जब जिन्दगी हो जाए डॉट कॉम

करन निम्बार्क


सुबह की किरणों के साथ लोगों की दिनचर्या शुरू हो जाती है । लेकिन पहले की तरह अब सुबह नहीं होती, चाय की चुस्कियों के साथ, बगीचे में दौड़ के साथ, भगवान के दर्शन के साथ । अब तो सुबह होती है व्हाट्सअप, इन्स्टा और फेसबुक के साथ । दिन काम में बीतता है और रात कमेंट्स में । अरसा हो गया बच्चों को खेलते समय झगड़ते हुए । किसी की खिड़की का शीशा तोड़ते हुए और पड़ोसी के पेड़ से फल चुराते हुए । 


अब तो सारे बच्चे अपने मोबाइल में व्यस्त रहते हैं । घर हो, पाठशाला हो या गली-मोहल्ले में बैठे हों, सबके शीश झुके हुए, आँखें स्क्रीन में डूबी हुईं । क्या कभी सोचा है आज बच्चे, युवा सभी ने एक ही छत के नीचे अपनी एक अलग ही दुनिया बसा ली हो उनके पारस्परिक जीवन और रिश्तों पर क्या असर पडेगा ? एक ऐसी कृत्रिम दुनिया में अपना समय और ऊर्जा गँवा रहे हैं कि अंततः कुंठा, तनाव के अलावा हाथ कुछ नहीं आता । 

कुछ ऐसे ही महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर नृत्य और कहानी के अनोखे संगम को लेकर आ रहे हैं निर्देशक संदीप चवाण, नृत्य निर्देशिका शिल्पा गणात्रा के संग “जिन्दगी डॉट कॉम” । १९ अप्रैल २०१९ को होने वाली एकांकी में “यूथ झोन नृत्य अकादमी” के बच्चों ने भाग लिया है और इस गंभीर विषय को, कुछ सवालों को आपके सामने रखा है ।अधिक जानकारी के लिए आप 9920665501 / 8850959601 पर संपर्क कर सकते हैं । 

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