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एक बार फिर सांझी मदद बनी 200 परिवारों के चेहरों पर मुस्कान की वजह

डीसी सोनल गोयल ने गांव खाजपुर के समीप भट्ठे पर सर्दी से बचाव के लिए प्रवासी श्रमिक परिवारों को किए कंबल वितरित
सांझी मदद से एक वर्ष के दौरान जिला में की जा चुकी है पांच हजार से अधिक परिवारों की मदद


Report by Arvind Yadav

झज्जर, 15 जनवरी। जिला प्रशासन झज्जर द्वारा गरीब व जरूरतमंदों की निस्वार्थ मदद के लिए चलाई जा रही सांझी मदद मुहिम एक बार फिर ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले 200 परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लाने में सक्षम साबित हुई। उपायुक्त सोनल गोयल ने सांझी मदद की पहली वर्षगांठ के अगले दिन मंगलवार को गांव खाजपुर के समीप राजेश ईंट भट्ठा पर प्रवासी श्रमिक परिवारों को सर्दी से बचाव के लिए कंबल वितरित किए। 

उपायुक्त सोनल गोयल ने सांझी मदद के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2018 में मकर सक्रांति के अवसर पर झज्जर जिला में सांझी मदद मुहिम का शुभारंभ हुआ था। एक वर्ष के दौरान सांझी मदद के जरिए पांच हजार से अधिक लोगों को मदद दी जा चुकी है। साथ ही केरल में आई बाढ़ के दौरान प्रभावितों की मदद के लिए झज्जर जिलावासियों ने सांझी मदद के जरिए 90 लाख रुपए से अधिक राशि जुटा कर एक अनूठा रिकार्ड कायम किया था। सांझी मदद के लिए झज्जर जिला में झज्जर व बहादुरगढ़ के बाल भवनों में सामग्री संग्रहण केंद्र खोले गए है। जिला का कोई भी व्यक्ति या संस्था गरीब व जरूरतमंदों की मदद के लिए घर में रखे इस्तेमाल योग्य कपड़े, खेल-कूद का सामान, पुस्तकें तथा जूते आदि सामग्री जमा करा सकता है। 




श्रीमती सोनल गोयल ने बताया कि सामग्री संग्रहण केंद्रों में जमा होने वाली सामग्री का वितरण प्रशासनिक अधिकारियों की देख-रेख में होता है। ऐसे में लोगों को अधिक से अधिक मदद के लिए आगे आना चाहिए। आपकी मदद जरुरतमंदों के लिए मुस्कान की वजन बनती है। उन्होंने बताया कि सांझी मदद मुहिम के तहत एक वर्ष के दौरान जिला में अनेक जरूरतमंद परिवारों को मदद मिली है। मानवीय मूल्यों पर आधारित इस मुहिम में लोगों को अधिक से अधिक भागीदार बनना चाहिए। उपायुक्त ने खाजपुर में भट्ठा पर काम करने वाले प्रवासी श्रमिक परिवारों को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए भी प्रेरित किया।


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