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मिशन लोकसभा 2019 पर भाजपा का कार्य प्रारंभ,कांग्रेस का भी लक्ष्य पर निशाना

लक्ष्य लोकसभा चुनाव,किस पर खेलें दाव तो किस को मैदान में उतारें

डा.एल.एन.वैष्णव
भोपाल: 9 जनवरी  2019



गढ को बचाने और भेदने के लिये तैयारियां प्रारंभ हो चुका है वैसे देखा जाये तो भारतीय जनता पार्टी ने इसके लिये तैयारियों को पिछले कुछ माह पूर्व से ही प्रारंभ कर दिया था। प्रधानमंत्री नमो का नूतनबर्ष के प्रथम सप्ताह में ही 95 मिनिट का साक्षात्कार और बेबाक तरीके से अपनी उपलब्धियों को सामने रखना और फिर पंजाब से रैलियों के माध्यम से बिगुल फूंकना इसी विषय का एक बडा हिस्सा कहा जा सकता है। वहीं देखा जाये तो कांग्रेस अभी इसमें पीछे दिखलाई देती है हां वह हिन्दी भाषी 3 बडे राज्यों में मिली सफलता से गदगद जरूर है और इसी उत्साह के साथ वह लोकसभा चुनाव में उतरने की रणनीति बना रही है।

बात करें मध्यप्रदेश की तो यहां पर भाजपा को कांग्रेस से ज्यादा मत प्राप्त हुये हैं और अगर यह कहा जाये कि शिवराज सिंह रूपी अंगद पैर को वह उखाडने में पूरी तरह सफल नहीं हो पायी तो शायद अतिश्योक्ति नहीं होगी? भले ही कांग्रेस ने जीते बागियों एवं बिना शर्त समर्थन प्राप्त बसपा,सपा के विधायकों को जोड कर सरकार बना ली हो परन्तु मजबूत विपक्ष ने उसकी नींदे उडा के रखी हैं। वंदेमातरम रोकने के मामले में प्रदेश के मुखिया को अचानक नया आदेश जारी करना इसी बात की ओर ईशारा करता है। मुख्य मंत्री को चुनने और फिर मंत्री मण्डल और इसके बाद विभागों को लेकर रस्साकसी ने कांग्रेस की आंतरिक कलह को आमजनमानस में चर्चाओं के बाजार कांे गर्म बना के रखा। प्रदेश में सरकार के बनने के बाद कुछ ही माह में आचार संहिता फिर से लग जायेगी और लोकसभा चुनाव के लिये राजनैतिक दल मैदान में होंगे। प्रदेश सरकार का योजनाओं को बंद करने और प्रारंभ करने में उलझने का मतलब आप अंदाजा लगा सकते हैं?

विधायकों पर दांव लगाने असमंजस-
लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी हो या फिर कांग्रेस दोनो ही प्रमुख दल इस समय विधायकों को चुनाव में उतारने को जोखिम उठाने की स्थिति मंे दिखलाई नहीं देते हैं। वैसे देखा जाये तो अचानक दावेदारों की फौज खडी होने लगी है जिसमें भाजपा से अधिक कांग्रेस में दिखलाई दे रही है जो चर्चाओं में बनी हुई है। बात करें मध्यप्रदेश के दमोह लोकसभा को ही ले लें तो यहां पर कांग्रेस के कुछ नेताओं का पोस्टर वार दिखना प्रारंभ हो चुका है,अचानक सामने आये एैसे लोगों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है? बात करें भाजपा की तो यहां भी अनेक नेता अपने को लोकसभा का दावेदार मानकर चल रहे हैं। किसको कौन सी पार्टी मैदान में उतारती है यह तो अभी समय के गर्त में छिपा हुआ है । मध्यप्रदेश सरकार में अंको पर नजर डालें तो कांग्रेस के 114 जबकि भारतीय जनता पार्टी के 109 विधायकों ने विजय श्री प्राप्त की है। राजनीति के जानकारों की माने तो दोनो ही दल किसी प्रकार का जोखिम उठाने में आगे नहीं आना चाहते हैं।  देखा जाये तो सत्ता का समीकरण कुछ इस प्रकार का है कि कुछ विधायक ही सरकार का भविष्य बिगाड़ और बना सकते हैं। कांग्रेस को सरकार बनाए रखने के लिए एक विधायक की कमी भी नुकसान पहुंचा सकती है। बात करें भारतीय जनता पार्टी की तो उसकी सत्ता में वापिसी की उम्मीद पर पानी फिर सकता है इसलिये वह अपने किसी भी विधायक को तो कम से कम मैदान में नहीं उतारेगी।

कांग्रेस विजय की योजना -
देश के 3 बडे राज्यों में सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने वाली कांग्रेस अब देश की गद्दी पर बैठने की योजना पर काम कर रही है। सरकार बनाने के पश्चात् ध्यान लोकसभा चुनाव पर लगा रही है। कांग्रेस ने संगठन में कसावट लाना प्रारंभ कर दिया है। प्रदेश सरकार में जो विधायक मंत्री नहीं बनने से नाराज हैं एैसों को प्रसन्न करने के लिये पद बांटने का काम प्रारंभ किया जा सकता है। 100 दिन की योजना पर कार्य करने के लिये सुझाव मांगने का क्रम प्रारंभ हो चुका है। सीधे जनता से जुडे मुद्दे एवं योजनाओं को पहुंचाने के लिये दिग्गजों को कहा गया है। किसानों की कर्ज माफी बड़ा मुद्दा बनाकर प्रत्येक ग्राम तक पहंुचाया जाना इसमें प्रमुख बतलाया जा रहा है।

मेरा परिवार भाजपा का परिवार-
भारतीय जनता पार्टी जहां नमो सरकार की स्वच्छ एवं भ्रष्टाचार मुक्त सरकार एवं पूरे कार्यकाल की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच पहुंचने की दिशा में गत बर्ष से प्रारंभ किये गये अभियान को तीव्र गति देना प्रारंभ कर चुकी है। वहीं संगठन में अधिक कसावट लाने की दिशा में काफी आगंे दिखलायी दे रही है। वह बारीकी से योजनाओं को बनाकर जनमानस के बीच पहुंच रही है। मेरा घर भाजपा का घर के नारे की जगह अब मेरा परिवार भाजपा का परिवार का नारा देकर वह जनता के बीच पह ंुचना प्रारंभ कर चुकी है। सभी संगठनों की जिम्मेदारी तय कर दी गयी है और काम पर लग चुके हैं।

सूत्रों की माने तो संगठन ने नींव के पत्थरों को साधने के लिये बडी योजना पर कार्य प्रारंभ किया है। वह सभी जिनकी शिकायतें प्राप्त हुई थी कार्यवाही करते हुये योग्य अनुभवी कार्यकर्ताओं की फौज खडी की गयी है। व्यक्ति वंदना की जगह पार्टी को सर्वोपरी मानने वालों को कार्य पर लगाया गया है। नये लोगों को भारतीय जनता पार्टी से जोडने की योजना के साथ मोटर साईकिल रैली 30 जनवरी को निकालने पर विचार चल रहा है। भारतीय जनता पार्टी युवाओं पर अपना ज्यादा ध्यान केंद्रित किये हुये है जिनकी संख्या लगभग 50 लाख मध्यप्रदेश में बतलायी जाती है। सूत्रों की माने तो एक बूथ दस यूथ के नारे के साथ वह युवाओं के बीच संपर्क करना प्रारंभ कर चुकी है।

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