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शरीर को मैं, मानना ही सब दुखों का कारण: स्वामी परमानंद

धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी।

अखंड परम धाम सेवा समिति, रेवाड़ी के तत्वावधान में बीती शाम अग्रवाल भवन में वेदांत केसरी क्षत्रिय ब्रह्मनिष्ठ अनंत श्रीविभूषित युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरी ने अपना प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि शरीर को मैं, मानना ही सब दुखों का कारण है। समाज में इस
शरीर से जुड़े रिश्ते-नातों, सांसारिक वस्तुओं को अपना समझना ही मानव की सबसे बड़ी भूल है। शरीर का आकाश से ऊपर उठकर शून्य में लीन होना ही ध्यान है। आकाश से आत्मा हुई और अंत में आत्मा आकाश में लीन हो गई। संगीत प्राध्यापिका डॉ. शुचि गुप्ता ने गुरू वंदना की।

कार्यक्रम संयोजक अनिल विवेकानंद ने स्वामी जी का परिचय दिया। हिन्दू स्कूल के प्रधान रामकिशन गुप्ता ने स्वामी परमानन्द गिरि का रेवाड़ी आगमन पर स्वागत किया जबकि मुकुट अग्रवाल ने स्वामी जी को रेवाड़ी के वर्तमान व पुरातन ऐतिहासिक स्वरूप की जानकारी दी। इस मौके पर आलोक सिंघल, डी एल बंसल उदयपुर, बंशीधर शर्मा, रामनिवास कोसली, अधिवक्ता अमर सिंह, दिलीप शास्त्री, मोती लाल सैनी, नरपाल, हनुमान अग्रवाल, उपासना गुप्ता, अजय मित्तल, प्रोफेसर रमेश चंद्र शर्मा आदि अनेक आदि मौजूद रहे। विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने स्वामी जी का आभार जताया।

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