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स्वच्छता अभियान भी नहीं दिला पा रहा क्षेत्र के सार्वजनिक स्थानों को गंदगी से निजात

सफाई व्यवस्था के अभाव में लोगोंको हो रही परेशानी


रवि वालिया, सतनाली:

स्वच्छ भारत स्वच्छ हरियाणा अभियान के तहत प्रशासन व सरकार द्वारा स्वच्छता को लेकर अनेक बडे बडे दावें किए जाते रहे है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उदेश्य से हालांकि सरकार द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण के नाम पर शिविरों का आयोजन कर लाखों करोड़ों रूपयें भी खर्च किए गए परंतु इसके बावजूद भी स्वच्छता अभियान धरातल पर उतरने में नाकाम रहा है। सतनाली व खंड के गांवों में सार्वजनिक स्थानों व मुख्य स्थानों की गलियों में सफाई व्यवस्था के अभाव में हालाम
बदतर है।

सार्वजनिक स्थानों पर लगे गंदगी व कूड़े के ढ़ेर अभियान की पोल खोलने के लिए काफी है।  कस्बे में एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड़, लोहारू चौक, खोखा मार्केट, बाबा भैरव मंदिर, महेंद्रगढ़ रोड, किसान भवन सहित सभी मुख्य सार्वजनिक स्थानों पर लगे गंदगी के ढ़ेर हालात बयां कर रहे है। इन स्थानों पर सफाई व्यवस्था का अभाव नजर आ रहा है तथा स्थिति देखने मात्र से ही पता चल जाता है कि यहां सफाई कितने दिन पूर्व की गई थी। सफाई व्यवस्था कायम करने के लिए न पंचायत की कोई रूचि है न ही प्रशासन की। प्रशासन स्थिति से वाकिफ होने के बाद भी अनजान बना हुआ है।

मुख्य बाजार स्थित एसबीआई व सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के सामने तो हालात इतने खराब है कि बैंक में आने वाले उपभोक्ताओं को भारी परेशानी उठानी पड़ती है वहीं बैंक में भीड़ की स्थिति में उन्हें गंदगी के बीच बैठकर इंतजार करना पड़ता है। यहीं हालात बस स्टैंड क्षेत्र की है तथा यहां गंदगी व घास कूड़ा करकट के साथ सफाई व्यवस्था के हालात बयां कर रही है। लोहारू रोड पर बने अस्थाई बस स्टैंड पर तो रेहड़ीचालकों व दुकानदारों द्वारा फैलाई जा रही गंदगी के कारण हालात विकट है तथा यहां आवारा पशु हर समय गंदगी में मुंह मारते देखे जा सकते है। बाबा भैरव मंदिर के पास भी गंदगी का माहौल है जिससे मंदिर में आने वाले श्रद्वालुओं को भी परेशानी उठानी पड़ती है।

प्रशासन द्वारा यहां के सार्वजनिक स्थानों की सफाई व्यवस्था कायम करवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे जिससे क्षुब्ध लोगों का कहना है कि सरकार के आदेश व प्रशासन के निर्देश केवल कागजी दावों तक ही सीमित है व धरातल पर देखा जाए तो इसका परिणाम शून्य है। यहीं हालात खंड के गांवों में भी है। यहां भी स्वच्छता अभियान के लिए कोई दिलचस्पी पंचायतों द्वारा नहीं ली जा रही। लोगों का कहना है कि यदि अभियान के नाम पर केवल खानापूर्ति ही करनी है तथा प्रशिक्षण शिविरों के नाम पर बजट ही पूरा करना है तो ऐसे अभियानों के प्रति प्रशासन कोरे दावें क्यों कर रहा है। उन्होंने मांग की कि पंचायत व प्रशासन स्तर पर अभियान की पूरी मानिटरिंग होनी चाहिए तथा पंचायतों से साप्ताहिक रिपोर्ट लेनी चाहिए ताकि धरातल पर प्रयास हो सके।



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