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रासायनिक खादों के अधिक इस्तेमाल से घट रही जमींन की उर्वरा शक्ति


खंड के गांवों में रासायनिक खादों के अधिक प्रयोग के कारण बढ़ी समस्या

सतनाली (साक्षी वालिया)

रासायनिक खादों के निरंतर बढ़ते इस्तेमाल से सतनाली खंड के गावों की कृषि योग्य भूमि की उर्वरा शक्ति लगातार कम होती जा रही है। भूमि से अनेक आवश्यक पोषक तत्व खत्म होते जा रहे है। यदि इसे लेकर अगर ठोस पहल नहीं की गई तो भूमि बंजर भी हो सकती है। किसानों के साथ प्रदेश सरकार भी भूमि को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है जिससे भूमि के सूक्ष्म तत्व कम होते जा रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण फसल चक्र व फसल विविधिकरण पर ध्यान नहीं देना बताया जा रहा है। कृषि योग्य भूमि से अधिक पैदावार के चक्कर में रासायनिक खादों का अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है।

रासायनिक खादों के बढ़ते इस्तेमाल से जमीन के अंदर के  पोषक तत्व कृषि भूमि से लगातार कम हो रहे हैं। सूक्ष्म तत्वों की कमी भी लगातार बढ़ रही है। सतनाली खंड के गांवों की भूमि के अंदर जिंक, मैगनीज, आयरन, पोटाश, सलफर, कैल्शियम की कमी होती जा रही है जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति की हालत बिगड़ गई है। किसानों का तर्क है कि बिना रासायनिक खादों के फसल का समुचित विकास नहीं हो पा रहा। कृषि जमीन की बिगड़ती स्थिति के लिए फसल चक्र में बदलाव होना चाहिए। क्षेत्र के किसान रबी सीजन में ज्यादातर गेंहू व सरसों की फसल व खरीफ सीजन में कपास व बाजरे के अलावा गवार की फसल ही उगाते हैं। ऐसे में किसान फसल विविधिकरण पर कोई ध्यान नहीं दे रहें हैं। इसके साथ ही सघन खेती भी उर्वरा शक्ति पर असर डाल रही है।

किसान जमीन को कुछ समय के लिए भी खाली नहीं छोड़ते। इसके साथ ही किसान लगातार संतुलित खाद का प्रयोग करते हैं। किसान मात्र यूरिया का ही प्रयोग करते हैं, वे जिंक व पोटाश खेतों में नहीं डालते। आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग भी भूमि के लिए नुकसानदायक है। किसान की आमदनी का एक बहुत बड़ा हिस्सा रासायनिक खादों पर खर्च हो रहा है। सतनाली व आसपास के क्षेत्र में पिछले लगभग 10 वर्षों से जमीन की उर्वरा शक्ति रासायनिक खादों की स्थिति पर निर्भर हो गई है। किसानों ने केवल पैदावार बढ़ाने पर ही बल दिया है। यदि किसानों ने फसल चक्र नहीं बदला और रासायनिक खादों का इस्तेमाल कम नहीं किया तो उपजाऊ जमीन बंजर हो जाएगी व जमींन कठोर हो जाएगी।

कृषि विभाग के अनुसार लगभग पूरे दक्षिणी हरियाणा के गांवों की जमीन को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल जाता है ऐसे हालात में रासायनिक खादों का अधिक प्रयोग करना जमीन की उर्वरा शक्ति को समाप्त कर सकता है। किसानों को चाहिए कि वे फसल चक्र जरूर अपनाएं। फसल विविधिकरण को अपनाकर ही जमीन की उर्वरा शक्ति को कायम रखा जा सकता है।

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