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शृंगार कक्ष(ड्रेसिंग रूम) कैसा हो?


                 

 हमारी भारतीय संस्कृति सौन्दर्य बोधयुक्त है इसीलिए इसमेँ 'सत्यं शिवं सुंदरं' तत्वोँ का समावेश स्वयमेव हो जाता है। इसलिए आंतरिक सौंदर्य को हमने प्रधानता दी है और बाह्य सौंदर्य को गौण माना है लेकिन यह तथ्य भी सत्य है कि बाह्य सौंदर्य भी आंतरिक सौंदर्य से ही प्रभावित होता है।

अतः यदि हम वास्तुशास्त्रीय नियम को ध्यान मेँ रखकर सौँदर्यबोध के भाव को स्वर देँ तो निश्चित ही बाह्य सौँदर्य जिसे बनाव शृंगार कहा जाता है, द्विगुणित हो उठेगा। वैसे भी व्यक्तित्व का पहला प्रभाव बाह्य सौंदर्य यानी ओढ़ना पहनना और बनाव शृंगार का पड़ता है।

इसलिए प्रायः हर आदमी या औरत अपनी साज सज्जा के प्रति सजग रहते हैँ।
घर से निकलने से पहले तो ऐसा करना प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। साज सज्जा बनाव शृंगार से जीवन मेँ आनंद भी आता है। आपकी साज सज्जा और बनाव शृंगार मेँ आपके शृंगारकक्ष यानी dressing room की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
                             
भारतीय वास्तुशास्त्र मेँ ड्रैसिँग रूम की विस्तृत चर्चा है पर, अफसोस आधुनिक युग मेँ यह केवल ड्रैसिँग टेबल तक ही सिमट कर रह गया है।
जैसे अन्य कमरे बैडरूम, बाथरूम, रीडिँगरूम, ड्राइंगरूम आदि महत्त्वपूर्ण हैँ, वैसे ही ड्रसिँगरूम का घर मेँ एक विशेष स्थान है।            यदि आप अपने ड्रैसिँग रूम को यदि वास्तु नियमोँ के अनुसार बनाते हैँ तो निश्चित तौर पर इसका प्रभाव आपमेँ जीवन के प्रति सौंदर्य बोध तो देगा ही सौभाग्य एवं समृद्धिकारक भी होगा। इसलिए ड्रैसिँगरूम के विषय मेँ इतना ध्यान अवश्य रखेँ कि आपका ड्रैसिँगरूम आपके शयनकक्ष के स्नानागार के साथ हो।यह नैऋत्य मेँ हो।

 ड्रैसिँग टेबल को बैडरूम की पूर्वी या दक्षिणी दीवार के साथ रख सकते हैँ। ड्रैसिंग टेबल को कवर करती उपर एक दूधिया ट्यूब लाईट हो जिससे चेहरा एकदम साफ नजर आए। अंततः यह जरूर ध्यान रखेँ कि रात को सोने से पहले शीशा पर्दे से जरूर ढकेँ जिससे बैडरूम पर इसका दुष्प्रभाव न पड़े।

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