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भगवान श्री राम और रावण की आयु के मध्य मात्र 60 वर्ष का अंतर था


प्राय: कहा जाता है कि भगवान श्री राम और रावण के युद्ध के समय भगवान श्री राम की आयु लगभग 41 वर्ष थी और रावण की आयु लगभग 10,000 वर्ष थी ! आज इसी विषय पर हम लोग चर्चा करते हैं मैंने बाल्मीकि रामायण से भगवान श्री राम की कुंडली निकाली है और अगस्त संहिता से रावण की कुंडली निकाली है ! दोनों की कुंडलियों की जो ग्रह स्थिति है उनके मध्य के अंतराल की गणना करने पर मुझे यह ज्ञात हुआ कि भगवान राम और रावण की आयु के मध्य मात्र 60 वर्ष का अंतर था !
यह किवदंती या भ्रांति है कि युद्ध के समय रावण की आयु 10,000 वर्ष या कई लाख वर्ष थी ! यह निराधार है ! आज तक कहीं किसी भी ग्रंथ में रावण के भगवान श्री राम से युद्ध करते वक्त क्या आयु थी इसका वर्णन नहीं किया गया है ! यह रावण के आयु की कल्पना मात्र कथावाचकओं की देन है ! आज हम लोग इसी विषय पर ज्योतिषीय गणना के अनुसार विश्लेषण करते हैं !
वाल्मीकि के अनुसार श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी तिथि एवं पुनर्वसु नक्षत्र में जब पांच ग्रह अपने उच्च स्थान में थे तब हुआ था। इस प्रकार सूर्य मेष में, मंगल मकर में, ब्रहस्पति कर्क में, शुक्र मीन में पर एवं शनि तुला राशि में पर था। (बाल कांड 18/श्लोक 8, 9)।
अगस्त्यसंहिता के अनुसार जो कि रावण के फूफा थे उनके अनुसार रावण का जन्म सावन मास में शुक्ल त्रीयोदाशी तिथि मकर राशि एवं धनिष्ठा नक्षत्र में हुआ था। इस प्रकार सूर्य स्व राशि व वृहस्पति सिंह राशि में, चन्द्रमा व मंगल उच्च का होकर मकर में, शुक्र स्व राशि वृष में एवं शनि उच्च का तुला राशि में था।
सूर्य:- एक राशि से दूसरी राशि तक पहुचने में एक माह का समय लेता है ! यह एक वर्ष में 12 राशियों का चक्र पूरा कर लेता है !
चंद्र :- यह एक राशि से दूसरी राशि तक पहुचने में सवा दो दिन अर्थात 30 घंटे का समय लेता है ! लगभग 1 माह में 12 राशियों का चक्र पूरा कर लेता है !
मंगल:- यह एक राशि से दूसरी राशि तक पहुचने के लिए लगभग 45 दिन का समय लेता है ! किन्तु कभी कभी अतिचारी, वक्री होने कि स्थिति में अपनी समय सीमा से अधिक एक राशि पर भ्रमण करता है!
बुध :- बुध ग्रह का वर्णन दोनों ही कुण्डली में नहीं है !
गुरु :- यह एक राशि से दूसरी राशि तक पहुचने में 13 माह का समय लेता है ! यह गृह भी वक्री, मार्गी या अतिचारी होने पर अपनी समय सीमा का एक दो माह के लिए उल्लंघन कर देता है !
शुक्र:- एक राशि से दूसरी राशि तक पहुचने के लिए सामान्यत: एक माह लेता है! किन्तु वक्री, मार्गी या अतिचारी होने कि स्थिति में एक माह से या अधिक समय भी लेता है !
शनि : यह ढाई साल में एक राशि से दूसरी राशि तक पहुचता है ! अर्थात 12 राशियों का चक्र पूरा करने में पूरे 30 वर्ष लगते हैं !
राहु केतु का वर्णन भी दोनों ही कुण्डली में नहीं है !
कुंडली के अनुसार भगवान श्री राम की कुंडली में तुला राशि में उच्च का शनि बैठा हुआ है और रावण की भी कुंडली में तुला राशि में ही उच्च का शनि है ! जैसा कि ग्रहों की चाल गणना से ज्ञात होता है कि 30 वर्ष में शनि 12 राशियों का चक्र पूरा करके पुनः उसी राशि में आ जाता है अतः यह कहा जा सकता है के 60 वर्ष में शनि ग्रह पुनः उसी राशि में आ जाएगा जिसमें वह 60 वर्ष पूर्व था अर्थात रावण की जन्म कुंडली में उच्च का शनि तुला राशि में जैसे उस समय था, उस से ठीक 60 वर्ष बाद पुनः तुला राशि में उच्च का होकर भगवान श्री राम के जन्म के समय आ जाएगा !
ठीक इसी तरह बृहस्पति लगभग 12 वर्ष में 12 चक्रों की राशि पूर्ण कर लेता है और रावण की कुंडली में बृहस्पति कर्क राशि में मौजूद है यदि बृहस्पति पांच राशियों के चक्र पूरे करता है तो वह पुनः 60 साल बाद उसी कर्क राशि या उसकी अगली सिंह राशि में आ जाएगा ! इस तरह 60 साल के अंतराल पर होने पर भगवान श्री राम की कुंडली में बृहस्पति सिंह राशि में मौजूद स्वाभाविक है !

इसी तरह मंगल और शुक्र की भी गणना मैंने की है और मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि भगवान श्री राम और रावण कि जो जन्म कुंडली हमारे सामने उपस्थित है, उन दोनों के मध्य ग्रहों की गोचर गणना का अंतराल लगभग 60 वर्ष ही आता है ! मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचता हूं कि रावण की आयु भगवान श्री राम से मात्र 60 वर्ष ज्यादा थी या कहिए कि भगवान श्री राम रावण से मात्र 60 वर्ष की छोटे थे इसलिए हजारों या लाखो वर्ष की आयु का अनुमान लगाना उचित नहीं है !
इस तरह निष्कर्ष निकलता है कि यदि 27 वर्ष की आयु में भगवान श्री राम को वनवास हुआ था तो राम रावण के युद्ध के समय भगवान श्री राम की आयु लगभग 41 वर्ष की थी और रावण की आयु लगभग 101 वर्ष की थी !
योगेश कुमार मिश्र
अधिवक्ता एवं ज्योतिष विद
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