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बिल्ली अपने दांव में, चुहा अपने दांव में मगर शेर से बचाना नामुमकिन,शिशुशाला स्कूल फिर सुर्खियों में

रात में स्कूल के नाम पर अज्ञात ने पोती कालिख
बच्चे-अभिभावक हुए परेशान, सुबह हुआ हंगामा, प्रशासन सचेत-पुलिस भिजवाई
करोड़ों की जमीन, नेता भी अपनी रोटियां सेंकने लगे

धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी।

1953 में स्थापित शिशुशाला स्कूल की करोड़ों रूपए वाली जमीन पर अब नेताओं के अलावा प्राॅपर्टी डीलरों की तिरखी नजर पड़ गई है। शहर के बावल रोड
स्थित महाराणा प्रताप चैक से चंद मीटर की दूरी पर स्थित शिशुशाला स्कूल अब शिक्षा की बजाए स्कूल प्रबंधन के झगड़े और प्राॅपर्टी डीलरों की
आवाजाही का अडडा बन गया है और अब इस पर राजनीतिक रोटियां सेकी जाने लगी हैं। पता चला है कि दता परिवार की दो बहनों ने इस स्कूल की स्थापना की ताकि
गरीब के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके मगर अब हालात यह है कि प्रबंध कमेटी गुटबाजी का शिकार हो गई है। दता परिवार की वसीयत और इस जमीन की
रजिस्ट्री पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि इस स्कूल की जमीन को हड़पने की कोशिशें करीब एक साल से चल रही हैं। बीती रात
शिक्षा के इस मंदिर के नाम पर अज्ञात ने कालिख पोत दी और यहां तक लिख दिया कि यह स्कूल बंद हो चुका है। इस स्कूल को अंदर से ताला लगा दिया
गया। बता दें कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में शिक्षा विभाग बिना सरकारी अनुमति वाले स्कूलों को बंद करने के आदेश शिक्षा विभाग के
अधिकारियों को दे चुका है। 


पहली अप्रैल को नए शिक्षा सत्र के शुरूआती दिन शिशुशाला स्कूल के अंदर से ताला जड़े जाने की जानकारी सोमवार की सुबह उस वक्त बच्चों के अभिभावकों को लगी, जब वे इस स्कूल में पढ़ने वाले अपने
बच्चों को स्कूल छोड़ने आए। हंगामा बढ़ा तो यह बात प्रशासन के कानों तक पहुंच गई। प्रशासन सचेत हो गया। स्कूल में पुलिस भिजवा दी गई।
अभिभावकों के अनुसार स्कूल के बोर्ड पर कालिख पुती हुई थी। जबरन स्कूल का गेट खुलवाया गया और इसकी सूचना प्रशासन व पुलिस को दी गई। पुलिस और
प्रशासन मौके पर पहुंचा। ऐसा शिशुशाला स्कूल के इतिहास में पहली बार हुआ। शहर को कई डाॅक्टर, पुलिस अधिकारी एवं अन्य की सौगात देने वाले शिशुशाला
स्कूल पर अचानक ग्रहण लग गया है। दो सगी बहनों शांति दत्ता और चंद्र दत्ता ने आजीवन विवाह नहीं करने की कसम लेकर रेवाड़ी इलाके में शिक्षा की
ज्योति को जलाए रखने के लिए शिशुशाला स्कूल स्थापित किया। इस स्कूल से शिक्षा लेने के बाद पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव और पूर्व विधायक राव यादवेंद्र सिंह समेत कई आईएएस और पुलिस अधिकारी समाज के सामने आए। 18 जुलाई 1992 को शांति दत्ता की मौत हो जाने के बाद 2002 में उनकी छोटी बहन चंद्र दत्ता ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। वे अपने अंतिम समय
तक शिशुशाला स्कूल से जुड़ी रही। 1987 में शहर के गणमान्य लोगों ने शिशुशाला स्कूल के संचालन के हरी ज्ञान एजुकेशन सोसायटी गठित कराई। इसी
बीच दता परिवार से संबंधित दिवंगत दत्ता बहनों की नाते में भाई के पुत्र की बहू सुनंदा दत्ता उर्फ मीना दत्ता लोगों के सामने आई और उनके नाम
दत्ता बहनों की एक वसीयत होने का दावा किया।

स्कूल प्रबंधन ने जब इस वसीयत को फर्जी बताया तो 2017 में सुनंदा ने यह जमीन की रजिस्ट्री अपने बेटे करण के नाम 4 हजार रूपए गज की दर से करा दी।
उसके बाद स्कूल वाली जमीन, जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है, पर प्राॅपर्टी डीलर नजर गड़ाए बैठे हैं। इस वजह से दोनों पक्षों के बीच करीब
एक साल से रस्साकशी जारी है और 31 मार्च को रात को अज्ञात शख्स ने शिशुशाला स्कूल के नाम पर कालिख पोत दी। अंदर से ताला बंद करके बच्चों के
आने पर रोक लगाई गई। हरि ज्ञान सोसायटी के सदस्य, जो इस स्कूल का प्रबंधन करने का दावा करते हैं, का कहना है कि वे इस स्कूल को प्रबंधन के कुछ
सदस्य प्राॅपर्टी डीलरों से मिल गए हैं और इस स्कूल को बंद कराना चाहते हैं मगर वे ऐसा नहीं होने देंगे। जहां प्रबंधन इस करण के नाम वाली
रजिस्ट्री और सुनंदा के नाम की वसीयत को फर्जी बताते हैं।

