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जानिए क्या होता है अगर जन्म कुंडली में सूर्य शुभ स्थिति में हो तो ?, यदि जन्म कुण्डली में सूर्य अशुभ हो तो क्या होता है?

क्या मिलता है मान-सम्मान और बड़ा पद अशुभ सूर्य के कारण??

प्रिय मित्रों/पाठकों,ज्‍योतिष शास्‍त्र में सूर्य का बहुत ही महत्‍व है। दरअसल सूर्य नौ ग्रहों में राजा है और मनुष्‍य की आत्‍मा का कारक है। पुराणों के अनुसार सूर्य देवता के पिता का नाम महर्षि कश्यप व माता का नाम अदिति है। इनकी पत्नी का नाम संज्ञा है, जो विश्वकर्मा की पुत्री है। संज्ञा से यम नामक पुत्र और यमुना नामक पुत्री तथा इनकी दूसरी पत्नी छाया से इनको एक महान प्रतापी पुत्र हुए जिनका नाम शनि है। कहते हैं यदि कुंडली में सूर्य शुभ स्थिति में है, तो जातक के जीवन को भाग्‍य, लक्ष्‍मी, आरोग्‍य, मान सम्‍मान, यश और कीर्ति से भर देता है, लेकिन कुंडली में यदि सूर्य खराब है तो अपनी अशुभ स्थिति के चलते जातक को न केवल रोगी बना देता है बल्कि मान सम्‍मान, आत्‍मविश्‍वास में भी कमी देता है।

सूर्य सफलता का कारक हैं और अगर कुंडली में सूर्य देव कमज़ोर स्थिति में बैठे हों तो जातक का पूरा जीवन अस्‍त व्‍यस्‍त हो जाता है। ज्‍योतिष के अनुसार मनुष्‍य के जीवन पर ग्रहों का महत्‍वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

किसी को शुभ ग्रह मालामाल बना देते हैं तो किसी को कंगाल बनाने में भी देर नहीं लगाते। सौरमंडल में नौ ग्रह हैं और ये नौ ग्रह किसी ना किसी तरह मनुष्‍य के जीवन पर अच्‍छा और बुरा प्रभाव डालते ही हैं।

कोई ग्रह करियर पर प्रभाव डालता है तो कोई मनुष्‍य की लव लाइफ को बेहतर या खराब करने की क्षमता रखता है। आज हम आपको सूर्य ग्रह के बारे में बताने जा रहे हैं।

सूर्य को प्रसन्‍न करने के लिए करें इसकी पूजा--

जैसा कि पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि सूर्य सफलता का कारक है और ये जीवन के हर पहलू में सफलता और असफलता से संबंधित होता है। अगर कुंडली में इसके अशुभ स्‍थान में बैठा है या नकारात्‍मक प्रभाव दे रहा है तो जातक को कुछ विशेष तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ज्योतिष में बताए गए 9 ग्रहों की स्थिति पर ही हमारा जीवन निर्भर करता है। जन्म समय और स्थिति के अनुसार बनाई जाने वाली कुंडली 12 भागों (भावों) में विभाजित रहती है। इन 12 भावों में नौ ग्रहों की अलग-अलग स्थितियां रहती हैं। सभी ग्रहों के शुभ-अशुभ फल होते हैं। हमारी कुंडली में जो ग्रह अच्छी स्थिति में होता है, वह हमें शुभ फल देता है। जबकि, जो ग्रह कुंडली में अशुभ स्थिति में होता है, वह बुरा फल देता है। सभी 9 ग्रहों का फल अलग-अलग क्षेत्रों में प्राप्त होता है।

ज्योतिष के अनुसार सूर्य को नवग्रहों में से राजा माना जाता है तथा सूर्य हमारी कुंडली में हमारी आत्मा, हमारे पिता, हमारे पूर्वजों, हमारी नर संतान पैदा करने की क्षमता आदि का प्रदर्शन करते हैं जिसके चलते प्रत्येक कुंडली में सूर्य बहुत महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है तथा इसी के कारण सूर्य पर कुंडली में किसी एक या एक से अधिक अशुभ ग्रहों का प्रभाव पड़ने पर जातक के लिए बहुत सीं समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में सूर्य देव सफलता का कारक हैं और अगर कुंडली में सूर्य देव कमज़ोर स्थिति में बैठे हों तो जातक का पूरा जीवन अस्‍त व्‍यस्‍त हो जाता है। ज्‍योतिष के अनुसार मनुष्‍य के जीवन पर ग्रहों का महत्‍वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

किसी को शुभ ग्रह मालामाल बना देते हैं तो किसी को कंगाल बनाने में भी देर नहीं लगाते। सौरमंडल में नौ ग्रह हैं और ये नौ ग्रह किसी ना किसी तरह मनुष्‍य के जीवन पर अच्‍छा और बुरा प्रभाव डालते ही हैं।

कोई ग्रह करियर पर प्रभाव डालता है तो कोई मनुष्‍य की लव लाइफ को बेहतर या खराब करने की क्षमता रखता है।

सूर्य के कारकत्व से जुड़े विषयों के बारे में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सूर्य जन्म कुंडली में जिस भाव में होता है, उस भाव से जुड़े फलों की हानि करता है।

