महिला आदि-शक्ति है, महिला अन्नपूर्णा है:प्रो. आरसी कुहाड़

महेन्द्रगढ़ : 29 अप्रैल / प्रमोद बेवल 

महिला आदि-शक्ति है, महिला अन्नपूर्णा है । महिला ही वह धुरी है जिसके इर्द-गिर्द किसी भी परिवार की प्रगति परिक्रमा करती है। महिलाओं का योगदान अविस्मरणीय है। फिर वह चाहे मां के रूप में हो, बहन के रूप में हो या फिर पत्नी व बेटी के रूप में । प्रेरणास्रोत के रूप में देखें तो महिलाओं की भूमिका किसी भी व्यक्ति के जीवन में सदैव अहम रहती है। इसलिए महिलाओं का सम्मान करें और उनके संघर्ष से सबक लेते हुए परिवार, समाज व देश हित में कार्य करें ।

यह विचार हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ ने विश्वविद्यालय में आयोजित एक चर्चा के दौरान उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों व शोधार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए ।

विश्वविद्यालय के कला, मानविकी व समाजिक विज्ञान पीठ व महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ के प्रयासों से आयोजित इस चर्चा में कुलपति ने अपने जीवन में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि किस तरह से उनकी मां,पत्नी व बेटी उनके लिए त्याग व बलिदान करती हैं ।

कुलपति ने कहा कि एक प्रेरणास्रोत के रूप में महिलाओं को महत्त्व देना जरूरी है और इसके साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि हम ऐसी महिलाओं के संघर्ष की कहानी को समझें और दूसरों को भी उनके त्याग व बलिदान से अवगत कराए। उन्होंने कहा कि खेल जगत की बात हो या शिक्षा व विज्ञान के क्षेत्र की। हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी सफलता का लोहा मनवा रही है। बस जरूरत है तो उनकी मेहनत को स्वीकारने और उनसे प्रेरणा लेने की।

इस चर्चा में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की सहायक आचार्य टी. लोंग्कोई, शिक्षा विभाग की सहायक आचार्य डा. रेनु यादव, राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डा. राजीव कुमार सिंह, इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के सहायक आचार्य डा. अभिरंजन व अर्थशास्त्र विभाग की सहायक आचार्य डा. रेनु ने अपने-अपने संबोधन के माध्यम से महिलाओं की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए और बताया कि किस तरह से वे समाज में अपने अस्तित्व की लड़ाई के साथ-साथ अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।

डा. रेनु यादव का कहना था कि जब प्रेरणा स्रोत  व रोल मॉडल के रूप में महिलाओं के बारे में विचार होता है तो बहुत सोचने के बाद कुछ नाम जहन में आते है किंतु जब योगदान की बात आती है तो परिवार से लेकर समाज व देश के विकास में महिलाओं का योगदान पुरूषों से किसी मायने में कम नहीं है। इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों व शोधार्थियों ने विभिन्न सवालों के साथ अपनी जिज्ञासाओं को भी शांत किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रोक्टर प्रो. राजेश मलिक, शिक्षा पीठ के अधिष्ठाता डॉ. प्रमोद कुमार सहित विभागों के शिक्षक भी उपस्थित थे ।
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