अजेयभारत ने इस संबंध में शहरवासियों को आगाह करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी रामकुमार फलसवाल के बयान पर आधारित एक खबर प्रकाशित की थी,
जिसमें उक्त अधिकारी ने इन बच्चों को दूसरे स्कूल में समायोजित करने की बात कही थी मगर उसके बावजूद शिशुशाला स्कूल में विवाद की स्थिति के
बावजूद बच्चों के नए प्रवेश अथवा पुराने बच्चों के अभिभावकों को वास्तविक स्थिति की जानकारी दी गई। आलम यह है कि अब शिशुशाला स्कूल को लेकर चूहा-बिल्ली और शेर का खेल शुरू
हो गया है। जहां बिजली अपने दांव में है और चूहा अपने दांव में जबकि सब जानते हैं कि शेर इन सब पर भारी होता है। स्कूल प्रबंधन जहां बिल्ली की
स्थिति में है, वहीं प्राॅपर्टी डीलर चूहा बनकर इस प्राॅपर्टी को अपने कब्जे में लेने के फिराक में हैं। उधर सरकार, शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन
शेर बनकर सबको दबोचने के दांव में हैं। जबकि शिशुशाला स्कूल प्रबंधन से जुड़ी हरि ज्ञान सोसायटी इस स्कूल के इतिहास से लेकर मौजूदा हालात से
वाकिफ थी, बावजूद इसके ना तो अभिभावक जागे और ना ही सोसायटी से जुड़े लोग।

शहरवासियों का कथन है कि शिशुशाला स्कूल अब शिक्षा देने वाले मंदिर की बजाए नूरा-कुश्ती का अखाड़ा बन गया है। रविवार की रात शिशुशाला स्कूल के
नाम पर कालिख पोतने की घटना ने कई सवाल एक साथ खड़े किए हैं। क्या मौजूदा प्रबंधन शिशुशाला स्कूल के संचालन की जिम्मेदारी का निर्वाह सही ढंग से
नहीं कर पा रहा ? स्कूल से संबंधित जमीन की रजिस्ट्री और वसीयत के असली हकदार को तय किए बिना इस स्कूल में मासूम बच्चों को शिक्षा दिलाना
मुंगेरीलाल का सपना नहीं होगा ? जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन आखिरकार कब अपनी चुप्पी तोड़ेंगे, कोई बड़ा हादसा होने के बाद ? चूंकि अब पानी सिर से
उपर गुजर गया है, इसलिए प्रशासन को इस स्कूल पर जल्द ठोस निर्णय लेना होगा।

इस मामले पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार गौरिया से अजेयभारत ने विशेष तौर पर बातचीत की। उक्त अधिकारी ने साफ कहा कि वे आज
रेवाड़ी से बाहर हैं लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो बहुत गलत हुआ है। शिक्षण संस्थाओं पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। प्रबंधन के बीच की खटास अब बच्चों
के भविष्य को भी प्रभावित कर रही है। सरकारी नियमानुसार शिक्षण संस्थाओं का संचालन कराया जाएगा। जब उनसे यह पूछा गया कि नए शिक्षा सत्र पहली
अप्रैल से शुरू हो गया है, हाईकोर्ट और सरकार ने बिना अनुमति वाले निजी स्कूलों को बंद कराने के आदेश दिए हुए हैं, ऐसे में जिला रेवाड़ी में
कितने स्कूलों पर तालाबंदी कार्यवाही हुई है। उक्त अधिकारी ने जवाब दिया कि जिला रेवाड़ी में 38 से अधिक ऐसे स्कूल हैं और इनको बंद कराने की पूरी
जानकारी मैं रेवाड़ी कार्यालय पहुंचने के बाद ही दे पाउंगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या शिशुशाला स्कूल पर तालाबंदी सरकार के इन निर्देशों के अनुसार
शिक्षा विभाग की ओर से हुई कार्यवाही है, इसकी मुझे जानकारी नहीं।


इस मामले के प्रकाश में आने के बाद शिशुशाला स्कूल के प्रबंधन के प्रधान की ओर से प्राचार्य आशु अरोड़ा को निलंबित करने का नोटिस जारी करने के बाद
अचानक इस स्कूल के नाम पर कालिख पोती गई है ? मंगलवार को मौजूदा प्रबंधन से जुड़े सदस्यों की एक बैठक बुलाई गई है। इसमें होने वाले निर्णय से इस
मामले में नए खुलासे होने की उम्मीद है।



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