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भोपाल लोकसभा चुनाव 2019 विशेष: कौन बनेगा राजा दिग्विजय या प्रज्ञा?


कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आजकल  बीजेपी के गढ़ भोपाल से लोकसभा चुनाव मैदान में ताल-ठोक रहे हैं। मध्यप्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह अपने मित्र और प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ के कहने पर भोपाल जैसी कठिन लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, यहां से बीजेपी 1989 से लगातार जीतती आ रही है। दिग्विजय सिंह के मुकाबले बीजेपी ने साध्वी प्रज्ञा जैसी फायर-ब्रांड नेता को चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। मतगणना से पहले आइए जाने की ज्योतिषीय गणना के अनुसार भोपाल में किनके सितारे दिखाएंगे कमाल।दोनों उम्मीदवारों में दिग्विजय की कुंडली में अढैया शनि और प्रज्ञा की कुंडली में साढे साती का दौर चल रहा है। सफलता के लिए दोनों को अथक परिश्रम करना पड़ेगा। राजनैतिक रूप से और जन्म कुंडली के ग्रहों के प्रभाव के अनुसार यह मुकाबला अत्यंत कांटे का रहेगा। दोनों ही उम्मीदवारों के लग्न का बुध गुरु की राशि में बैठा है जो कि दोनों को प्रखर राजनेता बना रहे हैं। बावजूद दिग्विजय का पक्ष मजबूत दिखाई दे रहा है। राजनीतिक क्षेत्र में दिग्विजय का पलड़ा भारी रहेगा।

जानिए क्या कहती हैं दिग्विजय सिंह की कुंडली ...






दिग्विजय सिंह का जन्म 28 फरवरी 1947 को सुबह 8 बजकर 5 मिनट पर इंदौर में हुआ था। दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के राघोगढ़ राजघराने से संबंध रखते हैं। मीन लग्न की इनकी कुंडली में राजसत्ता का कारक ग्रह सूर्य मंगल के साथ 12 वें घर में शुभ-कर्तरी योग में बैठा हुआ है। सूर्य से चतुर्थ भाव में वृषभ राशि में बैठे बलवान चन्द्रमा पर वृश्चिक राशि से गुरु की दृष्टि पड़ रही है जो गजकेसरी योग का निर्माण कर रही है। गुरु की महादशा में 1980 से 1984 के बीच वह तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की कैबिनेट में मंत्री रहे।
सूर्य-मंगल का समसप्तक योग राजनीति के लिए उत्तम होता है लेकिन दशम का मंगल वक्री होने से हानि भी देता है। राजनीति के उच्च शिखर तक पहुंचना मुश्किल है।

दिग्विजय वाणी से चतुर है। वाणी भाव में भाग्येश उच्च का शुक्र व वाणी भाव का स्वामी गुरु एकादश लाभ भाव में स्वराशि का होने से हमेशा वाणी की वजह से चर्चा में रहे।

तृतीय भाव में मेष का राहु होने से दिग्विजय विरोधियों पर भारी पड़ते हैं। शनि वर्तमान में उच्च का होकर नवम से वक्र गति से भ्रमण कर रहा है व जन्म के समय भी वक्री ही है अतः आपका सफल होना संदिग्ध ही रहेगा।

शनि की साढ़ेसाती ने हराया था 2003 में ...
इसी गुरु की महादशा में मंगल की अन्तर्दशा में 1993 में वह पहली बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने। बाद में शनि की महादशा में नीच के बुध की अन्तर्दशा में वर्ष 2000 में उनके मुख्यमंत्री रहते मध्यप्रदेश का विभाजन कर छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से उनकी स्थिति कमजोर होने लगी। छत्तीसगढ़ में बिजली का अधिक उत्पादन होता था जिसके अलग होने के बाद मध्यप्रदेश बिजली की कमी के संकट से जूझने लगा। बीजेपी ने तब प्रदेश में साध्वी उमा भारती को दिग्विजय सिंह के विरुद्ध मोर्चे पर लगा दिया जो उन्हें ‘मिस्टर बंटाधार’ कह कर उनकी सरकार की आलोचना करती थीं। शनि की साढ़ेसती में चल रहे दिग्विजय सिंह वर्ष 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में तब कांग्रेस पार्टी की बुरी हार देखने को विवश हुए। शनि की साढ़ेसाती और शनि में शुक्र की परिवर्तनकारी दशा में 2003 में हुई करारी हार से व्यथित दिग्विजय सिंह अगले 10 साल तक राजनीति से दूर रहे।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मात दी....
वर्ष 2013 में शनि में राहु की कठिन दशा में दिग्विजय सिंह की पत्नी आशा सिंह का कैंसर से 7 वर्षों तक लड़ने के बाद निधन हो गया। गोचर में शनि तब मीन लग्न की दिग्विजय सिंह की कुंडली के अष्टम भाव में चल रहा था। वर्ष 2015 में लग्न में बैठे सप्तमेश बुध की दशा में दिग्विजय सिंह ने अपने से उम्र में छोटी अमृता राय से शादी कर ली। इसी बुध की दशा में सितंबर 2017 में दिग्विजय सिंह ने 3300 किलोमीटर लंबी नर्मदा यात्रा अपनी पत्नी के साथ पैदल चलकर 192 दिन में पूरी की। मां नर्मदा के आशीर्वाद और नवम भाव में गुरु के साथ बैठे केतु की अन्तर्दशा में दिग्विजय सिंह पिछले वर्ष मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मात देकर 15 वर्ष पूर्व 2003 में मिली हार का हिसाब चुका लेने में सफल हुए।

