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हर्षोल्लास व धूमधाम से मनाया गया भैया दूज पर्व

सतनाली / साक्षी वालिया:

सतनाली सहित समूचे खंड के गांवों में भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक भैया दूज का त्योहार हर्षोल्लास व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर जहां बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर लंबी आयु की कामना की वहीं भाईयों ने बहनों की रक्षा का वचन दिया। ध्यान रहे कि भैया दूज का पर्व दीवाली के बाद मनाया जाता है। भैया दूज पर्व का उदेश्य भाई व बहन के पावन संबंध व प्रेमभाव की स्थापना करना है। इस दिन बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की मंगल कामना करती है।

भैया दूज पर्व की कथाओं के मुताबिक सूर्य नारायण भगवान की पत्नी का नाम छाया की कोख से एक लड़की यमुना तथा एक लड़का यमराज जन्म लिया था। बहन यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। बहन यमुना ने अपने भाई यमराज से अपने मित्रों के साथ घर पर भोजन करने के लिए निवेदन किया। यमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया। यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं और कोई भी मुझे अपने घर नही बुलाना चाहता है। बहन सद्भावना से मुझे बुला रही है तो बहन की आज्ञा का पालन करना मेरा धर्म है।

कहा जाता है कि यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बहन यमुना ने जल्द से स्नान करके अपने भाई यमराज को तिलक लगाकर पूजन करके भोजन कराया। यमराज ने बहन यमुना के अतिथि सत्कार से प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया। बहन यमुना ने अपने भाई से वर मांगा कि मेरे भाई प्रतिवर्ष मेरे घर आए और संसार में हर बहन मेरी तरह इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे। भाई यमराज ने अपनी बहन यमुना को वचन व अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की और चल गए। इसी दिन से ही भैया दूज पर्व की परंपरा बनी।

मान्यता है कि जो भी भाई बहन का अतिथि सत्कार स्वीकार करते है, उन भाई को यमराज से कोई भय नही रहता है। तभी से भैया दूज का त्योहार बहने बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। भैयादूज पर बहनें यमराज एवं यमुना का पूजन करके अपने भाईयों की स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की मंगल कामना करती है।

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