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प्रशासन की धुंध से निपटने की नहीं कोई तैयारी


महेंद्रगढ़। मौसम विभाग ने आने वाले दो तीन दिन में धुंध पड़ने की संभावना जताई हैं लेकिन यहां ट्रैफिक लाइटें न जलने, रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड आदि न होने से वाहन चालकों को भारी परेशानी होती है। प्रशासन ट्रैफिक लाइट्स व रिफ्लेक्टरों को लेकर तनिक भी गंभीर नहीं है। प्रशासन की ओर से इसकी कोई तैयारी नहीं की गई। नेशनल हाईवे से लेकर गांव और शहर की मुख्य सड़कों पर सफेद पट्टी गायब है। धुंध के मौसम में गाड़ी कब नीचे उतर जाती है इसका ड्राईवर को पता नहीं चलता जिसके कारण सड़क हादसे होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा हाईवे से गांव में जाने वाले और चौराहों पर न तो रिफ्लेक्टर लगे हैं और न ही साइन बोर्ड लगे। इसके अलावा हाईवे पर स्थित चौराहों पर ट्रैफिक लाइट और ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था नहीं है। पीडब्ल्यूडी विभाग के पास इसका बजट भी आता है किंतु अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

ये है शहर के डेंजर प्वाइंट
नेशनल हाईवे 148 बी पर जाटवास मोड़, कैंची मोड़, सतनाली चौक, राव तुलाराम चौक, ओवर ब्रिज आदि स्थानों पर दुर्घटनाएं ज्यादा होती हैं। ओवरब्रिज से नीचे उतरकर रेवाड़ी की ओर जाने वाले खतरनाक कट है। इसके अलावा माजरा चुंगी, सचिवालय के सामने, कॉलेज मोड़ पर भी खतरनाक मोड़ है जहां पर कई हादसे हो चुके है। उक्त स्थानों पर साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टिंग बोर्ड, अंडरपास ब्रिज ट्रैफिक, पुलिस कर्मी की तैनाती की कमी हादसों का कारण बन रही है। वाहन चालकों के लिए धुंध का खतरा शुरू हो चुका है। धुंध को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस प्रशासन द्वारा वाहन चालकों को सुरक्षा में लापरवाही बरती जा रही है। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस द्वारा अब तक बसों, ट्रैक्टरों-ट्रालियों, ट्रकों समेत बड़े वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाने शुरू तक नहीं किए है।

सड़कों पर गड्ढे होने से बढ़ती है परेशानी
सड़कों पर सफेद पट्टी का न होना तो खतरनाक है ही इसके जितना ही खतरनाक विभिन्न सड़कों पर बने गहरे गड्ढ़े भी है। जिले के कई प्रमुख रास्तों पर गहरे गड्ढे हो गए है। संबंधित अधिकारी इन गड्ढों को भरने की कोई योजना नहीं बना रहे। रेलवे रोड पर शहर के अंदर के क्षेत्र में काफी गड्ढे हैं। नगरपालिका के पीछे, ओवरब्रिज के पास, ओवर ब्रिज से रेलवे रोड पर गड्ढों की संख्या बड़ी होती जा रही है।

सफेद पट्टी न होने से हादसों का डर
नेशनल हाईवे पर बहुत सी जगहों पर सफेद पट्टी लगी ही नहीं। कुछ हिस्सों में पुरानी पट्टी दिख तो रही है, लेकिन धुंध में ये पट्टियां हल्की होने के कारण दिखाई नहीं देती। शहर के आसपास के चौराहों और मोड़ पर भी सफेद पट्टी नहीं है। इसके अलावा कुरहावटा रोड, बवानिया रोड, देवनगर रोड, बवानिया रोड सहित शहर से लिंक करने वाली सड़कों पर सफेद पट्टी किनारों पर सफेद पट्टी नहीं लगी है।

व्यवस्था नहीं हुई तो बढ़ेगी दुर्घटनाएं
प्रशासन की तैयारी नहीं होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। क्योंकि आने वाले समय में कोहरा बढ़ेगा, जिससे हादसे भी बढ़ेंगे। साफ मौसम और गर्मी के समय में शहर में हर महीने में औसतन 20 दुर्घटनाएं होती है। वहीं, सड़क से गाड़ी उतरना और हल्की दुर्घटनाओं की तो कोई संख्या ही नहीं है।

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