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एक तरफ आंसुओं के समंदर तो, दूसरी तरफ जख्मों की गहरी खाई:युवाकवि अरमान राज़


वादियों की रौनक भी,
  फीकी पड़ गयी जब देखा।।
एक तरफ आंसुओं के समंदर तो,
  दूसरी तरफ जख्मों की गहरी खाई।।।

समेटे हुए खुद को ताबूत में तो क्या,
  हर ताबूत में एक भारत चला है।।
40 सपूत 40 चिताएं 40 भारत,
  हर चिता में एक भारत जला है।।।

आंसुओं की अर्थी पर पड़े आधेे अधूरे शव,
  हर उस टुकड़े में एक भारत जला है।।
चिंगारी मात्र से पनपी क्रोधाग्नि में,
  एक बार फिर पूरा भारत जला है।।।

एक एक टुकड़ा हर फौजी का,
  अपने में ही इतिहास समेेट चला है।।
अखंड भारत का सपना देखने वालों,
  एक एक टुकड़ा भारत को एक कर चला है।।।

कौन है हिन्दू कौन है मुसलमान,
  कौन है सिक्ख और कौन है ईसाई।।
कौन धर्म होता है शहादत का,
  हर शहादत को मिलती है तिरंगे की रंगाई।।।

धन्य है वो कोख जिससे जन्म लेते हैं,
  ये हर पल मर कर भी जीने वाले।।
जानता है हर सैनिक की शहीद होना ही है,
  फिर भी सीमा को चहुँ ओर से एक कर चला है।।।
युवाकवि अरमान राज़

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