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खतरें से खाली नहीं है रेलवे अंडरपास के नीचे से वाहनों का आवागमन, अंडरपास के नीचे क्षतिग्रस्त दीवारें व सडक़ें दे रही हादसों का न्यौता

ओवरलोड रोकने के लिए लगाए गए पोल भी गिरे
नेहा वालिया, लोहारू:

रेलवे द्वारा करीब पांच वर्ष पूर्व रेलवे फाटकों को समाप्त करके बनाए गए अंडरपास वाहनचालकों व राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बने हुए है। अनेक बार इस बारें में रेलवे प्रशासन को अवगत करवाने के बावजूद भी इन अंडरपासों की कोई सुध नहीं ली गई जिस कारण रेलवे अंडरपास के नीचे से वाहनों का आवागमन खतरें से खाली नहीं है।



लोहारू-सतनाली मुख्य सडक़ मार्ग पर गांव समसावास के नजदीक बनाए गए रेलवे अंडरपास के हालात तो ऐसे है कि यह कभी भी बड़े हादसें का सबब बन सकता है। रेलवे अंडरपास के नीचें की दीवारों में दरार आ चुकी है तथा टे्रन के आवागमन के समय वाहनचालक इसके नीचे से गुजरना तक उचित नहीं समझते क्योंकि इसमें भारी भरकम कंपन होता है तथा यह कब गिर जाए कहा नहीं जा सकता। वहीं अंडरपास की सडक़े भी गड्डों में तब्दील हो चुकी है तथा अनेक स्थानों पर सडक़ धंसने से बीचोंबीच घास तक भी उग गई है जिससे रात के समय  वाहन चालक हादसें का शिकार हो सकते है।


वहीं दूसरी ओर अंडरपास के नीचे से ओवरलोड वाहनों का आवागमन रोकने के उदेश्य से दोनों ओर लगाए गए लोहे के भारी भरकम पोल भी ओवरलोड वाहनों द्वारा नीचे गिरा दिए गए है जिस कारण वाहनचालकों को आवागमन में भी परेशानी हो रही है। यहां तक कि इस मार्ग से गुजरने वाले ओवरलोड डंपरों के पत्थर भी आवागमन के दौरान अंडरपास के नीचे खुले में ही बीच रास्ते पर गिरा दिए जाते है जिससे वाहनचालकों के साथ हर समय दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। वाहनचालकों बलराज सिंह, अमित, राजेश, सांवरमल आदि ने बताया कि रेलवे अंडरपास बरसात के समय तो जलभराव के कारण परेशानी उत्पन्न करते है तथा इसके बाद यहां की खस्ताहालत रोजाना हादसों को दावत दे रही है।

लोगों का कहना है कि एक तो अंडरपास की दीवारों में दरारें, दूसरी ओर पूरे अंडरपास की सडक़ क्षतिग्रस्त होने से यह कभी भी गिर सकता है। अंडरपास के जोड अपना स्थान छोड चुके है। बरसात के दौरान ऊपर से भी पानी टपकता है तो नीचे भी जमा हो जाता है। ठेकेदार द्वारा अंडरपास के नीचे से बनाई गई सड़़क़ भी पूरी तरह से टूट चुकी है तथा इसमें गड्डे भी बन गए है। ऐसे में लोग व वाहनचालक कोई रिस्क नहीं उठाना चाहते तथा रेलवे के अंडरपास किसी भी समय बडे हादसे का सबब बन सकते है।

ध्यान रहे कि रेलवे द्वारा वर्ष 2013 में रेलवे फाटकों पर बनवाए गए रेलवे अंडरपास के निर्माण कार्य के दौरान संबंधित ठेकेदारों द्वारा न तो जल निकासी की उचित व्यवस्था की गई न ही यहां व्यवस्था बनाने के प्रयास किए गए। यहां तक कि इनके निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयाग किया गया तो अब क्षतिग्रस्त सडक़ों व दीवारों के रूप में अपनी हालात बयांन कर रहा है। रेलवे की ओर से इन अंडरपासों की स्थिति पर बोलने के लिए कोई भी तैयार नहीं है तथा ऐसे में अंडरपास न केवल परेशानी बल्कि दुपहिया वाहनचालकों के लिए तो हादसों को भी न्यौता दे रहे है।

लोगों का कहना है कि रेलवे द्वारा इनके निर्माण पर ठेकेदारों के माध्यम से भारी भरकम बजट खर्च किया था लेकिन इनकी स्थिति देखकर ऐसा लगता है जैसे ठेकेदार ने केवल औपचारिकता पूरी की है तथा यहां पर किसी प्रकार के कोई प्रबंध नहीं किए है। उन्होंने रेलवे से मांग की है कि इन अंडरपासों की सिथति में तुंरत सुधार किया जाए तथा अंडरपास की दीवारों व सडक़ मार्ग का पुर्ननिर्माण करवाकर अंडरपास के पोल को भी ठीक करवाया जाए ताकि इनकी स्थिति में सुधार किया जाए ताकि भविष्य में कोई बडा हादसा न हो।

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