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...और इसी की वजह से सरकार द्वारा किसानों के लिये किये जाने वाले सारे प्रयास निरर्थक जाते हैं:प्रेम सिंह


देश मे चार तरह के किसान हैं।

सरकार के पास इसका कोई सर्वे नहीं है और इसी की वजह से सरकार द्वारा किसानों के लिये किये जाने वाले सारे प्रयास निरर्थक जाते हैं और आज़ादी के बाद किसानों की हालत और अधिकखराब हूई है ।सरकार के सारे प्रोत्साहन जोत सीमा के आधार पर उप्लब्ध होते हैं ।जबकि हम जानते हैं कि अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पादन कई तथ्यों पर निर्भर होता है जैसे सिंचाई के साधन,भूमि की उत्पादकता एव अन्य संसाधनआदि।और इसी वजह से उनकी जरुरत अलग-अलग होती हैऔर सरकार के उपाय टके सेर भाजी,टके सेर खाजा की तरह किसानों के बीच एक नया विभाजन और विद्वेष पैदा कर देती है।
जबकि देश में चार प्रकार के किसान हैं।

1-ऐसे किसान जिनके पास या तो विल्कुल जमीन नहीं है या बहुत कम।फिर भी उनकी सम्पुर्ण जीवनआधार खेती है।अर्थात दुसरे किसानों से बटाई,बल्कट या अन्य तरीके से खेत लेतेहैं ।

2-ऐसे किसान जिनकी अपनी खेती है और स्वयं ही खेती करते भी हैं।इनकी भी आजीविका का सम्पूर्ण श्रोत खेती ही है।

3-ऐसे किसान जिनके अपने खेत हैं और कुछ भाग में खेती करते और अधिकांस को बटाई,बल्कट आदि मे देकर स्वयं कोई व्यापार या छोटा मोटा धन्धा भी करते हैं।

4-ऐसे किसान जिनके नाम खेत तो हैं किन्तु वे जानते भी नहीं हैं कि उनके कहाँ कहाँ और कितने खेत है।अर्थात बड़ी नौकरी करने वाले(iasआदि),बड़े राजनैतिक पदों वाले,सरकार द्वारा पूरी गारंटी पाये लोग।इनके जादातर खेत भाव बढने की प्रतीक्षा मे अनुत्पादक पड़े रहते हैं जो कि प्राकृतिक अपराध तो है ही साथ मे एक तरह का राश्ट्रीय द्रोह भी है।

उपरोक्त चारो प्रकार के किसानों का सर्वे करा कर यदि सरकारें प्रथम 1और 2 श्रेणी के किसानों के साथ एक बार पूर्ण ऋण मुक्त कर,किसानी के तरीकों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सम्पूर्ण हस्तक्षेप हटा लेना चाहिए और इनके बच्चों और परिजनो के लिये पूरी शिक्षा,न्याय और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिये।साथही csr का सम्पुर्ण पैसा और कुल बजट का 2%कार्बन क्रेडिट के रुप मे बिना शर्त इन किसानों को देना चाहिए।

3सरे प्रकार के किसानों को नया उद्यम खड़ा करने के लिये कम से कम 10वर्ष तक विना व्याज का ऋण उप्लब्ध करना चाहिए।ताकि वे अपने नये नये उद्योग खड़े कर सके।

4थे प्रकार के किसानो की जमीने सरकार को जब्त करके जंगल या पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रयोग करना चाहिए।
ऐसा करने से किसान तो मुख्य धारा में शामिल होगा ही निम्न लाभ अतिरिक्त होंगे।
1-मज़दूर रह ही नहीं जायेगें,सब किसान बन जायेंगे।
2-शहर का पलायन रुक जायेगा।
3-भ्रष्टाचार स्वतह नियन्त्रित होगा।
4-जैव विविधता एवं पौष्टिक आहार मिलेगा जिससे पूरे विश्व से भारतीय खाद्यान्न,फलों आदि की मांग बढ़ जायेगी।
5-हैप्पीनेस इंडेक्स बढ़ जायेगा।
6-इतने प्रकार का लघु उद्योग बढ़ जायेगा कि चीन भी पीछे हो जायेगा।
अनंत फायदे होन्गे और प्योर5पूरे विस्व के किसानों के लिये प्रोत्साहन मिलेगा।


प्रेम सिंह की फेसबुक वाल से 

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