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बगैर मान्यता और अस्थायी मान्यता वाले निजी स्कूल होंगे बंद, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अगली सुनवाई पेशी 24 अप्रैल को


शिक्षा विभाग के अधिकारियों के रवैए से अदालत नाराज

धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी।

स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में बगैर मान्यता और अस्थायी मान्यता वाले निजी स्कूलों को लेकर दायर एक अहम याचिका पर हाईकोर्ट की कोर्ट नंबर 1 में बुधवार को पुनः सुनवाई हुई।

हाईकोर्ट इस मामले में शिक्षा विभाग के खिलाफ सख्त नाराज दिखा। उसने इस मामले में स्टे देने से इंकार कर दिया। अदालत में इस मामले को उठाने वाले संगठन के प्रदेशाध्यक्ष बृजपाल परमार के अनुसार प्रदेश में 1083 बगैर मान्यता वाले जबकि 1894 अस्थायी मान्यता वाले स्कूल चल रहे हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले पर सरकार को पिछली सुनवाई के दौरान भी आड़े हाथों लिया था। आज की सुनवाई में अदालत ने 24 अप्रैल को इस मामले की अगली सुनवाई करने का निर्णय लिया। अदालत ने इस मामले में
शिक्षा विभाग के अधिकारियों से अब तक ऐसे निजी स्कूलों को क्यों नहीं बंद किया गया, यह सवाल पूछते हुए स्टेटस रिपोर्ट मांग ली है। 

बता दें कि मार्च माह में हुई पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने नए शिक्षा सत्र के दौरान ऐसे स्कूल नहीं चलने देने की बात कही थी। आज की सुनवाई में निजी स्कूल एसोसिएशन भी अदालत में गुहार लगाने पहुंच गई, उन्होंने इस मामले में उन्हें भी एक पक्ष बनाने की अदालत से गुहार लगाते हुए नामी वकीलों को अपना पक्ष रखने के लिए अदालत में खड़ा किया। एसोसिएशन इस मामले में स्टे देने की अदालत से गुहार लगाने के लिए पहुंची है। उक्त एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अदालत से कहा कि सरकार के पास उनके स्कूलों के मान्यता आवेदन लंबित हैं, सरकार से उन पर भी स्थिति रिपोर्ट मांगी जाए। अदालत ने इस मामले में शिक्षा विभाग के एसीएस को स्टेटस रिपोर्ट मांग ली है। 

इस मामले में अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होने वाली है। बता दें कि जिला रेवाड़ी में याचिका देने वाले संगठन के मुताबिक 94 बगैर
मान्यता वाले और सैंकड़ों अस्थायी मान्यता वाले निजी स्कूल हैं। जिला शिक्षा विभाग को ऐसे निजी स्कूलों को जल्द बंद कराना होगा, अन्यथा हाईकोर्ट के सामने शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को यहां तैनात अधिकारियों की कार्यशैली की वजह से शर्मिंदा होना पड़ेगा। अहम बात यह है कि इस मामले में सरकार की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के अलावा खंड शिक्षा अधिकारी अथवा खंड मौलिक शिक्षा अधिकारियों से उनके अधिकार क्षेत्र में बिना मान्यता वाला और अस्थायी
मान्यता वाला निजी स्कूल नहीं होने का शपथ पत्र देने के लिए माननीय अदालत बाध्य कर सकती है।


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