Recents in Beach

header ads

जानिए क्या सुनामी लहरों का अंदाज़ा पहले से लगाया जा सकता है?,पूर्णिमा पर क्यों नहीं करना चाहिए किसी से बहस?

जानिए क्या है सुनामी ओर क्यों आती है ??

सूनामी क्या है?

दरअसल ये बहुत लम्बी - यानी सैकड़ों किलोमीटर चौड़ाई वाली होती हैं, यानी कि लहरों के निचले हिस्सों के बीच का फ़ासला सैकड़ों किलोमीटर का होता है। पर जब ये तट के पास आती हैं, तो लहरों का निचला हिस्सा ज़मीन को छूने लगता है,- इनकी गति कम हो जाती है और ऊँचाई बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में जब ये तट से टक्कर मारती हैं तो तबाही होती है। गति 420 किलोमीटर प्रति घण्टा तक और ऊँचाई 10 से 18 मीटर तक। यानी खारे पानी की चलती दीवार। अक्सर समुद्री भूकम्पों की वजह से ये तूफ़ान पैदा होते हैं।


बता दें कि रिंग ऑफ फायर में स्थित होने के कारण इंडोनेशिया में दुनिया में सबसे अधिक भूकंप और सुनामी आते हैं। इसी साल जुलाई में इंडोनेशिया में एक हफ्ते के अंतराल में दो भूकंप के झटके आए थे। लोम्बोक में 7 और बाली में 6.4 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था। इनमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी।

इंडोनेशिया में सूनामी--
समुद्र के भीतर अचानक जब बड़ी तेज़ हलचल होने लगती है तो उसमें उफान उठता है. इससे ऐसी लंबी और बहुत ऊंची लहरों का रेला उठना शुरू हो जाता है जो ज़बरदस्त आवेग के साथ आगे बढ़ता है.

इन्हीं लहरों के रेले को सूनामी कहते हैं. दरअसल सूनामी जापानी शब्द है जो सु और नामी से मिल कर बना है. सु का अर्थ है समुद्र तट और नामी का अर्थ है लहरें.

 सुनामी यानी कोस्टल वेव और हिंदी में इसका मतलब है समुद्र तटीय लहरें। समुद्र के भीतर अचानक जब तेज़ हलचल होने लगती है तो उसमें उफान उठता है। इससे ऐसी लंबी और बहुत ऊंची लहरों का रेला उठना शुरू हो जाता है जो ज़बरदस्त रफ्तार के साथ आगे बढ़ता है। इन्हीं लहरों के रेले को सुनामी कहते हैं। दरअसल सुनामी जापानी शब्द है जो सू और नामी से मिल कर बना है सू का अर्थ है समुद्र तट और नामी का अर्थ है लहरें। पहले सुनामी को समुद्र में उठने वाले ज्वार के रूप में भी लिया जाता रहा है लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल समुद्र में लहरें चांद-सूरज और ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से उठती हैं, लेकिन सुनामी लहरें इन आम लहरों से अलग होती हैं।

कैसे उठती हैं सुनामी लहरें?

सुनामी लहरों की वजह वैसे तो कई है, लेकिन सबसे ज्यादा असरदार कारण है भूकंप। इसके अलावा ज़मीन धंसने, ज्वालामुखी फटने, किसी तरह का विस्फोट होने और कभी-कभी उल्कापात के असर से भी सुनामी लहरें उठती हैं।

सुनामी लहरों का असर किस तरह पड़ता है?

सुनामी लहरें समुद्री तट पर भीषण तरीके से हमला करती हैं और जान-माल का बुरी तरह नुक़सान कर सकती हैं।

क्या सुनामी लहरों का अंदाज़ा पहले से लगाया जा सकता है?

जिस तरह वैज्ञानिक भूकंप के बारे में भविष्यवाणी नहीं कर सकते वैसे ही सुनामी के बारे में भी अंदाज़ा नहीं लगा सकते। लेकिन सुनामी के अब तक के रिकॉर्ड को देखकर और महाद्वीपों की स्थिति को देखकर वैज्ञानिक कुछ अंदाज़ा लगा सकते हैं। धरती की जो प्लेट्स या परतें जहां-जहां मिलती है वहाँ के आसपास के समुद्र में सुनामी का ख़तरा ज़्यादा होता है। जैसे ऑट्रेलियाई परत और यूरेशियाई परत जहां मिलती हैं वहां स्थित है सुमात्रा जो कि दूसरी तरफ फिलीपीनी परत से जुड़ा हुआ है। सुनामी लहरों का कहर वहां भयंकर रूप में देखा जा चुका है।

