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सर्दी की दस्तक के साथ ही बदली लोगों की दिनचर्या, गर्म वस्त्रों का प्रयोग शुरू


सतनाली (साक्षी वालिया) नवंबर माह के साथ ही मौसम ने भी करवट लेना शुरू कर दिया है तथा सर्दी ने भी सुबह व रात के समय अपना अहसास करवाने लगी है। ऐसे में क्षेत्र में ज्यादातर लोगो की दिनचर्या स्वत: ही बदलने लग गई है। इसका कारण बदलते मौसम के साथ सर्दी का बढऩा है। जहां पहले लोग सुबह 5 बजे उठकर स्नान आदि कर चाय का आनंद लेते थे। वह अब सुबह बढ़ती सर्दी के चलते बिस्तर पर ही चाय लेना पसंद करते है। क्षेत्र में सर्दी की दस्तक के साथ ही अब बच्चों व बुजूर्गो ने गर्म कपड़ों का प्रयोग भी शुरू कर दिया है तथा बाजारों में भी ऊनी कपड़ों की दुकानें भी सजने लगी है।

दुकानदार यह भली भांति जानते हैं कि सर्दी के मौसम की शुरूआत में जो कमाई होती है, वो बाद में नहीं। इसलिए बाजार में दुकानदारों ने अभी से नई-नई वैरायटी लाना शुरू कर दिया है। सर्दी की आहट के साथ ही सतनाली कस्बें में लोगों ने गर्म कपड़ों की खरीददारी शुरू कर दी है। ग्राहकों के रूझान को देखते हुए कस्बे के बाजार में गर्म कपड़ों के स्टाल सजने शुरू हो गए है। इन पर ग्राहकों की भी खासी भीड़ नजर आती है। सर्दी ने सुबह शाम अपना अहसास करवाना शुरू कर दिया है तथा ऐसे में लोग सुबह शाम मोटरसाईकिलों पर यात्रा करते समय गर्म कपड़ों में देखे जा सकते है। ऐसे में लोग अपनी जेब के अनुसार सर्दी से बचाव के लिए खरीददारी कर रहे है।


मध्यम वर्ग की भीड़ नई अस्थाई दुकानों पर अधिक देखी जा रही है। वहीं दुकानों पर जैसा पैसा वैसा माल उपलब्ध है। मशीनों से निर्मित आकर्षक डिजाइन वाले स्वेटर कंबल, जैकेट, मफलर, टोपी व महिलाओं के कोट, बच्चों के गर्म कपड़े अब हर वर्ग के पसंद के अनुरूप बाजार में आ गए है। सर्दी की दस्तक के साथ ही निजी स्कूलों का भी समय बदल गया है। जहां पहले घरों में लोग सोते समय पंखा चलाना नहीं भूलते थे उनका रूटीन भी बदल गया है। अब लोग पंखा तो चलाते है।

लेकिन कुछ ही समय बाद बंद कर रहे है। घरों में चादर की जगह कंबल व रजाई निकलने शुरू हो गए है। वहीं चाय विक्रेताओं की कमाई के दिन भी अब आ गए है। बाजार में मूंगफली की रेहडिय़ा भी नजर आने लगी है तथा शुरूआती ठंड की चपेट में आने से वायरल का प्रकोप भी बढ़ गया है। लोग अब मौसम के प्रभाव के चलते अपनी दिनचर्या में भी बदलाव ला रहे है।

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