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इन सरल और साधारण उपायों से करें ग्रहों को खुश...


प्रिय मित्रों/पाठकों, हमारे वैदिक शास्त्रों में वर्णित उपायों में भिन्न-भिन्न ग्रहों को बली करने के लिए विशेष रत्नों के साथ-साथ अनिष्टकारी ग्रहों के निराकरण हेतु विशेष मंत्र जाप करने की व्याख्या भी विशद रूप से दी है। इसके अलावा, ग्रह शांति के उपाय सामान्यजन सरलता से कर सकें इसके लिए प्राचीन शास्त्रों में इसकी जानकारी भी विस्तार से दी गई है। जातक स्वयं इन उपायों को अजमाते हुए ग्रहों के सकारात्मक प्रभावों में बढ़ोत्तरी कर सकता है।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के नीच, पाप या अशुभ प्रभाव में होने से जीवन में बहुत  समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के समाधान से लिए अनेक उपाय भी किए जाते हैं। सभी ग्रह किसी न किसी संबंधी का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर हम इन उपायों के साथ-साथ अशुभ प्रभाव देने वाले ग्रहों से संबंधित संबंधी या व्यक्ति की सेवा करें, उनका सम्मान करें और उनके साथ अच्छे संबंध बनाए रखें तो शुभ परिणाम मिलने लगते हैं। 

जानिए कैसे करें गुरु-शुक्र को प्रसन्न..

गुरु ग्रह अध्यापक, दादा और बड़े बुजुर्ग के साथ संबंध रखता है। इसलिए इनकी सेवा और सम्मान से अशुभ गुरु शुभ फल देने लगता है। भूरे रंग की गाय को गुड़, चने की भीगी दाल खिलाने से भी गुरु प्रसन्न रहते हैं।

शुक्र ग्रह को प्रसन्न रखने के लिए जीवन साथी के प्रति प्यार व सम्मान बनाए रखना और सदैव वफादार रहना परम आवश्यक है।

जानिए ग्रहों की सेवा और प्रभाव...

सूर्य ग्रह का संबंध मुख्य रूप से पिता और सरकार से होता है। सूर्य यदि अशुभ फल दे रहा हो तो जातक को अपने पिता, बाबा, नाना या बुजुर्गों की सेवा करना, उनका सम्मान करना और प्रतिदिन चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लेना शुभ होता है। लाल बछड़े वाली गाय को प्रतिदिन चारा देना भी सूर्य को प्रसन्न रखने का उपाय है। चंद्र ग्रह माता का कारक है।

अशुभ फल देने वाले चंद्र के लिए अन्य उपायों के साथ माता, मौसी, नानी, दादी  या विधवा महिला की सेवा एवं सम्मान करने से शुभ फल मिलने लगते हैं।

बुध ग्रह का संबंध बुआ, बहन, बेटी आदि से होता है। बुध के अशुभ प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए इनकी सेवा करें और इनकी जिम्मेदारी उठाएं।

वहीं दिव्यांग, भिक्षुक, साधु, गाय आदि को हरी वस्तुएं देने से भी बुध प्रसन्न होता है।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि अगर आपका सूर्य अशुभ है तो पिता की सेवा करें।

अगर आपका चंद्र अशुभ है तो मां का आशीर्वाद लें।

अगर पिछले जन्म का मां का कर्ज है तो इस जन्म में मंगल अशुभ होगा। मां को मीठा खिलाएं।

अगर आपका बुध अशुभ है तो बहन व बुआ का आशीर्वाद लें। उन्हें प्रसन्न रखें।

गुरु अशुभ है तो समझिए कि पिछले जन्म का मंदिर का ऋण है। अत: मंदिर में सेवा करें। दादा या किसी बजुर्ग की सेवा करें।

अगर कुंडली में शुक्र अशुभ है तो समझिए पिछले जन्म का पत्नी का ऋण है। अपनी पत्नी से कभी तेज आवाज में बात न करें। पत्नी का अपमान न करें। उसे गुलाबी वस्तु उपहार में दें।

अगर कुंडली में शनि-राहु अशुभ हैं तो है अपने अधीनस्थ लोगों को हमेशा खुश रखें। नौकरों पर गुस्सा न करें।

अगर केतु कुंडली में अशुभ है तो पिछले जन्म का पुत्र दोष है। अत: इस जन्म में पुत्र से बैर न रखें। उसे मनचाही वस्तु उपहार में देकर इस ऋण का निवारण करें।

जानिये राहू और केतु को रिझाएं...

शनि ग्रह चाचा, ताऊ और मजदूर का प्रतिनिधित्व करता है। उनका सम्मान करना चाहिए। राहु ग्रह ससुराल का कारक है। सास, सुसुर, साले और सरहज को सम्मान देने और उनके साथ अच्छे संबंध बनाए रखने से अशुभ राहु शुभ फल देता है। पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र का पालन पोषण करने से केतु के अशुभ प्रभाव दूर होने लगते हैं। पिल्लों को पालने व उन्हें भोजन देना भी केतु को प्रसन्न रखने का आसान उपाय है।

आकाश मंडल में विचरण कर रहे ग्रहों के प्रभाव का मानव प्रकृति पर असर पड़ता है। मनुष्य, पशु-पक्षी, वनस्पति और हर एक सजीव-निर्जीव पर ग्रहों का अच्छा-बुरा असर देखने को मिलता है। जन्मकुंडली में छपे ग्रह और उनके परस्पर क्रास से बनने वाले शुभ व अशुभ योग और ग्रहों की वक्री व मार्गी स्थिति का असर मनुष्यों के जीवन पर पड़ता देखा गया है। कुंडली के शुभ ग्रह अनुकूल स्थितियों में जातक के लिए शुभ समाचार तथा कुंडली के अशुभ ग्रह या शुभ ग्रहों के प्रतिकूल स्थितियों में होने पर जातक के लिए अशुभ समाचार लेकर आते हैं। इसलिए, ग्रहों के खराब असर से मनुष्यों को सुरक्षित रखने के लिए हमारे दिव्य दृष्टा ऋषि-मुनियों ने ज्योतिष शास्त्र में अनेक ज्योतिषीय उपायों द्वारा मानव कल्याण के रास्ते बताएं हैं।

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