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फरीदाबाद के पत्रकारों की अवैध गिरफ्तारी पर हरियाणा के पूर्व डीजीपी, कमिश्नर सहित कई पुलिस अधिकारियों को हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस

पत्रकारों की अवैध गिरफ्तारी पर हरियाणा के पूर्व डीजीपी, कमिश्नर सहित कई पुलिस अधिकारियों को हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस

- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उल्लंघना कर पत्रकारों की गिरफ्तारी करना महंगा पड़ा पुलिस अधिकारियों को, हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस

चंडीगढ़ । फरीदाबाद के तीन वरिष्ठ पत्रकारों के खिलाफ गैर-कानूनी तरीके से मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करना हरियाणा पुलिस के पूर्व डीजीपी बी एस संधू, हिसार रेंज के आईजी अमिताभ सिंह ढिल्लों एवं एसपी विजिलेंस सुखबीर सिंह पहलवान, सहित कई पुलिस अधिकारियों को मंहगा पड़ गया। पीड़ित पत्रकारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उपरोक्त संबंधित सभी पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर अवमानना के  नोटिस जारी करके 23 मई तक जवाब मांगा है।

 गौरतलब है कि फरीदाबाद के तीन पत्रकारों नवीन धमीजा, नवीन गुप्ता और संजय कपूर ने 15 अप्रैल, 2018 को अपने ऑनलाईन वेब न्यूज पोर्टलों पर हरियाणा के एक विधायक व एक नेत्री के मामले को बिना उनका नाम लिखे एक खबर प्रसारित की थी। इन न्यूज पोर्टलों में उक्त खबर प्रसारित होने से पहले यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था और पूरे फरीदाबाद में खासी चर्चा का विषय बन गया था। पोर्टलों पर यह खबर प्रसारित होने के बाद फरीदाबाद की एक महिला नेत्री जिसका इस खबर में नाम ही नहीं था, उसने इन तीनों की शिकायत पुलिस में कर दी।

 फरीदाबाद पुलिस ने राजनैतिक दबाव के चलते इस महिला नेत्री की शिकायत के आधार 16 अप्रैल, 2018 को वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा, संजय कपूर एवं नवीन गुप्ता के खिलाफ आईटी एक्ट 67ए, 354डी एवं 499 के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया। जबकि तीनों पत्रकारों द्वारा प्रकाशित खबरों में किसी व्यक्ति, महिला एवं राजनैतिक दल का नाम तक नहीं था। इसके बावजूद पुलिस ने बिना किसी जांच के ही मुकदमा दर्ज कर उन्हें अवैध तौर से  हिमाचल प्रदेश के ऊना से गिरफ्तार कर लिया।

 ये तीनों पत्रकार उस समय धार्मिक स्थल पर जा रहे थे। पत्रकार नवीन धमीजा के पिता पृथ्वीराज धमीजा को अपने पुत्र के प्रति पुलिस के इस अमानवीय व्यवहार के चलते बड़ी ठेस पहुंची और वे इस सदमे के चलते स्वर्ग सिधार गए।पत्रकारों के ख़िलाफ़ की गयी इस करवाई को लेकर प्रदेश के तमाम पत्रकारों ने रोष व्यक्त करते हुए धरने प्रदर्शन भी किए थे और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को माँग पत्र देकर मामला रद्द करवाने की माँग भी की थी ।

हरियाणा पुलिस द्वारा यह सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन था। तीनों पीड़ित पत्रकारों ने इस बर्बर कार्यवाही के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट की माननीय न्यायाधीश निर्मलजीत कौर की अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एस. बरार, पवन सांखला एवं ललित सांखला ने पेश होकर उक्त मामले में तीनों पत्रकारों का पक्ष रखा।

अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी बी.एस. संधू , फरीदाबाद के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अमिताभ ढिल्लो ( वर्तमान आई.जी. हिसार), तत्कालीन डीसीपी क्राईम सुखबीर सिंह पहलवान (मौजूदा एसपी विजिलेंस गुरूग्राम),फरीदाबाद के तत्कालीन क्राईम ब्रांच सैक्टर 30  प्रभारी इंस्पेक्टर संदीप मोर सहित गिरफ्तारी टीम में शामिल रहे सब-इंस्पेक्टर रविन्द्र सिंह, एएसआई अनूप तथा हवलदार राजीव नामक पुलिस कर्मचारियों को व्यक्तिगत नोटिस जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने इन सभी पुलिस अधिकारियों से 23 मई, 2019 तक जवाब मांगा है कि क्यों ना तुम्हारे खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना करने की कार्रवाई की जाए।

इस प्रकरण से हरियाणा पुलिस के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

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