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कितनी घातक है आधुनिक आइसक्रीम



आइसक्रीम शब्द सुनते ही सबके मुंह में पानी आ जाता है। पल भर में विद्युत धारा की तरह एक ठंडी मीठी तरंग पूरे शरीर में प्रवाहित हो जाती है और मन प्रसन्न हो जाता है। शादी हो या जन्म दिन का समारोह हो, आइसक्रीम के बिना सब कुछ अधूरा ही माना जाता है। ऐसे रिसेप्शन्स में सबसे ज्यादा भीड़ आइसक्रीम की स्टॉल्स पर ही दिखाई देती है। आइसक्रीम विटामिन व कैल्शियम से भरपूर सबका पसंदीदा, शीतल और स्वास्थ्यप्रद व्यंजन है जो ताजा दूध, मक्खन, अंडे, फलों और सूखे मेवों तैयार किया जाता है। आइसक्रीम बनाने वाले बड़े बड़े संस्थान भिन्न भिन्न रंगों और फ्लेवर में अनेक प्रकार की आइसक्रीम बनाते हैं और लुभावनी पैकिंग में बेचते हैं। विज्ञापनों पर खूब पैसा बहाते हैं परंतु क्या ये लोग सचमुच ताज़ा दूध, मक्खन, फलों, आदि से ही आइसक्रीम बनाते हैं??? यथार्थ कुछ और ही है जिसे आप सुन नहीं पाएंगे। सचमुच आज बहुराष्ट्रीय संस्थानों का उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना ही है। आपके स्वास्थ्य से उन्हें कोई सरोकार नहीं। 

मिल्क पाउडर एक समस्या तो यह है कि आइसक्रीम बनाने के लिए जिन गायों के दूध से मिल्क पाउडर बनाया जाता है, उन्हें प्रायः सिंथेटिक इस्ट्रोजन हार्मोन के इंजेक्शन दिये जाते हैं ताकि गायों का विकास तेजी से हो और ये दूध ज्यादा देने लगे। लेकिन क्या इसका असर हमारी नन्हीं लड़कियों के स्वास्थ्य पर नहीं पड़ेगा। हम देख रहे हैं कि आजकल आठ दस साल उम्र में ही लड़कियों के हिप्स और ब्रेस्ट डवलप हो रहे हैं और कैंसर का खतरा भी बढ़ रहा है। यह सब इन्हीं हार्मोन्स और रसायनों की नतीजा है। 
शुगर आइसक्रीम को मिठास देने के लिए चीनी के साथ कई सस्ती आर्टिफीशियल शुगर्स जैंसे एसेपार्टेम, जाइलिटोल, सेक्रीन आदि भी मिलाई जाती है। लेकिन ये आपकी सेहत को बहुत खराब करती हैं और इनसे आपको कैंसर भी हो सकता है। सभी बड़े ब्रांड्स आइसक्रीम बनाने के लिए शरीर के लिए घातक ट्रांसफैट युक्त हाइड्रोजिनेटेड वनस्पति घी, स्किम्ड मिल्क पाउडर, हाई फ्रक्टोज कोर्न सिरप, कृत्रिम मिठास या एस्पार्टेम और विषैले एडीटिव्ज जैसे कार्बोक्सिमिथाइल सेल्यूलोज, ब्यूटिरेल्डीहाइड, एमाइल एसीटेट आदि का इस्तेमाल करते हैं। अंडे की जगह सस्ता रसायन डाई-ईथाइल ग्लाइकोल प्रयोग किया जाता है, जिसका प्रमुख उपयोग रंग रोगन साफ करना हैं। आइसक्रीम का सॉफ्ट बनाने, वेट बढ़ाने और ज्यादा मुनाफा कमाने हेतु इसमें हवा भी मिला दी जाती है, हालांकि यह हवा हमारे शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती है। 
जहरीले आर्टिफीशियल फ्लेवर्स चैरी आइसक्रीम बनाने के लिए एल्डीहाइड सी-17 नामक खतरनाक विष का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक ज्वलनशील रसायन है और रंग रोगन, प्लास्टिक तथा रबड़ बनाने के काम में आता है। आपकी सबसे पसंदीदा वनीला आइसक्रीम पिपरोनाल नामक जुएं मारने की दवा से तैयार होती है। ड्राइ फ्रूट्स के फ्लेवर के लिए बुटीरेल्डीहाइड नामक रसायन मिलाया जाता है। इसका प्रयोग रबर बनाने के लिए होता है। 
चमड़ा और कपड़ा साफ करने का रसायन इथाइल एसीटेट आपकी आइसक्रीम को अन्नानास का फ्लेवर देता है। इथाइल एसीटेट हृदय, यकृत और फैफड़े के लिए बहुत हानिकारक है। बनाना आइसक्रीम ऐमाइल एसीटेट से तैयार होती है, जो ऑयल पेंट बनाने के काम में आता है। 
आपकी आइसक्रीम में मोनो और डाइग्लीसराइड्स, डाइसोडियम फोस्फेट, बैंजाइल ऐसीटेट, मोनो स्टिरेट, प्रोपाइलीन ग्लाइकोल, सोडियम बेंजोएट, पोलीसोर्बेट 80, पोटेशियम सोर्बेट, मोडीफाइड कोर्न सिरप और सोय लेसीथिन भी मिलाए जाते हैं। हालांकि एफ.डी.ए. ने इन रसायनों को GRAS (generally recognized as safe) लिस्ट में रखा है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इन्हें आइसक्राम में मिलाना जरूरी है। क्या इन्हे मिलाए बिना आइसक्राम नहीं बन सकती। यह भी विदित रहे कि एफ.डी.ए. के नियमों के अनुसार आइसक्रीम निर्माता को हर चीज लेबल पर लिखने की जरूरत नहीं है।
यह सब जानने के बाद क्या आप विभिन्न खतरनाक रसायनो से तैयार हुए इस व्यंजन को आइसक्रीम कहेंगे??? इसे तो केमीकल ट्रीट, केमीकल शॉप, आइसकेम, आइसस्केम या केमीकल बम कहना ही उचित होगा। गृहणियों क्या यह सब जानने के बाद भी आप अपने प्राणों से प्यारे डार्लिंग पति और बच्चों को बाजार की आइसक्रीम खिलाना पसंद करोगी??? कभी नहीं ना। क्या इसका कोई समाधान है??? जी हां बिलकुल है और वह है कि पूरा भारत बाजार की इस केमीकल आइसक्रीम का पुरज़ोर तरीके से बहिष्कार करे। आप अच्छी और स्वास्थ्यप्रद आइसक्रीम घर पर बना सकते हैं। देखियेगा आपके बच्चे और पतिदेव भी आइसक्रीम बनाने में आपकी मदद करेंगे। मेरा दावा है यह इतनी स्वादिष्ट बनेगी कि आप बाहर की आइसक्रीम हमेशा के लिए भूल जाएंगे। 
तो आइये कुछ आइसक्रीम घर पर बनाइये और इस तपती गरमी में आपके बच्चों तथा पति को घर पर बनी स्वास्थ्यप्रद और स्वादिष्ट आइसक्रीम से ठंडक पहुंचा सकते हैं।
केदार हिम सामग्री 
1. कोल्ड प्रेस्ड अलसी तेल 50 एम.एल. 
2. घर का बना हुआ ताज़ा छेना 125 ग्राम
3. दूध 50 एम.एल.
4. किशमिश चौथाई कप
5. कद्दू के बीज 20 ग्राम
6. शहद स्वादानुसार
8. कोको पावडर 1 टीस्पून
बनाने की विधिसबसे पहले अलसी तेल, छेना, दूध, शहद और कोको पाउडर को हेंड ब्लेंडर से अच्छी तरह ब्लेंड कर लीजिए। फिर ड्राई फ्रूट्स मिलाकर फ्रीजिंग ट्रे में रख कर जमने के लिए डीप फ्रीजर में रख दें। चाहें तो आधी जमने पर फ्रीजिंग ट्रे को बाहर निकाल कर एक बार और अच्छी तरह फैंट कर डीप फ्रीजर रख दें। अगले दिन सुबह आपकी स्वास्थ्यप्रद, प्रिजर्वेटिव, रंगों व घातक रसायन मुक्त केदार हिम तैयार है।