यदि सूर्य पंचमेश, नवमेश हो तो पुत्र एवं पिता को कष्ट देता है। सूर्य लग्नेश हो तो जातक को सिरदर्द, ज्वर एवं पित्त रोगों से पीड़ा मिलती है।

मान-प्रतिष्ठा की हानि का सामना करना पड़ता है।

किसी अधिकारी वर्ग से तनाव, राज्यपक्ष से परेशानी आदि।

यदि न्यायालय में विवाद चल रहा हो, तो प्रतिकूल परिणाम।

शरीर के जोड़ों में अकड़न तथा दर्द। किसी कारण से फसल का सूख जाना।

व्यक्ति के मुंह में अक्सर थूक आने लगता है तथा उसे बार-बार थूकना पड़ता है।

सिर किसी वस्तु से टकरा जाता है। तेज धूप में चलना या खड़े रहना पड़ता है।

ये हैं सूर्य के शत्रु ग्रह: 

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि ज्‍योतिष शास्‍त्र में सूर्य ग्रह के चंद्र, गुरु और मंगल ग्रह मित्र हैं, जबकि शुक्र, राहु और शनि इसके शत्रु हैं। वहीं दूसरी ओर बुध और केतु मध्यम। सूर्य ग्रह मेष में उच्च और तुला में नीच के होते हैं। सूर्य का बलवान होना सभी तरह के अनिष्टों को नष्ट कर देता है। आइए आज आपको बताते हैं, यदि सूर्य जो आरोग्‍य और शरीर में कई व्‍याधियों का कारक है यदि खराब है तो कौन-कौन से रोग हो सकते हैं और कैसे कोई भी जातक कुंडली में सूर्य की अशुभ स्थिति का सुधारने और बुरा प्रभाव कम करने के लिए कौन कौन से उपाय कर सकता है।

खराब सूर्य होने से हो सकती ये बीमारियां --
ज्योतिष में सूर्य सिर,  दिमाग,  दाहिनी आंख,  पेट के अंदर का भाग,  ह्रदय,  बुखार,  कालरा,  ब्लड प्रेशर, धमनिया,  उच्‍च रक्‍तचाप, दिल,  कंठ स्वर,  पित्त,और हड्डी से सम्बंधित रोग। यकीन मानिये यदि आप इन रोगों से प्रभावित हैं तो ज़रूर आपका सूर्य गृह आपकी जन्म कुंडली में ख़राब है।  इसके साथ ही मान,  सम्मान,  यश,  प्रतिष्ठा,  कीर्ति,  वैभव,  ख्याति,  आत्मा, शक्ति, लक्ष्मी, प्रभाव, तेज, बल, विहीन है तो भी आपका आपका सूर्य पीड़ित है।

जानिए सूर्य के अशुभ प्रभाव---
ज्योतिर्विद पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि यदि किसी जातक की कुंडली में ये ग्रह अशुभ भाव में बैठा है तो व्‍यक्‍ति को अपने करियर में असफलता मिलती है। उसे नौकरी मिलने में दिक्‍कत आती है।

व्‍यापार पर सूर्य का प्रभाव---
ये ग्रह व्‍यक्‍ति की प्रोफेशनल और पर्सनल दोनों ही पहलुओं पर असर डालता है। इसके अशुभ होने पर व्‍यापार में घाटा होता है और व्‍यक्‍ति को पैसा कमाने या आय के साधनों में बाधा उत्‍पन्‍न होती है। कई प्रयास करने के बाद भी व्‍यक्‍ति व्‍यापार में प्रग‍ति नहीं कर पाता है।

जीवन में मिलती है असफलता--
अशुभ सूर्य का दूसरा मतलब है असफलता। ऐसी स्थित में आप जो भी कार्य करते हैं उसमें आपको असफलता मिलती है। अगर आप किसी से प्रेम करते हैं और उसे अपने दिल की बात बताते हैं तो किसी ना किसी कारण से वो व्‍यक्‍ति आपसे दूर चला जाता है।

रोजगार/नौकरी मिलने में दिक्‍कत--
कई लोग शिकायत करते हैं कि अच्‍छी डिग्री लेने और पढ़ाई करने के बाद भी उन्‍हें नौकरी नहीं मिल रही है या अच्‍छी नौकरी पाने में उन्‍हें दिक्‍कत हो रही है। इसकी वजह कुंडली में बैठा सूर्य हो सकता है। जब येे किसी अशुभ भाव में बैठा होता है तो वो उस जातक को नौकरी मिलने में परेशानियां उत्‍पन्‍न करता है।

उपाय---
इन्‍हें प्रसन्‍न करने के लिए रोज़ सुबह एक लोटे पानी में हल्‍दी डालकर सूर्य को अर्घ्‍य दें।
रविवार के दिन सूर्य से संबंधित वस्‍तुओं का दान करें।
सफलता पाने हेतु माणिक्‍य रत्‍न धारण करें।

यह कर सकते हैं उपाय --
जातक की कुंडली में कोई भी अशुभ या बलहीन ग्रह पूरी तरह से अपना बुरा प्रभाव देना बंद तो नहीं करता, लेकिन फिर भी उपाय के द्वारा इस प्रभाव को कम किया जा सकता है। यदि सूर्य खराब है तो आप पिता की सेवा कर सकते हैं, भगवान शिव की पूजा करें, रविवार को लाल वस्तुओं का दान करें।

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