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कौन पूछता है दरख्तों को यहाँ बुढापे से पहले और बचपन के बाद: हेमा चंदानी ‘अंजुली’

करन निम्बार्क, मुंबई 

कौन पूछता है दरख्तों को यहाँ बुढापे से पहले और बचपन के बाद और हेमा जी ने तो शब्दों की बगिया ही उगा ली । १६ दिसंबर २०१८ की तिथि मुझे तो सदैव याद रहेगी और क्यों ना हो ! मैं शब्दों को संजोने वाला, मुझे जब महासागर में डूबकी लगाने का अवसर मिला हो तो कैसे भला इस तिथि को भुल सकता हूँ ? १६ दिसंबर के दिन हेमा चंदानी ‘अंजुली’ ने अपने दिवंगत बड़े भाई और संगीतकार स्वर्गीय विकास कुमार की स्मृति में चंद्रा विकास मंच की ओर से मुंबई में पुस्तक मेला व काव्य गोष्ठी का आयोजन किया, जो कि निश्चित रूप से सफल रहा, सार्थक रहा ।  

कार्यक्रम का प्रथम सत्र था पुस्तक मेले का, जहाँ आप मात्र दो सौ रूपए के न्यूनतम शुल्क पर न केवल अपनी पुस्तकें लगा सकते हैं बल्कि आपको अपनी पुस्तक के विषय में बात करने का भी विशेष सुअवसर प्राप्त होता है । जैसे गुरुद्वारे में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता वैसे ही इस कार्यक्रम में मानो साहित्य के भक्त आए हुए थे और पूरे मन से जिससे जो हो सके कार्यक्रम को सार्थक बनने में सहयोग दे रहे थे । जहाँ प्रथम सत्र में प्रख्यात और नवोदित लेखकों, लेखिकाओं, कवियों, कवित्रियों ने अपनी पुस्तकें प्रस्तुत कीं वहीं दूसरे सत्र में हिन्दी काव्य के दिग्गजों ने अपनी रचनाओं से इस कार्यक्रम को सातवे आसमान पर पहुँचा दिया । सुनाने से अधिक आनंद एकदूजे को सुनने में मिल रहा था । 





यह कार्यक्रम अँधेरी में वर्सोवा-आराम नगर दो के टेफ्ला स्टूडियो में दोपहर १२ बजे से रात ८ बजे तक रखा गया था ।  इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने हेतु मुंबई के कोने-कोने से रचनाकार उपस्थित हुए थे । इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि यहाँ साहित्य में अपनी यात्रा शुरू करनेवाले को मंच मिला जो विश्व में शायद ही इतनी आसानी से मिल पता हो । भारत के ही अन्य प्रचलित पुस्तक मेलों की बात करूँ तो वहाँ नए लेखकों को अथवा जो आर्थिक दृष्टी से इतने संपन्न ना हो उन्हें तो कभी अवसर ही ना मिले कि वे अपनी पुस्तकें पाठकों के समक्ष प्रस्तुत कर सकें । वहीं दूसरी और हर कवि चाहता है कि उसकी रचना भी सुनी जाए, परखी जाए, सराही जाए, उसे भी दिग्गजों का आशीर्वाद मिले । परंतु नए रचनाकारों को इतनी आसानी से बड़ा मंच मिले तो मिले कैसे ? और चंद्रा विकास मंच ही वह मंच है जिसने इन दोनों ध्येयों को ध्यान में रखते हुए यह अद्भुत सराहनीय पहल की ।

अजेयभारत हेमा जी को, चंद्रा विकास मंच को और इस कार्यक्रम से जुड़े प्रत्येक सदस्य को, रचनाकार को, अतिथियों को इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु बधाई देता है और और निकट भविष्य में भी ऐसे अद्भुत आयोजनों हेतु शुभकामनाएँ देता है ।       

                           

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1 Comments

Unknown said…
बहुत ही सही कहा कारण जी आपने