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बावल 84 ने बढ़ाई राव इंद्रजीत की मुश्किलें महापंचायत का निर्णय, नहीं देंगे राव को वोट


धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी। 

रविवार को जनस्वास्थ्य मंत्री डाॅ. बनवारी लाल के विधानसभा क्षेत्र बावल में बावल 84 की संघर्ष समिति ने सुमेर सिंह जेलदार की अध्यक्षता में महापंचायत बुलाइ्र, जिसमें अधिकांश वक्ताओं ने भाजपा और मोदी सरकार की नीतियों का पुरजोर विरोध किया। लोकसभा आम चुनाव की सरगर्मियों के बीच जहां राव इंद्रजीत, कांग्रेस उम्मीदवार कैप्टन अजय सिंह की सुसराल गोकलगढ़ और भूडपुर में ग्रामीणों को राष्ट्र हित में नरेंद्र मोदी को दोबारा पीएम बनाने के लिए भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे थे। उधर कस्बा बावल की महापंचायत में बावल 84 के लोग गांव मोहनपुर के दलित परिवार की बेटी की गुमशुदगी और 208 दिनों से इस मामले में विरोध-धरना जारी होने के बावजूद उस बेटी का सुराग नहीं लगने की वजह से खुले मंच से राव के चुनावी बहिष्कार की बात कर रहे थे। पंचायत में अधिकांश वक्ताओं ने मोदी और भाजपा सरकार को जमकर कोसा। इस स्थिति ने भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। 

माना जाता है कि बावल 84 के लोग अपनी बात के पक्के हैं, इसलिए उनका राव इंद्रजीत को वोट नहीं देने और गांव-गांव जाकर उनकी खिलाफत करने का निर्णय भाजपा की जीत को इस क्षेत्र में जरूर प्रभावित करेगा। चूंकि लोकतंत्र में प्रत्येक वोट की अपनी कीमत होती है और बावल विधानसभा क्षेत्र और बावल 84 के सियासी मूड से राव इंद्रजीत को वोट की चोट मिल सकती है। लोकसभा आम चुनाव चूंकि 12 मई को होगा और उससे पहले बावल 84 भाजपा प्रत्याशी के विरोध के लिए क्या रणनीति अपनाएगी, यह बात तो आने वाला वक्त बताएगा मगर यह आम चर्चा है कि रामपुरा हाउस पर सबको साथ लेकर चलने का विश्वास और भाजपा का सबका साथ-सबका विकास का नारा बावल 84 के इस लोकसभा चुनाव में अलग चलने के निर्णय से आम मतदाताओं के मन पर गहरा असर डालेगा। 
भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह का खुले मंच से बहिष्कार करने का निर्णय को कायम रखना और बावल 84 को बांधकर रखना दोनों पक्षों के लिए कड़ी चुनौती होगा, क्योंकि हर चुनाव में नेता साम-दाम-दंड-भेद सभी नीतियां इस्तेमाल करते हैं। भाजपा नेता जहां पूरे देश में पीएम नरेंद्र मोदी की लहर चलने का दावा करते हैं मगर बावल 84 का मूड देखकर ऐसा नहीं लगता। अगर बावल 84 का राव का विरोध करने का यह निर्णय अड़िग रहा तो नरेंद्र मोदी के पुनः पीएम बनाने सपने पर तो चोट होगी ही, साथ ही भाजपा को भी सियासी नुकसान होगा। राव को मेवात में मेव-मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के लिए इन दिनों गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। रविवार को खुद जनस्वास्थ्य मंत्री डाॅ. बनवारी लाल नूंह जिले के गांव खेड़ा-खलीलपुर में दलित परिवार के मतदाताओं को लुभावने के लिए एक चुनावी कार्यक्रम में शामिल होने गए, जबकि उनके खुद के विधानसभा क्षेत्र में दलित परिवार की बेटी की बरामदगी की मांग को लेकर महापंचायत बुलाई गई थी। 

बता दें कि गुरूग्राम लोकसभा सीट में चार बार जीत दर्ज करने वाले राव इंद्रजीत की जीत में बावल 84 के वोटों का लगभग प्रत्येक लोस चुनाव में अहम योगदान रहा। मगर इस बार राव को ठेंगा दिखाकर बावल 84 ने बड़ा निर्णय लिया है। खास यह है कि 17 वीं लोकसभा के आम चुनाव में कांग्रेस ने रेवाड़ी से छह बार विधायक रहे पूर्व मंत्री कैप्टन अजय को चुनाव में उतारकर नया सियासी दांव खेला है। खास यह है कि बावल 84 की पंचायत में कैप्टन के पुत्र चिरंजीव राव ने खुद पहुंचकर महापंचायत को अपना समर्थन वह सहयोग देने का वायदा करते हुए गांव मोहनपुर की गायब नाबालिग लड़की के लिए निरंतर आवाज उठाए जाने का वचन दिया। मिनी सचिवालय से लेकर यहां बावल में अनिश्चित कालीन धरने पर बैठे लोगों के बीच वे स्वयं और कैप्टन अजय सिंह यादव निरंतर आते रहे हैं। चिरंजीव ने भाजपा प्रत्याशी पर कटाक्ष किया कि सांसद को 208 दिनों से बावल-वासियों की याद नहीं आई। इतने दिन से उन्होंने धरने पर बैठे लोगों को कुछ नहीं समझा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब जनता नेता जी को आईना दिखा सकती है और जनता ने इंद्रजीत को आईना दिखा दिया है। अब 23 मई को यह बात साफ हो पाएगी कि जिला नूंह का मेव-मुस्लिम मतदाता और बावल 84 का राव इंद्रजीत के विरोधी मतदाताओं का नया राजनीतिक समीकरण, क्या कांग्रेस प्रत्याशी कैप्टन अजय सिंह यादव को संसद तक पहुंचा पाएगा या फिर भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह की पुनः लाॅटरी लगेगी। 



रेवाड़ी फोटो 4: बावल में आयोजित महापंचायत। 

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