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चैत्र नवरात्र के नौ दिन में पांच बार बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग


छह अप्रैल 2019 को रेवती नक्षत्र में शुरू होगी देवी की आराधना...
चैत्र नवरात्र के नौ दिन में पांच बार बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग...

इस वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर छह अप्रैल 2019 (शनिवार) से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होकर  14 अप्रैल, (रविवार) को  इस नवरात्रि का समापन होगा।

पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि इस चैत्र नवरात्र की तिथियों में विशेष संयोग बना है। नौ दिन में पांच बार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इसके अलावा दो बार रवियोग एवं एक दिन रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग है। ज्योतिर्विदों के अनुसार इस बार आठ विशेष योग के कारण नवरात्र में देवी की आराधना को सर्वोत्तम फलदायी माना जा रहा है। उदयकाल में रेवती नक्षत्र का योग साधना एवं सिद्धि में अधिक फल प्रदान करेगा। 

इस वर्ष घट स्थापना का शुभ मुहूर्त समय 6 अप्रेल 2019 को घटस्थापना मुहूर्त प्रात: 6 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 5 अप्रैल दोपहर 2 बजकर 40 मिनट पर शुरू होगा और प्रतिपदा तिथि 6 अप्रैल दोपहर 3 बजकर 23 खत्म होगी। इसके पश्चात अभिजित मुहुर्त में भी स्थापना की जा सकती है।

ये रहेंगी चैत्र नवरात्र 2019 की तिथि --
पहला नवरात्र, प्रथमा तिथि, 6 अप्रैल 2019, दिन शनिवार
दूसरा नवरात्र, द्वितीया तिथि  7 अप्रैल 2019, दिन रविवार
तीसरा नवरात्रा, तृतीया तिथि, 8 अप्रैल 2019, दिन सोमवार
चौथा नवरात्र, चतुर्थी तिथि, 9 अप्रैल 2019, दिन मंगलवार
पांचवां नवरात्र , पंचमी तिथि , 10 अप्रैल 2019, दिन बुधवार
छठा नवरात्रा, षष्ठी तिथि, 11 अप्रैल 2019, दिन बृहस्पतिवार
सातवां नवरात्र, सप्तमी तिथि , 12 अप्रैल 2019, दिन शुक्रवार
आठवां नवरात्रा , अष्टमी तिथि, 13 अप्रैल 2019, दिन शनिवार
नौवां नवरात्र नवमी तिथि 14 अप्रैल, दिन रविवार
यदि नवरात्र में विशेष योग पड़ जाएं तो फिर क्या कहने। जी हां. इस बार सर्व कार्य सिद्धि करने के लिए मां आ रही हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार माता को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा अवसर रहेगा।


नौ दिवसीय पर्वकाल में पांच बार सर्वार्थ सिद्धि और दो बार रवियोग का होना भी विशेष महत्व रखता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार ऐसे योगों में देवी साधना का विशेष फल प्राप्त होता है। धन तथा धर्म की वृद्धि होती है।

इसलिए बने सर्वोत्तम मुहूर्त--

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि रेवती नक्षत्र पंचक का पांचवां नक्षत्र है। इस नक्षत्र का शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर उदयकाल से करीब 45 मिनट तक रहना तंत्र साधना की दृष्टि से श्रेष्ठ है। रेवती नक्षत्र का स्वामी पुषा है, जो ऋग्वेद के अन्यदेवताओं में से एक है। इसलिए यह नवरात्रि यंत्र, तंत्र एवं मंत्र सिद्धि के लिए विशेष मानी जा रही है।नौ दिनों तक चलने नवरात्र पर्व में माँ दुर्गा के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री देवी की पूजा का विधान है. नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों में लोग नियमित रूप से पूजा पाठ और व्रत का पालन करते हैं. दुर्गा पूजा के नौ दिन तक देवी दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ  इत्यादि धार्मिक किर्या पौराणिक कथाओं में शक्ति की अराधना का महत्व व्यक्त किया गया है. इसी आधार पर आज भी माँ दुर्गा जी की पूजा संपूर्ण भारत वर्ष में बहुत हर्षोउल्लास के साथ की जाती है.

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