अब जब दिग्विजय सिंह भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं तो बीजेपी ने इनके सामने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को राजनीति के मैदान में खड़ा कर दिया है। 2003 में दिग्विजय सिंह की सत्ता को एक साध्वी उमा भारती ने चुनौती दी थी और दिग्विजय सिंह की सत्ता छीन गई थी। पार्टी को करारी हार का मुंह देखना पड़ा था। क्या इस बार भी इन्हें एक साध्वी के हाथों पराजित होना पड़ेगा?

ज्योतिषीय गणना कहती है कि 2003 और 2019 की स्थिति में काफी अंतर है। 2003 में दिग्विजय सिंह साढ़ेसाती से गुजर रहे थे। लेकिन 2019 में दिग्विजय का शुभ समय चल रहा है। इस समय इनकी बुध में शुक्र की शुभ विंशोत्तरी दशा चल रही है और शनि भी लाभ दिलाने की स्थिति में हैं। ऐसे में साध्वी प्रज्ञा के आक्रामक तेवर दिग्विजय सिंह की कुंडली के गजकेसरी योग और बुध-शुक्र की शुभ दशा के चलते उनको लोकसभा चुनाव जीतने से नहीं रोक पाएंगे। ऐसा ज्योतिषीय गणना कहती है।

अब चर्चा प्रज्ञा सिंह की जन्म कुंडली पर..

नाम: प्रज्ञा सिंह ठाकुर
जन्म तिथि: Feb 2, 1970
जन्म समय: 20:00:00
जन्म स्थान: Bhind (M.P.)
रेखांश: 78 E 47
अक्षांश: 26 N 33
टाइम ज़ोन: 5.5
सूचना स्रोत: Reference...





प्रज्ञा सिंह ठाकुर का जन्म 2 फरवरी 1970 को भिण्ड जिले के लहार कस्बे में रात्रि 8 बजे के लगभग हुआ था। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में प्रज्ञा ठाकुर के पिता डॉ. चंद्रपाल सिंह एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक डॉक्टर थे और प्राकृतिक जड़ी बूटियों से मरीजों का इलाज करते थे। प्रज्ञा सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश (भिण्ड जिला) के एक मध्यवर्गीय कुशवाहा राजपूत परिवार से हैं। उनके पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक एवं व्यवसाय से आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। परिवारिक पृष्ठभूमि के चलते वे संघ व विहिप से जुड़ीं व किसी समय सन्यास ले लिया। भोपाल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी रहीं। इतिहास में परास्नातक प्रज्ञा हमेशा से ही दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़ी रहीं। वे विश्व हिन्दू परिषद की महिला शाखा दुर्गा वाहिनी से जुड़ी थीं। भिंड के लाहार कॉलेज से इतिहास में स्नातकोतर तक पढ़ाई करने वाली प्रज्ञा को छात्र जीवन में एक मुखर वक्ता के तौर पर देखा जाता था और आध्यात्म तथा हिंदुत्व पर शास्त्रार्थ में उन्हें हराना मुश्किल था।

वे कई बार अपने भड़काऊ भाषणों के लिए सुर्खियों में रहीं। 2002 में उन्होंने 'जय वन्दे मातरम् जन कल्याण समिति' बनाई। बाद में वे स्वामी अवधेशानन्द गिरि के संपर्क में आयीं। इसके बाद उन्होंने एक 'राष्ट्रीय जागरण मंच' बनाया। इस दौरान वह मध्य प्रदेश और गुजरात के एक शहर से दूसरे शहर जाती रहीं।साध्वी प्रज्ञा ने १७ अप्रैल २०१९ को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और पार्टी ने उन्हें सत्रहवीं लोकसभा के सदस्य के लिए  भोपाल से लोकसभा का टिकट दिया है। यहाँ उनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस के दिग्विजय सिंह से है।
इस समय उनकी जन्म कुंडली मे मंगल की महादशा में बुध की अंतर्दशा ओर सूर्य का प्रत्यन्तर चल रहा हैं।
उनका सिंह लग्न बनता है जहां केतु विराजमान है।
उनकी राशि वृश्चिक बनती है जो सुख में स्थित चन्द्रमा के कारण बनती हैं और राहु सप्तम भाव मे बैठकर वैवाहिक सुख कम कर रहा हैं। मीन का मंगल अष्टम भाव मे उन्हें मंगली बना रहा हैं।


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