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तिलक और बिंदी का वैज्ञानिक कारण यह है: पं. अभिषेक जोशी



तिलक और बिंदी का वैज्ञानिक कारण यह है कि  तिलक या बिंदी कुमकुम, चन्दन, गोपी चन्दन, केशर या भस्मी की होती है। यह मुख्य रूप से केवल आज्ञा चक्र पर ही लगाया जाता है ।

आज्ञा चक्र पर 32 कोशिकाएं सक्रिय है यही 32 कोशिकाएं अनामिका व अंगुष्ठ में भी है। जिनके द्वारा तिलक लगाया जाता है।

कुमकुम - हल्दी व चुने के मिश्रण से बनाया जाता है। हल्दी जहां एंटीबायोटिक होकर आज्ञा चक्र को शुद्ध करती है वहीं चुने का कैल्शियम उसे जागृत करने में सहायक होता है। ज्ञान प्राप्ति की अभिलाषा वाले को कुमकुम का तिलक करना चाहिए।

चन्दन या गोपी चन्दन शीतलता लिये होता है जिसे क्रोध अधिक आता हो, दिमाग गर्म रहता है उसे चन्दन तिलक करना चाहिये।

केशर - गर्म रहती है जिसका मस्तिष्क सुस्त रहता है काम मे उदासीनता रहती है वह केशर का तिलक करें।

भस्मी - सभी रोम कूपों को रोगाणुओं से बचाती हुई इंद्रिय विकारों को नियंत्रित करने का कार्य करती है। इसलिये भस्म से त्रिपुंड तिलक धारण किया जाता है । इसमे फिर अलग अलग उंगलियों ओर अंगूठे से किसे तिलक होता है यह भी वर्णन है। इसी तरह प्रत्येक 16 श्रृंगार का वैज्ञानिक महत्व है ।समस्या यह है कि हम उन वैज्ञानिक तथ्यों को समझ नही पाए ओर धर्म मानकर ढकोसला मान लिया।

                                                     पं. अभिषेक जोशी
                                                        99299 78802

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