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जानिए कब और कैसे मनाएं शनि जयंती (जन्मोत्सव) वर्ष 2019 में


शनि जयंती का पर्व हिंदू पंचांग के ज्येष्ठ के महीने में अमावस्या को मनाया जाता है जो वर्ष 2019 में 3 जून के मानेगा।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शनि जिन्हें कर्मफलदाता माना जाता है। दंडाधिकारी कहा जाता है, न्यायप्रिय माना जाता है। जो अपनी दृष्टि से राजा को भी रंक बना सकते हैं। हिंदू धर्म में शनि देवता भी हैं और नवग्रहों में प्रमुख ग्रह भी जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में बहुत अधिक महत्व मिला है। शनिदेव को सूर्य का पुत्र माना जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को ही सूर्यदेव एवं छाया (संवर्णा) की संतान के रूप में शनि का जन्म हुआ।

यह रहेगा शनि जयंती (पर्व/ तिथि ) का शुभ मुहूर्त

शनि जयंती 2019 - 3 जून
अमावस्या तिथि आरंभ - 16:39 बजे (2 जून 2019)
अमावस्या तिथि समाप्त - 15:32 बजे तक (3 जून 2019) सुकर्मा योग,दोपहर तक रोहिणी नक्षत्र ततपश्चात मृगशिरा नक्षत्र में एवम वृषभ राशि के चन्द्रमान्तर्गत मनेगी।

शनि जयंति पर शनिदेव की पूजा की जाती है। यह उन व्यक्तियों के लिए सबसे ज्यादा खास पर्व होता है जिनकी कुंडली में शनि की साढ़े साती और शनि की ढ़ैय्या चल रही होती है, क्योंकि शनि दोष से पीड़ित व्यक्ति यदि इस दिन पूजा पाठ करता है तो उसे शनि दोष से मुक्ति मिल जाती है। शनि राशिचक्र की दसवीं व ग्यारहवीं राशि मकर और कुंभ के अधिपति है। जहां एक ओर शनि किसी भी राशि में लगभग 10 महीने तक रहते हैं तो वहीं दूसरी ओर शनि की महादशा का काल 19 सालों तक का होता है। ऐसा कहा जाता है कि शनि एक क्रूर व पाप ग्रह होते हैं और वो अशुभ फल भी देते हैं। लेकिन ये भी माना जाता है कि असल जिंदगी में ऐसा नही है। क्योंकि शनि न्याय करने वाले देवता हैं और वो कर्म के हिसाब से कर्मफल देने वाले दाता हैं। इसीलिए वो बुरे कर्म करने वाले लोगों को बुरी सजा और अच्छे कर्म करने वाले को अच्छा परिणाम देते हैं।

पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि भारतीय वैदिक ज्योतिष में शनिदेव को न्याय तथा मृत्यु का देवता माना जाता है। इनका वर्ण काला है यही कारण इनको काला रंग बहुत ही पसंद है। ज्योतिष में इनको तीसरी सप्तम तथा दशम दृष्टि दी गई है। शनि सबसे धीरे धीरे चलने वाला ग्रह है। योगी और तपस्वी का जीवन व्यतीत करना इन्हे बहुत ही पसंद है यही कारण है की शनि की दशा में व्यक्ति मोक्ष की बात करने लगता है। शनि जयंती के दिन भारत में स्थित प्रमुख शनि मंदिरों में भक्त शनि देव से संबंधित पूजा पाठ करते हैं तथा शनि पीड़ा से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। इस दिन


ॐ प्रां प्रीं प्रौ स: शनये नमः॥
अथवा
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
उपरोक्त मंत्र का जप कम से कम एक माला जरूर करना चाहिए

शनिदेव
शनिदेव को कर्मफल दाता व न्यायप्रिय माना जाता है। उन्हें दंडाधिकारी भी कहा जाता है। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि शनि देव अगर चाहें तो अपनी दृष्टि से राजा को भिखारी बना सकते हैं। हिंदु धर्म में शनि देवता तो हैं ही साथ वह नवग्रहों में भी प्रमुख ग्रह हैं, जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में अत्यधिक महत्व मिला है। ऐसा माना जाता है कि शनिदेव सूर्य के पुत्र हैं और मान्यता तो ये भी है कि शनि का जन्म ज्येष्ठ के महीने में अमावस्या को हुआ था। ये भी कहा जाता है कि शनिदेव के पिता सूर्यदेव एवं माता छाया (संवर्णा) हैं।