रजत हिम सामग्री
1. कोल्ड प्रेस्ड अलसी तेल 50 एम.एल. 
2. घर का बना हुआ ताज़ा छेना 125 ग्राम
3. दूध 50 एम.एल.
4. किशमिश चौथाई कप
5. काजू 20 ग्राम
6. शहद स्वादानुसार
8. नेचुरल वनीला 1 टीस्पून
बनाने की विधिसबसे पहले अलसी तेल, छेना, दूध, शहद और नेचुरल वनीला को हेंड ब्लेंडर से अच्छी तरह ब्लेंड कर लीजिए। फिर ड्राई फ्रूट्स मिलाकर फ्रीजिंग ट्रे में रख कर जमने के लिए डीप फ्रीजर में रख दें। चाहें तो आधी जमने पर फ्रीजिंग ट्रे को बाहर निकाल कर एक बार और अच्छी तरह फैंट कर डीप फ्रीजर रख दें। अगले दिन सुबह आपकी स्वास्थ्यप्रद, प्रिजर्वेटिव, रंगों व घातक रसायनमुक्त रजत हिम तैयार है। अपने परिवार के साथ इस रजत हिम का आनंद लीजिये। 
नोट - अलसी का कोल्डप्रेस्ड तेल आप हैल्थ फर्स्ट कंपनी का ही प्रयोग करें। सिंथेटिक वनीला असेंस का प्रयोग नहीं करें। 
कंचन हिमसामग्री
1. कोल्ड प्रेस्ड अलसी तेल 80 एम.एल. 
2. घर का बना हुआ ताज़ा छेना 125 ग्राम
3. दूध 50 एम.एल.
4. किशमिश चौथाई कप
5. काजू 20 ग्राम
6. शहद स्वादानुसार
8. कटे हुए आम 100 ग्राम
बनाने की विधिसबसे पहले अलसी तेल, छेना, दूध, शहद और कटे हुए आम हेंड ब्लेंडर से अच्छी तरह ब्लेंड कर लीजिए। फिर ड्राई फ्रूट्स मिलाकर फ्रीजिंग ट्रे में रख कर जमने के लिए डीप फ्रीजर में रख दें। चाहें तो आधी जमने पर फ्रीजिंग ट्रे को बाहर निकाल कर एक बार और अच्छी तरह फैंट कर डीप फ्रीजर रख दें। अगले दिन सुबह आपकी स्वास्थ्यप्रद, प्रिजर्वेटिव, रंगों व घातक रसायनमुक्त रजत हिम तैयार है। अपने परिवार के साथ इस कंचन हिम का आनंद लीजिये। 
नोट - अलसी का कोल्डप्रेस्ड तेल आप हैल्थ फर्स्ट कंपनी का ही प्रयोग करें। सिंथेटिक वनीला असेंस का प्रयोग नहीं करें।


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