ज़रूरी नहीं कि हर भूकंप से सुनामी लहरें बनें

जब कभी भीषण भूकंप की वजह से समुद्र की ऊपरी परत अचानक खिसक कर आगे बढ़ जाती है, तो समुद्र अपनी समांतर स्थिति में ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है। जो लहरें उस वक़्त बनती हैं वो सुनामी लहरें होती हैं। इसकी एक मिसाल यह है कि धरती की ऊपरी परत फ़ुटबॉल की परतों की तरह आपस में जुड़ी हुई है या कहें कि एक अंडे की तरह से है जिसमें दरारें हों।

ज्वालामुखी विस्फोट के कारण सुनामी आने की घटनाएं बहुत कम होती हैं। भूकंप के कारण आने वाली सुनामी से इतर इस तरह की सुनामी में लोगों को सतर्क करने का कोई मौका नहीं मिलता है। राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो नुग्रोहो ने बताया कि ज्वालामुखी फटने के कारण समुद्र के नीचे सतह में हलचल हुई। पूर्णिमा की रात होने के कारण उठ रही ऊंची लहरों के साथ मिलकर यह हलचल बड़ी तबाही का कारण बन गई।

पहले सुनामी को समुद्र में उठने वाले ज्वार के रूप में भी लिया जाता रहा है लेकिन ऐसा नहीं है. दरअसल समुद्र में लहरे चाँद-सूरज और ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से उठती हैं, लेकिन सुनामी लहरें इन आम लहरों से अलग होती हैं.

नूग्रोहो का कहना है कि आमतौर पर इस शांत खाड़ी में सूनामी नहीं आती, और न ही क्रेकाटोआ ज्वालामुखी में बड़े विस्फोट होते रहे हैं. कुछ कम तीव्रता के भूकंप इस इलाक़े में ज़रूर आते रहे हैं.

नूग्रोहो ने बताया, "भूकंप की वजह से सुनामी नहीं आई है. सुनामी की असल वजह का पता करने में मुश्किल यही है, क्योंकि भूकंप नहीं आया."

ज्वालामुखी विशेषज्ञ जेस फिनिक्स ने बीबीसी से कहा कि जब ज्वालामुखी फटता है तो बेहद गर्म मैग्मा पानी के अंदर भारी हलचल पैदा करता है. ये समंदर के भीतर चट्टान को तोड़ सकता है, जिससे कभी-कभी बड़ा भूस्खलन हो सकता है.

इंडोनेशिया में सूनामी...
क्योंकि क्रेकाटोआ ज्वालामुखी का कुछ हिस्सा पानी के अंदर है तो संभव है कि पानी के अंदर भूस्खलन हुआ हो. अगर ये भूस्खलन बड़ा होगा तो बड़ी मात्रा में पानी को खिसकाने की क्षमता रखता है और ये सुनामी में तब्दील हो सकता है.

सभी सुनामी की तरह लहरों को तट तक पहुँचने में मिनटों या फिर घंटों का समय लग सकता है. चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और पूर्णिमा के कारण लहरें और ताक़तवर हो गई होंगी. ये भी सच है कि क्रेकाटोआ ज्वालामुखी पिछले कुछ महीनों में अधिक सक्रिय हुआ है.

इंडोनेशिया की भूगर्भीय एजेंसी का कहना है कि शुक्रवार को ज्वालामुखी में दो मिनट 12 सेकेंड तक विस्फोट हुआ और तकरीबन 400 मीटर राख का बादल आसमान में देखा गया. शनिवार को भी कुछ गतिविधियां देखने को मिली.

क्यों नहीं काम किया सूनामी अलार्म नेटवर्क ने
अगस्त 1883 में इंडोनेशिया में क्रेकाटोआ ज्वालामुखी ने भारी तबाही मचाई थी. तब 41 मीटर ऊँची सुनामी आई थी और 30 हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे. ये विस्फोट इतने जबर्दस्त थे कि इनकी ताक़त 1945 में जापान के हिरोशिमा शहर पर गिराए गए परमाणु बम से 13,000 गुना अधिक थी।


मेदिनी ज्योतिष किसी व्यक्ति विशेष का भूत, भविष्य और वर्तमान देखने में काम नहीं आता वरन इसे किसी बड़े भूभाग, देश अथवा दुनिया का भविष्य जानने के लिए काम में लिया जाता है। इसके आधारभूत सिद्धांत प्रचलित पारंपरिक ज्योतिष के ही समान है परन्तु इसमें ग्रहों की गणना से देश-विदेश का भाग्य जाना जाता है।
कैसे देखते हैं राष्ट्रों का भविष्य

