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सरकारी स्कूल की दिशा और दशा सुधारने में जुटा है एक शिक्षक, समाज का असली हीरो दिनेश वैष्णव

केकड़ी पंचायत समिति की मोलकिया ग्राम पंचायत में स्थित मण्डा गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक पद पर दिनेश वैष्णव ने अभी 6 माह पूर्व ही 5 जून 2018 को कार्यभार ग्रहण किया था। जब उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया तब स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की हालत अच्छी नहीं थी और विद्यालय के भवन की स्थिति काफी जीर्ण-शीर्ण थी । तब उन्हें लगा कि विद्यालय के लिए कुछ करना चाहिए । सर्वप्रथम जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंचे विद्यालय की टूट-फुट सही करने का निर्णय लिया, अब बात थी फण्ड की तो सर्वप्रथम उन्होंने अपनी बेटी यशस्वी वैष्णव के प्रथम जन्मदिन पर कोई पार्टी वगेरह नही करके उस राशि को बचाकर लगभग दस हजार रुपये खर्च कर विद्यालय के एक कक्ष को शिशुवाटिका के रूप में विकसित करवाया, ताकि बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जागृत हो । 

इसके बाद बून्दी निवासी बड़ी बहन श्रीमती लीला देवी वैष्णव ने भी अपने जन्मदिन पर 11000 हजार रुपये दिए । तत्पश्चात विद्यालय की शिक्षिका सुश्री सुनिता चौधरी ने भी अपने दादाजी की स्मृति में 5100 रुपये दिए । प्रधानाध्यापक भगवानलाल जी जाट ने भी 1700 रुपये का सहयोग किया । ये देखकर अन्य लोग भी आगे आये । इस विद्यालय को पूरे देश भर के अनेक स्थानों के साथ ही विदेश (पश्चिमी अफ्रीका के टोगो देश की राजधानी लोम) से भी सहायता मिली । वही खो-खो की राष्ट्रीय खिलाड़ी मनीषा खण्डेलवाल ने प्रतिमाह विद्यालय को 500 रुपये देने का निर्णय किया अब तक विभिन्न भामाशाहों की मदद से कुल 90540 रुपये की सहायता विद्यालय को मिल चुकी है । 


युवा शिक्षक ने इन छह महीनों में सरकारी स्कूल की सूरत ही बदल दी वहीं पढ़ने वाले बच्चों का रहन सहन ही बदल गया। बच्चे साफ सफाई पर ध्यान देने लगे। बच्चे रोजाना नहा धोकर साफ सुथरी यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल आने लगे, बच्चों में शिक्षा के प्रति लगाव बढ़ने लगा। शिक्षक दिनेश वैष्णव ने सबसे पहले जनसहयोग से जीर्ण शीर्ण स्कूल भवन की मरम्मत करवाकर रंग रोशन करवाया। गांव के जरूरतमंद बच्चों को स्टेशनरी, शिक्षा की ओर ध्यान आकर्षित करने वाले खिलौने, गणवेश व स्वेटर आदि उपलब्ध करवाए। वहीं बच्चों को साफ सुथरा रहने के लिए प्रेरित किया। कुछ दिनों बाद ही बच्चों का रहन सहन ही बदल गया। शिक्षक दिनेश ने स्वयं अपने खर्च पर स्कूल के एक कक्षा कक्ष को शिशु वाटिका के रूप में विकसित किया ताकि छोटे छोटे बच्चों में शिक्षा के प्रति अलख जगा सकें। उन्होंने इस तरह सरकारी स्कूल की सूरत एक निजी स्कूल में बदल दी। स्कूल की हर कक्षा में ब्लेक बोर्ड की जगह व्हाइट मार्कर बोर्ड लगाए गए। बच्चे जहां जमीन पर बैठते थे उनके बैठने के लिए ग्रीन मेटिंग बिछाई गई। 

कक्षा के बाहर बरामदे को भारत दर्शन गलियारे के रूप में विकसित किया गया है ताकि बच्चों को भारत की पहचान हो सके। कक्षा कक्षों के बाहर खाली दीवारों सहित गलियारे में देश से जुड़ी प्रमुख बातों का समावेश किया गया है। इसमें भारत के गौरव की श्रृंखला में महापुरुषों के चित्र व वॉल पेंटिंग्स के रूप में भारत के गौरवशाली इतिहास की जानकारी जैसे राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, नदियों के उद्गम स्थान, विभिन्न राज्यों की राजधानी, वहां की भाषा महत्वपूर्ण दिवस जैसी कई जानकारियों का समावेश किया गया। बरामदे के पिलर्स पर राष्ट्रीय प्रतीक, ध्वज, चिन्ह, पशु, पक्षी, वृक्ष तथा खेलकूद के चित्र वॉल पेंटिंग्स के रूप में उकेरें गये हैं। इसके अलावा जनसंख्या, क्षेत्रफल, साक्षरता, लिंगानुपात, स्थलीय व जलीय सीमा, पड़ोसी देश, राजधानियां व ऐतिहासिक इमारतों से सम्बंधित जानकारियां भी समावेश की गई है। 

इसी प्रकार बच्चों में हाजरी के समय यस सर जैसी संस्कृति के स्थान पर वन्देमातरम का सम्बोधन शुरू किया गया है। कहते हैं न कि इरादे नेक हों और कुछ करने का जज्बा दिल मे हो तो मुश्किल से मुश्किल काम को भी आसानी से किया जा सकता है। दिनेश के हौसले को बढ़ने के लिए इस पोस्ट को सिर्फ लाइक ही नहीं शेयर और कमेंट भी जरूर करे| शिक्षक दिनेश के जज्बे को वैष्णव चैनल प्रणाम करता है उनकी जितनी तारीफ की जाए कम होगी। दिनेश को ये सुसंस्कार अपने परिवार से मिले हैं। यही वजह है कि वे ग्रामीण परिवेश के बच्चों को भी संस्कारवान बनाने के लिए कुशलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। दिनेश केकड़ी निवासी बिरदीचंद वैष्णव के सुपुत्र हैं। बिरदीचंद वैष्णव ने शारीरिक शिक्षक के रूप में विभिन्न स्कूलों में अपनी कुशल कार्यशैली से गांवो के स्कूल के बच्चों में खेल के प्रति रुचि बढ़ाई वहीं शिक्षा के प्रति भी अलख जगाया। आज दिनेश वैष्णव अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणा नायक बन गए हैं।








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