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“द एक्सीडेंटल पीएम” राजनैतिक विषय पर बनी एक असाधारण फिल्म

Karan Nimbark:Mumbai:




‘महाभारत में दो परिवार थे, यहाँ एक ही है ।’ संजया बारू की पुस्तक “द एक्सीडेंटल पीएम” पर आधारित चलचित्र “द एक्सीडेंटल पीएम” राजनैतिक विषय पर बनी एक असाधारण फिल्म है । हालाँकि यह फिल्म राजनीति के गलियारों में विभिन्न प्रतिक्रियाएँ समेटेगी । सामान्यतः राजनीति पर बनी फिल्म कई बार उबाऊ सी हो जाती है लेकिन यदि भारतीय राजनीति की बात करे तो यहाँ भी मनोरंजन ढूँढा जा सकता है । वैसे यह फिल्म अन्य फिल्मों से बिलकुल अलग है । अंग्रेजी और उस तरह की काल्पनिक फिल्मों के दीवाने इस समीक्षा को ना ही पढ़ें तो अच्छा है क्योंकि शायद, यह फिल्म उनकी समझ से परे है ।

मैंने डॉ. मनमोहन सिंह का सदैव आदर किया है और यह फिल्म देखने के पश्चात तो उनके प्रति आदर व सहानुभूति और भी बढ़ गई है । जो बात संसार को, आम लोगों को दिख सकती है वह बात इन नेताओं की पूजा करने वालों को क्यों नहीं दिखती ? यदि आपने मेरी अन्य फिल्मों के लिए समीक्षा पढ़ी होगी तो जानते होंगे कि मैं फिल्म की कहानी और पटकथा पर अधिक ज्ञान नहीं देता क्योंकि वह तो आपको फिल्म देखकर ही ज्ञात होनी चाहिए । जो राजनीति को पसंद करते हैं या समझ रखते हैं उन्हें शायद यह फिल्म बहुत पसंद आए । मुझे व्यक्तिगत तौर पर एक पल के लिए नहीं लगा कि मैं कोई पुस्तक का नाटकीय रूपांतरण देख रहा हूँ । 

ऐसा लग रहा था मानो दस सालों से दिल्ली के राजनीति के गलियारों में लगे हुए सीसीटीवी से सीधा प्रसारण देखता आया हूँ । हालाँकि मुझे ऐसा लगता है कि बहुत से तथ्य होंगे जो पुस्तक तक ही रह गए, फिल्म तक नहीं पहुँच पाए, कारण जो भी हो । फिल्म का छायांकन बहुत ही सुन्दर है । निर्देशन की जितनी प्रशंसा की जाए कम ही है । अन्य सभी कलाकारों ने भी बहुत शानदार अभिनय किया है । अनुपम खैर को एक अरसे के बाद अपनी प्रतिभा दिखाने का ऐसा सुनहरा अवसर मिला है और जिसमें इन्होंने बड़ी निष्ठा से काम किया है । अक्षय खन्ना एक अच्छे अभिनेता तो है ही पर इस फिल्म में तो जैसे कुछ अलग ही बात देखने मिली । पूरे चलचित्र में अनुपम खैर के हाव-भाव और अक्षय खन्ना की संवाद अदायगी ही छाई रही । करन निम्बार्क इस फिल्म के लिए पाँच में से चार (****/*****) सितारे देते हैं ।     

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