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फ़िल्म समीक्षा "स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2"


(क्या ऐसे होते है स्टूडेंट्स
भगवान बचाये!!!!

फिल्म की स्टार कास्ट---
टाइगर श्रॉफ, अनन्या पांडे, तारा सुतारिया....

फिल्म के डायरेक्टर---
पुनीत मल्होत्रा...

फिल्म के प्रोड्यूसर---
करण जौहर, हीरु यश जौहर, अपूर्वा मेहता, फॉक्स स्टार स्टूडियो...

प्रोडक्शन कंपनी--
धर्मा प्रोडक्शन, फॉक्स स्टार स्टूडियो...

फिल्म की कहानी--
अरशद सईद...

फिल्म का म्यूजिक---
विशाल-शेखर...

फिल्म की ड्यूरेशन
2 घंटे 25 मिनट...

करण जौहर की बहुप्रतीक्षित फ़िल्म  "स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2"आज सिनेमा घरों में रिलीज हो गई।इस मूवी में मुख्य किरदार में टाइगर श्रॉफ , अनन्या पांडे , तारा सुतार‍िया निभा रहे हैं। इस फिल्म को युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाया गया हें ।

मुख्य किरदार अदा कर रहे चारों कलाकारों ने अच्छा काम किया है। अनन्या पांडेय जहां बेहद खुबसूरत और असाधारण लग रही हैं तो वहीं तारा सुतारिया भी स्क्रिन पर बला की सुंदर लग रही हैं। फिल्म शुरुआत से लेकर आखिरी तक टाइगर श्रॉफ के कंधों पर टिकी हुई है।

कहानी के नाम पर कुछ भी पेश कर दिया गया। मनोरंजन तो ढूंढे नहीं मिलता।

दो लड़कियां और एक लड़का है तो लव स्टोरी डाल दी गई। मृदुला को रोहन चाहता है, लेकिन उसकी नजर अमीर मानव मेहरा (आदित्य सील) पर है। ऑडी में पढ़ने आने वाली और सभी को अपने सामने तुच्छ समझने वाली श्रेया की शुरुआत में रोहन से नोकझोक चलती है तभी समझ में आ जाता है कि बाद में इसका रोमांस रोहन से चलेगा।

होता भी ऐसा ही है। श्रेया की तरफ रोहन आकर्षित होता है तो मृदुला भी रोहन को चाहने लगती है। बहुत देर तक समझ ही नहीं आता है कि कौन किसको और क्यों चाह रहा है? सीन पर सीन आते जाते हैं और यह बचकानी लव स्टोरी बेवजह उलझने लगती है।

फिल्म में दिखाया गया स्कूल देहरादून में कहीं स्थित है जहां स्टूडेंट या तो लड़ाई करते हैं या फिर रोमांस करते हैं। टाइगर इस फिल्म में हर बार की तरह अच्छे दिख रहे हैं।
अच्छी बॉडी के साथ कुछ अच्छे डांस किए हैं. फिल्म में पढ़ाई नहीं बल्कि लव ट्राइंगल होता है। अपने पिता की तरह अनन्या भी बॉलीवुड में ज्यादा दिन टिक नहीं पाएंगी।तारा फिल्म में कुछ बेहतर दिखी हैं. कुल मिलाकर फिल्म बोर है।

फिल्म की सिनेमेटोग्राफी शानदार है। हर्ष बेनीवाल की पंचलाइनें अच्छी लगीं और तारा सुतारिया का हुक अप सॉन्ग भी फिल्म की खूबी है वहीं फिल्म की कहानी, उसका निर्देशन, टाइगर श्रॉफ को फिल्म की कमजोर कड़ी बताया है।कुल मिलाकर फिल्म 80 करोड़ तक की कमाई कर सकती है. अपने रिस्क पर देखें फिल्म।आजकल आकर्षक पैकेजिंग जमाना है और इसके जरिये घटिया माल भी इस एहसास के साथ टिकाया जाता है कि आपने कोई खास चीज खरीदी है। स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 इस बात का सबूत है।

हिट फिल्म का फायदा उठाने के लिए सीक्वल बना दिया गया है, जिसमें कुछ भी देखने लायक नहीं है। बड़ा बजट, फैशनेबल कपड़े, कूल कैरेक्टर्स के जरिये दर्शकों को चकाचौंध में फंसाने की कोशिश की गई है ताकि वे और कुछ देख नहीं पाए, लेकिन यह कोशिश बेकार ही जाती है।
पुनीत मल्होत्रा ने इस फिल्म को निर्देशित किया है और निर्माता करण जौहर के पैसों को उन्होंने बरबाद किया है। इसके पहले वे 'गोरी तेरे प्यार में' (2013) नामक डब्बा फिल्म बना चुके हैं। पुनीत द्वारा फिल्माए गए दृश्यों में कोई कनेक्शन नहीं है। कभी भी कोई भी सीन टपक पड़ता है जिसका कोई सिर-पैर नहीं होता। कहीं भी गाने चिपका दिए गए और कहीं भी एक्शन सीक्वेंस। 