इस विधि से पूजन कर करें शनिदेव को प्रसन्न

शनिदेव की पूजा भी अन्य देवी-देवताओं के जैसे ही होती है। इनके लिए कुछ अलग नही करना होता है। शनि जयंती के दिन उपवास भी रखा जाता है। व्रत वाले दिन सुबह उठने के बाद दैनिक क्रिया कलापों को करके स्नान किया जाता है। जिसके बाद लकड़ी के एक पाट पर साफ-सुथरे काले रंग के कपड़े या नए काले रंग के कपड़े को बिछाकर शनिदेव की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए। अगर शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर आपको पास न हो तो एक सुपारी के दोनों ओर शुद्ध घी व तेल का दीपक और धूप जलाना चाहिए। उसके बाद उस स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करवाना चाहिए। सिंदूर, कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल आदि के साथ-साथ नीले या काले फूल शनिदेव को चढ़ाना चाहिए। इमरती व तेल से बने पदार्थों को व श्री फल के साथ-साथ अन्य फल भी आप शनिदेव को चढ़ा सकते हैं। पूजा करने के बाद शनि मंत्र की एक माला का जाप करना चाहिए और फिर शनि चालीसा का पाठ भी करना चाहिए। अंत में शनिदेव की आरती करके पूजा संपन्न करना चाहिए।।

ये हैं शनि देव की प्रिय वस्तु

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय वस्तु का दान या सेवन करना चाहिए। शनि के प्रिय वास्तु है— तिल, उड़द, मूंगफली का तेल, काली मिर्च, आचार, लौंग, काले नमक आदि का प्रयोग यथा संभव करना चाहिए।

इन कर्मों द्वारा आप कर सकते हैं शनि देव को प्रसन्न

अपने मता पिता, विकलांग तथा वृद्ध व्यक्ति की सेवा और आदर-सम्मान करना चाहिए।
हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए।
दशरथ कृत शनि स्तोत्र  का नियमित पाठ करे।
कभी भी भिखारी, निर्बल-दुर्बल या अशक्त व्यक्ति को देखकर मज़ाक या परिहास नहीं करना चाहिए।
शनिवार के दिन छाया पात्र (तिल का तेल एक कटोरी में लेकर उसमें अपना मुंह देखकर शनि मंदिर में रखना ) शनि मंदिर में अर्पण करना चाहिए। तिल के तेल से शनि देव शीघ्र ही प्रसन्न होते है।
काली चीजें जैसे काले चने, काले तिल, उड़द की दाल, काले कपड़े आदि का दान सामर्थ्यानुसार नि:स्वार्थ मन से किसी गरीब को करे ऐसा करने से शनिदेव जल्द ही प्रसन्न होकर आपका कल्याण करेंगे।
पीपल की जड़ में केसर, चंदन, चावल, फूल मिला पवित्र जल अर्पित करें।
शनिवार के दिन तिल का तेल का दीप जलाएं और पूजा करें।
सूर्योदय से पूर्व शरीर पर तेल मालिश कर स्नान करें।
तेल में बनी खाद्य सामग्री का दान गाय, कुत्ता व भिखारी को करें।
शमी का पेड़ घर में लगाए तथा जड़ में जल अर्पण करे।
मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए

जानिए शनि देव की पूजा से होने वाले लाभ को

मानसिक संताप दूर होता है।
घर गृहस्थी में शांति बनी रहती है।
आर्थिक समृद्धि के रास्ते खुल जाते है।
रुका हुआ काम पूरा हो जाता है।
स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या धीरे धीरे समाप्त होने लगती है।
छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलती है।
राजनेता मंत्री पद प्राप्त करते है।
शारीरिक आआलस्यपन दूर होता है।

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