मन मेरा हिचकोले खा लिया करता था।, ये उन दिनों की बात है:युवाकवि अरमान राज़


अक़्सरकर अक्स से खुद के,
  मैं कुछ गुफ़्तगू कर लिया करता था।।
ये उन दिनों की बात है...
जब मेरी ही परछाइयों में,
  तुम्हारी ज़ुस्तज़ू कर लिया करता था।।।

समझ कर ज़ुल्फें तुम्हारी,
  मैं घटाओं को सँवार लिया करता था।।
ये उन दिनों की बात है
जब ख़ुद गिरता था लड़खड़ा कर,
  पर तुम्हे संभाल लिया करता था।।।

वास्तविक सी लगती फिर भी,
  एक कल्पना ही हो तुम अब।।
ये उन दिनों की बात है...
जब जान कर कल्पना कोरी तुम्हें,
  ख़ुद में तलाश लिया करता था।।।

अरमान की उमड़ती की लहरों में,
  मन मेरा हिचकोले खा लिया करता था।।
ये उन दिनों की बात है...
जब छू कर जाती सर्द हवाओं के एहसास में,
  मैं तुझे महसूस कर लिया करता था।।।

जब नहीं था तुम्हारा मैं,
  फिर भी तुम्हें पा लिया करता था।।
ये उन दिनों की बात है...
जब शांत सी तुम्हारी मुस्कानों संग,
  एक पल में बरसों जी लिया करता था।।।

ये उन दिनों की बात है।।।

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