खामी साबित हुई। पर अन्तिम निष्कर्ष पर पहुचने के लिए और प्रयोगो की आवश्यकता है।
हाल ही में अमेरिका के डिफैन्स एडवासंड रिसर्च प्रोजैक्ट एजैसी (DARA) ने रिसरचर डा. माइक मैकलौच को 1.3 मिलियन डालर (लगभग सवा नौ करोड़ रुपये ) चार साल के लिए प्रोजैक्ट दिया है। इन प्रयोगो में यदि तीसरा नियम गलत साबित हो गया तो अन्तरिक्ष में यात्रा करने का सबसे सस्ता विकल्प निकल आएगा और इसका अधिकार अमेरिका का होगा ।
इसी बात के अजय शर्मा साधारण प्रयोगों और 11 वी कक्षा की फिजिक्स के आधार पर कह रहे है। इस तरह 36 वर्षो के अंधकार में यह प्रोजैक्ट रोशनी की किरण लेकर आया है।

भाग 3 (Part III),अजय शर्मा ने माननीय साइंस एंड टैक्नोली मिनिस्टर डा. हर्ष वर्धन से 18 जून 2015 अर्थात सादे तीन वर्षो पहले सहायता हेतू प्रार्थना की थी। और अपनी शोध पर आधारित लिखी 2 पुस्तके दी थी।
पिछले 36 वर्षो में अजय शर्मा ने अपने खर्च पर शोध कर के न्यूटन, आइस्टाईन और आर्किमिडिजके नियमों पर शोध अंतरराष्ट्रीय, कान्फरैसों, शोधपत्रिकाओं और 2 पुस्तकों में (कैम्ब्रिज, इग्लैड से प्रकाशित ) में छपवाये हे। मंत्री महोदय ने दोनों पुस्तकें विभाग एव टैक्नोलोजी विभाग के सचिव प्रोफैसर आशुतोष शर्मा को 18 जून 2015 को भेजी।
इन पुस्तकों की जांच हेतु ‘द नैशनल अकादमी आफ साइसिस इडिया’ (The National Academy of Sciences INDIA ) के एग्जयूटिव सैक्रैटरी डा नीरज कुमार ने वैज्ञानिकों की कमेटी का गठन किया । साढें तीन साल के बाद कमेटी ने कोई रिपोर्ट नहीं सौपी है ।
तब अजय शर्मा ने अगस्त 2018 को माननीय मंत्री , महोदय और डाॅ नीरज से प्रार्थना की कि वे न्यूटन की गति के तीसरे नियम पर ही रिपोर्ट भेजे । इस नियम पर शोध का मान्यता मिल रही है।

भाग 4 (Part VI)अजय ने यह शोध 1982 में शुरु किया था। पर तीसरे नियम पर सफलता 2018 में मिलना शुरू हुई
(i) 105 वीं इंडियन साईस कांग्रेस 2018: (105th Indian Science Congress 2018) यह कांग्रेस 16-20 को मणिपुर यूनिवर्सिटी में हुई। इसमें शोधपत्र प्रस्तुत करने के लिए अजय शर्मा को निमंत्रण मिला। उनका शोध पत्र कांग्रेस की प्रोसीडिग्ज के फिजिकल साइंसिज के सैक्शन में प्रकाशित हुआ । इस शोध पत्र मे न्यूटन के नियम की खामियों और संशोधित सिद्वान्त पर प्रकाश डाला गया था।
(ii) अमेरिकन ऐसोसियेशन आफ फिजिक्स टीचर्ज (American Association of Physics Teachers) :- अजय शर्मा को न्यूटन के तीसरे नियम की खामियों और संशोधन पर व्याख्यान हेतु ऐसोसियेशन ने वाशिगटन बुलाया। 1 अगस्त 2018 को प्रस्तुति के दौरान एक अमरीकी वैज्ञानिक ने कहा अगर आप प्रौजेक्ट में दर्शायी गई न्यूटन के नियम की खामियों को प्रयोगो से सिद् कर देते है तो भारत को अवश्य ही नोबेल प्राइज मिलेगा।
इसके तीन सप्ताह के बाद 22 अगस्त 2018 को अमेरिकन ऐसोसियेशन के प्रैजीडैट प्रो0 गारडन रामसे ने लिखा , “अजय के द्वारा सुझाये गए प्रयोगो से न्यूटन की गति का तीसरा नियम गलत सि ध हो सकता है।“
उन्होंने आगे सुझाव दिया कि स्टूडैटस और प्रोफैसरों की मदद से ये प्रयोग करने चाहिए।
3) प्रसिद्व अन्र्तराष्ट्रीय शोधपत्रिका ‘फाऊडेशनज आफ फिजिक्स’ ( Foundations of Physics) के Editor-in-Chief प्रोफैसर कारलो रोबैली ने 10 जून 2018 की रिपोर्ट में लिखा कि
“अजय के प्रयोगो से न्यूटन की मकैनिक्स की परिधि में ही न्यूटन के नियम की खामिया सिद् की जा सकती है।“

