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अब Aadhaar के बिना भी होंगे ये काम, राष्ट्रपति ने लगाई मुहर

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आधार (Aadhaar) कानून में बदलावों को लेकर लाए गए अध्यादेश पर मुहर लगा दी है. इसके तहत अब कुछ कामों के लिए आधार देने की अनिवार्यता खत्म हो गई है और इसके स्वैच्छिक इस्तेमाल को मंजूरी मिल गई है. यानी अगर आधार धारक चाहे तो इन कामों के लिए आधार दे वर्ना किसी और ID से काम करा सकता है.

बता दें कि सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवै​धानिक वैधता को बरकरार रखा था लेकिन कई चीजों के लिए आधार की अनिवार्यता को खत्म कर दिया था. कोर्ट ने सरकार को आधार के स्वैच्छिक इस्तेमाल के लिए आधार कानून में बदलाव लाने का आदेश दिया था. आइए जानते हैं कि वे कौन से काम हैं जो आप अब आधार दिए बिना भी कर सकते हैं…

बैंक अकाउंट खोलना और मोबाइल सिम लेना

अब बैंक खाता खुलवाने और मोबाइल सिम कार्ड लेने के लिए आधार का ID कार्ड के तौर पर स्वैच्छिक इस्तेमाल किया जा सकेगा. अध्यादेश में सुनिश्चित किया गया है कि इन दोनों कामों के लिए आधार पेश नहीं करने की स्थिति में किसी भी सेवा को उपभोक्ता को देने से इंकार नहीं किया जा सकता है. अध्यादेश में किसी व्यक्ति द्वारा ऑथेंटिकेशन के लिए दी गई बायोमेट्रिक डिटेल्स और आधार नंबर का सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा अपने पास जमा रखे जाने को प्रतिबंधित किया गया है.

प्राइवेट कंपनियां नहीं मांग सकतीं Aadhaar

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक प्राइवेट कंपनियां आधार कार्ड की मांग नहीं कर सकती हैं. अध्यादेश के जरिए भी आधार कानून की धारा 57 को हटा दिया गया है. यह धारा निजी कंपनियों, इकाइयों द्वारा आधार के इस्तेमाल से जुड़ी है. प्राइवेट कंपनियों के पास अब बिल्कुल ये हक नहीं है कि वे वेरिफिकेशन के लिए आधार डेटा का इस्तेमाल करें.

नियमों के उल्लंघन पर 1 करोड़ तक जुर्माना

अध्यादेश के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले निकायों पर एक करोड़ रुपये तक का आर्थिक जुर्माना और अनुपालन नहीं करना जारी रखने की स्थिति में प्रति दिन 10 लाख रुपये के अतिरिक्त जुर्माने का प्रावधान है. आधार के अवैध इस्तेमाल की स्थिति में तीन साल तक की कैद और 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया है. यदि अवैध इस्तेमाल करने वाला निकाय कोई कंपनी हुई तो जुर्माना एक लाख रुपये तक हो सकता है.

बच्चे का स्कूल एडमिशन

सुप्रीम कोर्ट और UIDAI दोनों ही यह स्पष्ट कह चुके हैं कि बच्चों के स्कूल एडमिशन के लिए आधार अनिवार्य नहीं है. लिहाजा आधार नहीं देने की स्थिति में किसी भी बच्चे को एडमिशन देने से मना ​नहीं किया जा सकता. न ही बच्चे को आधार के अभाव में किसी स्कीम का लाभ लेने से वंचित किया जा सकता है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट का यह भी आदेश था कि CBSE, NEET, UGC परीक्षाओं के लिए भी आधार अनिवार्य नहीं है, इसलिए स्टूडेंट्स को आधार नहीं होने की स्थिति में इनमें शामिल होने से नहीं रोका जा सकता.

18 साल का होने पर Aadhaar छोड़ने का ऑप्शन

अध्यादेश के जरिए आधार कानून में यह बदलाव भी किया गया है कि कोई भी बच्चा 18 साल का हो जाने के बाद आधार प्रोग्राम से बाहर निकलने का विकल्प चुन सकता है. इसके तहत नागरिक के आधार छोड़ने के बाद उसका नाम आधार डाटा हट जाएगा और उसका सारा डेटा भी हमेशा के लिए डिलीट कर दिया जाएगा.
हालांकि ऐसा सरकारी सब्सिडी लेने वाले और PAN धारक नहीं कर पाएंगे. इसकी वजह है कि आधार छोड़ने के बाद नागरिक को सब्सिडी नहीं मिलेगी. वहीं अभी भी PAN बनवाने के लिए आधार जरूरी है और बाद में PAN-आधार लिंकिंग भी जरूरी है. इसकी वजह है कि इनकम टैक्स रिटर्न भरने में आधार-PAN लिंंकिंग काम आती है और इस लिंकिंग के बिना रिटर्न नहीं भरा जा सकता. इस बात पर सुप्रीम कोर्ट मुहर लगा चुका है. नागरिकों को आधार-PAN लिंकिंग के लिए 31 मार्च 2019 तक का वक्त दिया गया है.

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