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शिशुशाला स्कूल की प्रबंध समिति की बैठक बैठक में प्राचार्य बोले: प्रधान ने जो कहा कर दिया, माफ कर दें

समिति के प्रधान ने किया था प्राचार्य को निलंबित
बैठक में वसीयत वाली महिला का लिखित पत्र सार्वजनिक किया
पत्र में 10 दिन के भीतर सेल डीड ठीक कराने का समिति को दिया था आश्वासन
उसका नया बयान: समिति ने चाकू लगाकर लिखवाया था


धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी।

नगर के शिशुशाला स्कूल की प्रबंध समिति की एक बैठक में कई अहम मामलों के खुलासे हुए। समिति के सचिव ने सर्वप्रथम प्राचार्य की बहाली का प्रस्ताव रखा, जिस पर महिला प्राचार्य ने अपना माफी पत्र दिया, तब प्रधान ने भी उनको माफ कर दिया। उधर इस स्कूल वाली जमीन पर मालिकाना हक का दावा करने वाली महिला का लिखित पत्र भी इस बैठक में रखा गया, जिसमें उसने कहा कि गलती से मैंने अपने लड़के के पक्ष में शिशुशाला मॉडल टाउन 318 आर एल की पूरी जमीन तब्दील कर दी, जबकि मैंने बेटे के नाम रिहायशी मकान ही करना था। मैं सेल डीड को 10 दिन के अंदर माॅडीफाई करा दूंगी। विश्वस्त सूत्रोंके अनुसार 23 मई 2017 को लिखे इस पत्र के बाद आज वसीयत का दावा करने वाली महिला सुनिदा दत्ता ने कहा कि समिति सदस्यों ने जबरन उससे यह सब लिखवाया था। उधर इस मामले में वसीयत और रजिस्ट्री को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। 

अगर आरोप सही हैं तो कई प्रशासनिक अधिकारी भी शिशुशाला की नूरा-कुश्ती के दंगल में धोबी-पछाड़ से बचते नजर आएंगे।
बता दें कि इस मामले के उजागर होने के पहले जिला शिक्षा विभाग ने भी शिशुशाला को नोटिस थामाकर यह पूछा था कि स्कूल की मान्यता नहीं है, लिहाजा क्यों ना इस स्कूल को बंद कर दिया जाए? अब एसडीएम रेवाड़ी ने इस मामले में दोनों पक्षों को अपने कार्यालय बुलवाकर दस्तावेज दिखाने का आग्रह किया है। अब देखना यह है कि इस मामले की जांच क्या निष्पक्षता से पूरी होगी? क्या शिशुशाला स्कूल की मान्यता पर शिक्षा विभाग का पत्र जारी होने के पीछे स्कूल प्रबंधन की कहीं कमी-कोताही रही। स्थिति जो भी रही हो
मगर मामला उछलने के बाद अब शिशुशाला स्कूल में प्रवेश दिला बैठे अभिभावकों और नए प्रवेश दिलाने के इच्छुक अभिभावकों के मन को गहरी ठेस पहुंची है। अब देखना यह है कि इस मामले में जिला शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और अभिभावक किसका साथ देते हैं, बिना मान्यता वाले स्कूल में अपने बच्चों को प्रवेश दिलाते हैं, या फिर जिला शिक्षा विभाग नियमों में कोताही बरतने वाले स्कूल प्रबंधन और स्कूल की मान्यता को लेकर अपनी अगली सिफारिश क्या करता है? क्योंकि शिक्षा विभाग का मान्यता संबंधी पत्र साफ
कहता है कि सरकार के नियमों में कमी कोताही बरती गई। अगर ऐसा हुआ है तो स्कूल की प्रबंधन समिति की कार्यशैली भी कटघरे में है। 

जो भी हो मगर अभिभावकों के मन में विश्वास कायम करने के लिए शिशुशाला को बेहतर शिक्षा प्रबंधन के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे और जिला शिक्षा विभाग भी इस स्कूल के मामले को एक गंभीर मामला मानते हुए अन्य बिना मान्यता वाले स्कूलों को
लेकर सख्त रवैया अख्तियार करना होगा।


एसएचओ माॅडल टाउन को 8 लोगों के विरूद्ध शिकायत

शिशुशाला स्कूल मामले में सोमवार को हुए घटनाक्रम के बाद मंगलवार को एसएचओ माॅडल टाउन को वीना दता पत्नी सुभाष दता ने लिखित शिकायत दी। इसमें दावा किया गया कि वे अपने पूर्वजों के कानूनी वारिस हैं और 318 आरएल माॅडल टाउन (शिशुशाला वाली जमीन) पर 20-25 साल से काबिज हैं। उनके पूर्वजों ने यहां एक स्कूल शुरू किया, जिसको एक साजिश के तहत लगातार घाटा
दिखाकर बंद करने के कगार पर पहुंचा दिया गया। पहली अप्रैल को 8 लोग नामतः नवीन शर्मा निवासी गुर्जरवाड़ा, भूपेंद्र यादव निवासी कोनसीवास, आशु अरोड़ा पत्नी राजेश अरोड़ा (शिशुशाला की बर्खास्त प्राचार्य) , विजय सोमाणी, रेणू मैहंदीरता शिक्षिका, सूर्यकांत सैनी निवासी निवासी दिल्ली गेट, निधि टीचर और डीके जैन निवासी माॅडल टाउन में पहली अप्रैल को जबरन प्रवेश कर गए।


मुख्य गेट का ताला तोड़ दिया और हमें जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने इन लोगों पर अपशब्द कहने का आरोप भी इस शिकायत में लगाया। उन्होंने कहा कि 30 मार्च 2019 को उन्होंने हरिज्ञान एजुकेशन सोसायटी में चेतावनी दी थी कि हमारी जायदाद में 31 मार्च के बाद स्कूल नहीं चलेगा। 2 अप्रैल को पुनः ये लोग हमारी जायदाद पर घुसकर बैठ गए, लिहाजा इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने खुद को वरिष्ठ नागरिक बताते हुए उपरोक्त लोगों से उन्हें जान का खतरा होने की बात कही।

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