जब चाहा रोहन से उसके दोस्तों को नाराज करवा दिया। जब चाहा सुलह करवा दी गई। मृदुला को चाहते-चाहते कब रोहन, श्रेया को चाहने लगता है, समझ ही नहीं आता। रोहन से नफरत करते-करते कब श्रेया उसे चाहने लगती है, ये भी निर्देशक और लेखक की मर्जी पर ही निर्भर करता है। कहने का मतलब ये कि निर्देशक और लेखक ने देखने वालों की अक्ल को कम आंकते हुए जिधर चाहा कहानी घूमा दी।

फिल्म के कैरेक्टर्स को कुछ ज्यादा ही 'कूल' दिखाने की कोशिश की गई है। कई बार तो वे हिंदी भी ऐसे बोलते हैं जैसे कोई अंग्रेज बोल रहा हो। हीरो फाइटिंग के लिए दौड़ लगा रहा है तो उस पर पाइप से पानी छिड़का गया है ताकि वह 'कूल' लगे।

गानों के मामले में भी फिल्म कंगाल है। 'ये जवानी है दीवानी' ही अच्‍छा लगता है, लेकिन वो भी पुराना हिट गीत है। अरशद सैयद न ढंग की कहानी लिख पाए और न ही ढंग के संवाद।

टाइगर श्रॉफ हाथ-पैर चलाते या डांस करते तब अच्छे लगते हैं जब फिल्म में वैसी सिचुएशन हो, लेकिन यहां वे यह काम करते भी अच्छे नहीं लगते। एक्टिंग के नाम पर अभी भी वे 'बागी' वाले मोड पर ही हैं।

सोशल मीडिया की सेंसेशन्स तारा सुतारिया और अनन्या पांडे भी इस फिल्म में नजर आई हैं। तारा सुतारिया के किरदार को लिखते वक्त राइटर ही कन्फ्यूज था तो उन्हें क्या समझ आता। वे बिलकुल प्रभावित नहीं कर पातीं। अनन्या पांडे को फिल्म के दूसरे हाफ में मौका मिलता है। वे अच्छी लगती हैं, लेकिन एक्टिंग के नाम पर उन्हें खूब कोशिश करना पड़ी है।

अब जानिए फ़िल्म की कहानी..

रोहन (टाइगर श्रॉफ) थोड़ा गरीब किस्म का है। पूरी फिल्म में ब्रैंडेड कपड़े और जूते पहनता है, लेकिन ट्रैक पर दौड़ते समय बेचारे के पास गरीबों वाले जूते रहते हैं। पिशोरीलाल चमनदास नामक स्कूल में पढ़ता है और सेंट टेरेसा में पढ़ने का ख्वाब देखता है।
श्रेया (अनन्या पांडे) टिपिकल अमीरजादी हैं जो बॉलीवुड फिल्मों में ही ज्यादा पाई जाती हैं। स्कूल की प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाकर कहती है बिल मेरे डैड को पहुंचा देना। आखिरी ट्रस्टी की बेटी जो है जिसके सामने प्रिंसीपल भी कांपता है। प्रिंसीपल भी प्रिंसीपल कम और आरजे ज्यादा लगता है। कोई सी भी प्रतियोगिता हो माइक उसके पास ही रहता है।

मृदुला (तारा सुतारिया) पर रोहन मरता है, लेकिन उसे तो वो अमीर लड़के पसंद आते हैं जिनके पास महंगी गाड़ी हो। रोहन जब स्पोर्ट्स कोटे से सेंट टेरेसा में आ पहुंचता है तो मृदुला कहती है अरे मेरे बाप के पास तो तीन-चार पेट्रोल पंप है, लेकिन तुम यहां कैसे आ गए?

सेंट टेरेसा में कभी पढ़ाई होते नजर ही नहीं आती। टीचर्स (गुल पनाग) ऐसे कपड़े पहनती हैं मानो स्विमिंग के लिए जाने वाली हों। यहां पर लड़के-लड़कियां एक-दूजे को चूमते रहते हैं। लड़कियां छोटे-छोटे कपड़े पहनकर मटकती रहती हैं और लड़के भी फैशन की दुकान लगते हैं। पढ़ाई छोड़ सब कुछ होता है। 

क्या रही कमजोर कड़ी--
फिल्म में स्कूल के बच्चों के शॉर्ट ड्रेस पहने, रोमांस करते, डिस्को डांस करते दिखाया है। इससे बच्चों के दिमाद पर बुरा असर पड़ेगा। क्योंकि स्कूल का माहौल ऐसा बिल्कुल नहीं होता है। करन जौहर की फिल्मों में कॉलेज लाइफ: रोमांस, डांस, पार्टी, फाइट, सिक्स पैक वाले लड़के, शॉर्ट्स पहनने वाली लड़कियां, कोई पढ़ाई नहीं। जबकि असल जिंदगी में केवल पढ़ाई, पढ़ाई, पढ़ाई।

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