भाग 5 (Part V)यह दुर्लभ सफलता रूकी क्यो है ? अडचन क्या है घ ?
न्यूटन के नियम की खामी को सिद् करने के लिए कुछ प्रयोगो की आवश्यकता है। ये प्रयोग किसी अच्छी प्रयोगशाला में 8-10 लाख रूप्ये में किये जा सकते है।
भारत के इसरो के गगन यान का खर्च 10,000 करोड रूप्या है; यह वैसा ही प्रोजैक्ट है जिसमें 1984 में एक रूस के यान में बैठ कर अन्तरिक्ष गये थे।
अजय के प्रयोगो की सफलता से भौतिक विज्ञान का आधार हिलेगा। भारत की शोध 220 देशो तक जाएगी।
पर भारत सरकार का कहना है कि इन प्रयोगो के पहले ‘द नैशनल अकादमी आफ साइसिस इडियां’ (The National Academy of Sciences ) की वैज्ञानिको की टीम से मान्यता मिलनी चाहिए। पिछले साढ़े तीन सालों से कमेटी ने कोई रिपोर्ट नही दी है। यही मुख्य समस्या है। पर 2018 में कई वैज्ञानिक संस्थाओं ने शोध को सही दिशा में बताया है।

भाग 6(Part VI)प्रयोगो की साधारण व्याख्या (Simple interpretation )
न्यूटन का नियम तो सार्वभौमिक है, चाहे कुछ भी हो (वस्तु का आकार , विशेषता आदि ), क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर होने चाहिए (Action =Reaction) पर प्रयोगों में सभी अवस्थाओं में क्रिया प्रतिक्रया बराबर नहीं होते, यह अटल सत्य है।
इसीलिए संशोधित नियम में वस्तु के आकार विशेषताओं आदि का ध्यान रखा गया है। न्यूटन के मूल नियम के अनुसार क्रिया हमेशा प्रतिक्रिया के बराबर होनी चाहिए, वस्तु का आकार, विशेषताएं पूरी तरह बेमानी है । यही न्यूटन के नियम की खामी हैं।
(1) वस्तु के आकार ( गोलाकार, अर्द्धगोलाकार, लम्बी पाईप, शकु, सपाट ) का प्रभाव
एक गोल रबड़ की गेद ( संहति 100 ग्राम , 0.1 किलो ग्राम) ले। उसे फर्श पर 1 मीटर ऊचाई से गिराये ( भार = mg फोरस = क्रिया = 0.98 न्यूटन, गुरूत्वाकर्षीय त्वरण , g = 9.8m/s2 )
(a) फर्श से टकराकर गेद 1 मीटर ऊचाई तक ऊपर उठती है। इस तरह क्रिया (फर्श द्वारा गेंद पर लगाया गया बल ) भी 9.8 न्यूटन है।
गेंद का फर्श पर लगाया गया बल ( क्रिया ) = फर्श का गेंद पर लगाया गया बल (प्रतिक्रिया) = 0.98 न्यूटन
इस अवस्था में न्यूटन का नियम सही है। कोई आपति नही है।
(b) अब हम वस्तुओ की सहंति (mass) और संरचना (composition) वही रखते है। पर उसका आकार बदल देते है जैसे कि अर्धगोलाकार त्रिभुज, शंकु, पाईप सपाट आदि। सभी अवस्थाओं में सहति बराबर है( भार = mg = फोरस = क्रिया = 0.98 न्यूटन, गुरुत्वाकर्षणीय त्वरण , g) पर भिन्न - भिन्न आकार की वस्तुए 1 मीटर ऊचाई तक ऊपर नहीं उठती है। इस तरह प्रतिक्रिया कम होती है।
गेद द्वारा फर्श पर लगाया बल 0.98 न्यूटन (क्रिया) > फर्श द्वारा गेंद पर लगाया बल, 0.5 न्यूटन ( प्रतिक्रिया )
इस तरह नियम गलत हैं
(2) दूसरा प्रयोग ( लकड़ी, wooden और रबड़, rubber समान भार, समान क्रिया)
(c) उपरोक्त प्रयोग की तरह हम एक गोल लकड़ी की गेंद लेते हैं और इसे 1 मीटर ऊचाई से गिराते है। रबड की गेद की तरह अब भी भार = फोरस = क्रिया = 0.98 न्यूटन है।
(d) इस बार टकराने के बाद लकड़ी की गेद 1 मीटर ऊचाई तक ऊपर नहीं उठती है।
लकड़ी की गेंद का फर्श पर लगाया गया बल , 0.98 न्यूटन (क्रिया) > फर्श का गेंद पर लगाया गया बल 0.4 न्यूटन ( प्रतिक्रिया)
दोनों (रबड़ की गेंद, लकड़ी की गेंद ) अवस्थाओं में क्रिया बराबर है, पर लकड़ी की गेंद में प्रतिक्रिया कम हैं
इस तरह प्रतिक्रिया वस्तु की विशेषताओं पर निर्भर करती है। न्यूटन का नियम वस्तु की विशेषताओं की अनदेखी करता है इसीलिए इसे संशोधित किया गया हैं