इसमें भी जन्मकुंडली की ही तरह एक कुंडली बनाई जाती है जिससे सभी ग्रहों को अलग-अलग विभाग दिए जाते हैं, यथा सूर्य देश के राजा/ प्रधानमंत्री/ राष्ट्रपति, न्यायाधीश अथवा सर्वोच्च शासक का प्रतिनिधित्व करता है। इसी तरह चन्द्रमा उस देश में रहने वाली स्त्रियों तथा आम जनता की दशा बताता है। मंगल से देश में रहने वाले सैन्यकर्मी, पुलिसकर्मी, डॉक्टर तथा अन्य आपदाओं का अनुमान लगाया जाता है। बुध से मीडिया, मीडिया से जुडे व्यक्तियों तथा बौदि्धक कार्य करने वालों का भविष्य जाना जाता है जबकि गुरू से धार्मिक नेताओं, न्यायाधीशों, वकीलों, उद्योगपतियों, बैंकों तथा धर्म से जुड़े मुद्दों का भाग्य बांचा जाता है।

कुंडली के 12 घरों से पता लगता है क्या होगा देश में

हर कुंडली की तरह इस कुंडली में भी 12 घर (भाव) होते हैं। हर घर से अलग-अलग चीजों तथा घटनाओं का पता लगता है यथाः
कुंडली का पहला घर देश की जनता, स्थिति, देश का राज-काज, उन्नति तथा देश के नेताओं की सफलता को दर्शाता है।
दूसरे घर से देश की आर्थिक स्थिति, इकोनॉमी तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का भान होता है।
तीसरे घर से यातायात, संचार साधन, शेयर मार्केट, लेखक तथा अन्य चीजों का अनुमान लगाया जाता है।
चौथे घर से खेती, फसल, मौसम, खनिज, लोक निर्माण विभाग, जहाज उद्योग और विपक्षी दलों की स्थिति देखी जाती है।
पांचवे घर से मनोरंजन के साधन, शैक्षणिक संस्थान, देश के जन्म-मरण का हिसाब किताब तथा शेयर मार्केट का आंकलन किया जाता है।
छठे घर से देश में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों, सेना के शस्त्र, मजदूर वर्ग, विदेशी सहायता, कर्ज आदि का पता लगता है।
सातवें घर से विदेशों से संबंध, राजनैतिक एवं पुलिस कार्रवाई, देश में शांति या अशांति आदि का मालूम होता है।
आठवें घर से देश पर आने वाली प्राकृतिक आपदाएं तथा कठिनाईयों का अनुमान लगाया जाता है।
नवें घर से देश की आर्थिक, व्यापारिक, बौदि्धक प्रगति के साथ साथ देश के न्यायालयों तथा धर्म-कर्म का भी पता लगता है।
दसवें घर से देश की सरकार, सत्तारूढ़ पक्ष, अधिकारी, देश की सर्वोच्च संस्थाएं, देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, बैंक आदि की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है।
ग्यारहवें घर से संसद, विधानसभा तथा देश के कानून व्यवस्था का अनुमान होता है।
बारहवें घर से देश में कानून व्यवस्था, सरकार के विरूद्ध कार्य करने वाले, देश के षड़यंत्रकारी, अपराध आदि का पता लगता है।

मेदिनी ज्योतिष के सहारे काफी हद तक प्राकृतिक आपदाओं का न केवल सटीक अनुमान लगाया जा सकता है वरन उसे बचने के उपाय भी किए जा सकते हैं। भारतीय ज्योतिष को कई भागों में बांटा गया है। सभी भाग अलग अलग गणनाओं में काम आते हैं। इन्हीं में एक है मेदिनी ज्योतिष।

आकाश में स्थित सभी नौ ग्रहों में आकर्षण शक्ति है। यही आकर्षण शक्ति चंद्रमा में भी पाई जाती है। जिसके आधार पर ही चांद पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। चांद अपनी आकर्षण क्षमता के आधार पर ही पृथ्वी की चीजों को आकर्षित करता है। चंद्र और पानी दोनों सौम्य होने के कारण भी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि चंद्रमा समुद्र के पानी को अपनी ओर खींचता हैं। लेकिन पृथ्वी की चीजों को अपनी ओर आकर्षित करने की शक्ति चांद के आकर्षण से कहीं गुना अधिक है। इसलिए समुद्र के पानी को पृथ्वी अपनी ओर थामे रहती है। पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा का बल अधिक बढ़ जाता है। जिसके कारण ही ये समुद्र के पानी को तेजी से अपनी ओर खींचता हैं। जिसकी वजह से समुद्र की लहरें तेजी से ऊपर की ओर उठती है और ज्वारा भाटा निर्मित करती हैं।

