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भारतवंशी डॉक्टर नीरज देसाई ने पहली बार एक जीवित एड्स पीड़ित की किडनी दूसरे को लगायी

एजेंसी,बाल्टीमोर:
अमेरिका में मेडिकल क्षेत्र का पहला अनोखा अंग प्रत्यारोपण हुआ है। डॉक्टरों की एक टीम ने जॉन हॉपकिंस अस्पताल में एक 35 वर्षीय महिला एड्स पीड़ित की किडनी दूसरे एड्स पीड़ित को प्रत्यारोपित की है। इससे पहले मर चुके एड्स रोगी के अंगों का ही प्रत्यर्पण होता था।
निना मार्टिनेज ने एक पहल करते हुए अपनी किडनी दान करने का मन बनाया। आमतौर पर एड्स पीड़ित के लिए एक किडनी पर जीना मुश्किल होता है लेकिन निना का एचआईवी पूरी तरह नियंत्रित है और उनका शरीर एक किडनी पर काम करने में सक्षम है। जॉन हॉपकिंस अस्पताल में सोमवार को सर्जनों की एक टीम ने निना की किडनी एक अन्य एचआईवी पॉजिटिव मरीज को लगा दी। इस टीम में भारतवंशी डॉक्टर नीरज देसाई प्रमुख थे। दोनों स्वस्थ हैं और अभी 10 से 15 दिनों तक सघन निगरानी में रखा जाएगा। 

जानलेवा बीमारी वाले भी देने लगेंगे ‘जीवनदान’
निना कहती हैं कि उनकी बीमारी जानलेवा है। एक दौर था जब इससे पीड़ितों को मरने वाला माना जाता था। लेकिन आज किडनी दान कर उन्हें लगता है कि इस जानलेवा बीमारी से पीड़ित होने के बाद भी वह किसी को जीवनदान दे सकती हैं। निना को जन्म के तुरंत बाद एचआईवी संक्रमण हुआ था। निना कहती हैं कि इससे विचारधारा बदलेगी और एचआईवी पीड़ित भी जीवित रहते हुए अंगदान करने को आगे आएंगे। 
-11 लाख लोग एचआईवी पीड़ित हैं अभी 
-116 अंगदान हुए एचआईवी से मरने वाले लोगों के 2016 तक 
-1.52 लाख किडनी प्रत्यारोपित हुई हैं बीते तीन दशक में 
-1.13 लाख लोग अमेरिका में अंगदान के लिए प्रतीक्षा सूची में हैं
मरीज को जीवनदान मिला: नीरज देसाई
सफल किडनी प्रत्यारोपण करने वाले सर्जन नीरज देसाई कहते हैं कि इस सर्जरी से मरीज को नया जीवन मिला है। नीरज ने बताया कि जीवित व्यक्ति से किडनी मिलना मृतक की तुलना में अधिक लाभकारी है। उन्होंने कहा कि आम तौर पर प्रत्यारोपित किडनी 10 से  15 साल तक सही ढंग से काम करती है। वहीं जब इसे जीवित व्यक्ति से प्रत्यारोपित किया जाता है तो यह इससे अधिक दिन तक काम करती है।

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