भाग 7 सरकार से प्रार्थना (Prayer from Government )
इन प्रयोगो को अमेरिकन एसोसियेसन आफ फिजिक्स टीचर्ज (American Association of Physics Teachers) और इडियन साइस कांग्रेस (Indian Science Congress) ने भी अनुमोदित किया है।
इस तरह अजय शर्मा ने माननीय प्रधानमंत्री जी नरेन्द्र मोदी, माननीय साइंस एड टैक्नोलोजी डा0 हर्ष वर्धन , माननीय मुख्यमंत्री( हि0प्र0) श्री जय राम ठाकुर, माननीय शिक्ष मंत्री श्री सुरेश भारद्वाज जी से प्रार्थना की है कि प्रयोगो के लिए सुविधाए उपलब्ध करवाये ।इन पर 8-10 रुपये खर्च होगे। भारतीय विज्ञान दुनिया के हर देश में जाएगा।
Ajay Sharma 94184 50899
Email ajoy.plus@gmail.com

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3 Comments

Sadeiv Prasanna said…
It is very good efforts by our Indian scientist but in any case action is equal to reaction is never possible in any condition whether round ball or half round ball, because when action start it start to loose energies and then when reaction start it reduces more so this rule of energy itself is defective from the very beginning but I would like to congratulate the scientist who have provided some scientific proof against this rule
vaidyakk said…
यदि यह दावा सही है तो भारत सरकार द्वारा इस मामले में पहल करनी चाहिए ।
Ajay Sharma said…

During BSc. II (1982) I started raising the voice that Newton’s law , Einstein’s E=mc2 , Archimedes Principle etc. have other ways to look at. Passing MSc with first division in 1985, taught at DAV College Chandigarh then returned to home state HP. There was no take of ideas.

In 1994 Professor Balokhara ( now in USA) introduced a journal Acta Cinecia Indica (published by Pragati Prakashan , Meerut UP India ); which publishes noble, tenable ideas but sound ideas , which can be experimentally confirmed afterwards. But ideas see the light of day with name of scientist and country he belongs to. I published about 15 articles on Newton’ Einstein and Archimedes in it and in 1999 , THE MODIFIED OF NEWTON’S THIRD LAW was published.

Then after 17 years the more thoughtful paper on third law was published international journal PHYSICS ESSAYS (Canadian-American Journal). In March 2018 it was presented in 105th Indian Science Congress 2018 at Manipur University , on 1st August 2018 , it was presented and published at Washington DC (USA) in conference of American Association of Physics Teachers (AAPT). It was appreciated by many international scientists who understood paper completely including Professor Gordon P Ramsey (Chicago), President of AAPT . All asked for experiments.
As the experiments are suggested by may scientists ( cost about 8-10 Lakhs) , so success would be 100% as I have predicted 36 years ago. These scientists are absolutely correct.

I requesting Govt since years , arrange a video seminar with scientists put the seminar on the websites ; people all over the world will comments with their NAMES, DEPARTMENTS & COUNTRIES . Even when a person is given death sentence by Supreme court , everything is open. He is not given CAPITAL PUNISHEMENT without listening ;and judge signs decision. It ia not NAEME decision. It is natural justice. I must be given open opportunity.

I am working since past 36 years against all odds at my family expenses , will continue to raise hours of Indian science till I breath my last.
Even India Government is spending Rs 10,000 crores to 12,400 crores for GAGANYAN sending 3 Indians to space in 2022 for 3-7 days. All Indian wish grand success for the project.

The importance of modification of Newton’s 3rd law in experiments ( not conducted by scientists ) would mean changing basis concepts and physics and lead to new technology.
Ajay Shrama 94184 50899 email ajoy.plus@gmail.com