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परेशानी का सबब बनी ओवरलोड ट्रैक्टर ट्रालियां, यातायात में बाधक बन दे रही है हादसों को न्यौता

- व्यावसायिक प्रयोग पर प्रतिबंध होने के बावजूद पुलिस व प्रशासन नहीं कर रहा कार्रवाई


साक्षी वालिया, सतनाली:  

कस्बा सहित खंड के गांवों के मुख्य मार्गो पर प्रतिबंध के आदेशों के बावजूद बेखौफ दौड़ रही ईंटों, पत्थरों व पदाड़ी से भरी ओवरलोड ट्रैक्टर ट्रालियां इन दिनों न केवल आमजन व वाहनचालकों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।क्षमता से अधिक पदाड़ी भरी होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र के छोटे संपर्क मार्गों पर अन्य वाहनों को गुजरने के लिए जगह ही नहीं रहती जिससे हर समय दुर्घटना का अंदेशा भी बना रहता है। गौरतलब है कि सतनाली खंड के सडक़ मार्गो से प्रतिदिन सैकड़ो टै्रक्टर ट्रालियां ओवरलोड पदाडी से भरकर ईंट भठ्ठो पर ईंधन प्रयोग हेतु ले जाई जा रही है, जो लोगों के साथ-साथ वाहनचालकों के लिए भी परेशानी का सबब बनी है।

नियमानुसार ईंट पकाने के लिए कोयले का ही प्रयोग होना चाहिए न कि पदाड़ी और तूड़े का, इससे पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान पहुंचता है। हालांकि प्रशासन की ओर से इसके प्रयोग पर प्रतिबंध है, लेकिन उसके बावजूद इसका प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर चालक अपने वाहनों में क्षमता से कहीं अधिक पदाड़ी भर लेते हैं। जिससे इन ट्रालियों की चौड़ाई 10 से 12 फीट तक हो जाती है और ज्यादातर वाहन चालकों को अपनी गंतव्य पर पहुंचने के लिए गांवों से होकर गुजरना पड़ता है जहां संपर्क मार्गों की चौड़ाई कम ही होती है।

सतनाली में तो इनके गुजरते वक्त एक फुट की जगह भी इनके साईड से निकलने के लिए नहीं बचती तथा इसके कारण न केवल अन्य वाहन चालकों को रास्ते से गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है बल्कि स्वयं इन ट्रैक्टर चालकों को भी भारी दिक्कत उठानी पड़ती है। एक तो ओवरलोड होने के कारण वाहन की ऊंचाई अधिक हो जाती है जिससे उन्हें पीछे से आने वाले वाहन दिखाई नहीं पड़ते। मजबूरन अन्य वाहनों को उनके पीछे-पीछे ही चलना पड़ता है। केवल इतना ही नहीं ऐसे वाहनों की वजह से कई बार छोटे व दुपहिया वाहन साइड लेते समय दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। वहीं दूसरी ओर पुलिस व प्रशासन की ठोस कार्रवाई के अभाव में कृषि कार्यो में प्रयोग होने वाले ट्रैक्टर ट्रालियां क्षेत्र के मुख्य मार्गो पर ईंटे व पत्थर ढ़ोती भी देखी जा सकती है।




इससे न केवल इनका व्यावसायिक प्रयोग हो रहा है बल्कि राजस्व को भी प्रतिमाह लाखों का नुकसान हो रहा है। ध्यान रहे कि प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर ट्रालियों का प्रयोग केवल कृषि कार्य के लिए ही किया जाना सुनिश्चित किया गया है तथा आदेश भी जारी किए गए है। यहां तक की इनके पंजीकरण के समय भी इसका प्रयोग केवल कृषि कार्य ही बताया जाता है। अकेले सतनाली खंड में सैकड़ो ट्रालियां निर्देशों की अवहेलना करते हुए प्रतिदिन सीमेंट, पत्थर, बजरी, रोड़ी, अनाज इत्यादि सामान ढ़ो रही है।

ट्रैक्टर चालकों की मानें तो कृषि अब फायदे का सौदा नहीं रही, प्राकृतिक मार के चलते खेती उनके लिए घाटे का सौदा बनी है तथा वे ट्रैक्टरों की किस्त आदि समय पर चुकाने के लिए इनका व्यावसायिक प्रयोग करना उनकी मजबूरी है। कस्बे और गांवों से गुजरते समय अक्सर जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। लोगों ने प्रशासन से ऐसे वाहनों पर अंकुश लगाने और क्षमतानुसार ही पदाड़ी व तूड़े लोड करने के निर्देश कड़ाई से लागू करने की मांग की है ताकि इन ट्रैक्टर ट्रालियों के कारण होने वाले हादसों से बचा जा सके।


कैप्सन:- सतनाली कस्बे में गुजरती ओवरलोड ट्रैक्टर ट्राली।


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