समुद्र से उत्पन्न हुई ये लहरें कभी-कभी इतनी विशाल और शक्तिशाली हो जाती हैं। कि सामान्य जनजीवन को भी अपनी चपेट में ले लेती हैं। समुद्र की सीमा का लंघन करती हुई ये लहरें धरती पर अपना प्रभाव छोड़ने लगती हंै। ऐसी ही उत्पन्न होती लहरों ने 26 दिसंबर 2004 को भारत में अपने पैर पसारे थे। समुद्र की सीमा को तोड़ती हुई इन लहरों ने जंगलांे, सड़कों की सीमा को पार कर लोगों के घरों में प्रवेश पा लिया था।
आपको ध्यान होगा कि भारत में सुनामी ने 26 दिसंबर 2004 को कदम रखे थे। उस दिन पूर्णिमा तिथि होने के कारण चांद अपने पूरे आकार में था। चांद का आकर्षण बल भी उस दिन अन्य दिनों के मुकाबले अधिक था। पृथ्वी के दक्षिणायन रहने से चांद का बल अधिक प्रभावशाली था। समुद्र की लहरों का अधिक ऊंचाई तक जाना चांद के अधिक बली होने के कारण हो सकता है।
सुनामी सिसमोग्राफ पर दर्ज दुनिया का तीसरा बड़ा टाइड्स है। इतिहास में दर्ज सबसे घातक प्राकृतिक आपदा है जिसके कारण दुनिया के चौदह देशों के लगभग 2,30,000 लोगों की मृत्यु हुई थी। समुद्र के इस तूफान की तरंगें 100 फुट ऊंचाई तक गई थीं।

पूर्णिमा पर क्यों नहीं करना चाहिए किसी से बहस

पूर्णिमा को चांद के बढ़ने से जहां ब्रह्मांड में ज्वारभाटा जैसी खगोलीय घटना अधिक तेजी से होती है। वहीं वातावरण में बहने वाली तरंगें उस दिन मनुष्य के व्यवहार को भी उग्र कर सकती हैं। मनुष्य के मन में भी कई तरह की उथल - पुथल चलती रहती है। चंद्रमा मन का स्वामी होता है। चांद का बल पूर्णिमा को बढ़ जाने के कारण ही मन की उथल - पुथल  बढ़ सकती है। यदि व्यक्ति किसी तनाव में है तो यह तनाव उस दिन और ज्यादा बढ़ सकता है। 

पूर्णिमा के दिन समुद्र में क्यों उत्पन्न होता है ज्वार-भाटा ??

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहते है। वर्ष में ऐसे कई महत्वपूर्ण दिन और रात हैं जिनका धरती और मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उनमें से ही सबसे महत्वपूर्ण दिन है पूर्णिमा।
चांद का धरती के जल से संबंध है। जब पूर्णिमा आती है तो समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है, क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है। मानव के शरीर में भी लगभग 85 प्रतिशत जल रहता है। पूर्णिमा के दिन इस जल की गति और गुण बदल जाते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन चन्द्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है इन कारणों से शरीर के अंदर रक्‍त में न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक रहता है। एक बार नहीं, प्रत्येक पूर्णिमा को ऐसा होता रहता है तो व्यक्ति का भविष्य भी उसी अनुसार बनता और बिगड़ता रहता है। पूर्णिमा की रात मन ज्यादा बेचैन रहता है और नींद कम ही आती है।

कमजोर दिमाग वाले लोगों के मन में आत्महत्या या हत्या करने के विचार बढ़ जाते हैं। जिन्हें मंदाग्नि रोग होता है या जिनके पेट में चय-उपचय की क्रिया शिथिल होती है, तब अक्सर सुनने में आता है कि ऐसे व्यक्‍ति भोजन करने के बाद नशा जैसा महसूस करते हैं और नशे में न्यूरॉन सेल्स शिथिल हो जाते हैं जिससे दिमाग का नियंत्रण शरीर पर कम, भावनाओं पर ज्यादा केंद्रित हो जाता है।

ऐसे व्यक्‍तियों पर चन्द्रमा का प्रभाव गलत दिशा लेने लगता है। इस कारण पूर्णिमा व्रत का पालन रखने की सलाह दी जाती है। पूर्णिमा और अमावस्या के प्रति बहुत से लोगों में डर है। इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं। जानकार लोग तो यह कहते हैं कि चौदस, पूर्णिमा और प्रतिपदा उक्त 3 दिन पवित्र बने रहने में ही भलाई है।

Post a Comment

0 Comments