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जन्म कुंडली में समझें वाणी के प्रभाव को..


किसी भी जातक की जन्म कुंडली में द्वितीय भाव वाणी का भी होता है।तीसरा और आठवां भाव भी वाणी से संबंध रखता है। इन्ही भावों से व्यक्ति की आर्थिक और पारिवारिक स्थिति भी देखी जाती है। इस प्रकार वाणी, आर्थिक और पारिवारिक स्थितियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं।  वृषभ राशि और बुध का सीधा संबंध वाणी से होता है।  ये व्यक्ति को अभिव्यक्ति की अद्भुत क्षमता प्रदान करते हैं।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि जब कोई ग्रह वाणी भाव में अकेला बैठा हो तो उसका वाणी पर क्या असर होगा। यह सिर्फ एक सामान्य चर्चा है अतः यहाँ हम द्रष्टि/नक्षत्र/राशि या युति का वर्णन नही करेगे। हिंदु धर्म में वाणी का अत्यधिक महत्व हैं, वाणी शुद्ध और पवित्र हो तो वह साक्षात देव वाणी होती हैं, जो बोला जाता हैं, वह सत्य हो जाता हैं। दूसरे भाव पर ग्रहों का जैसा प्रभाव होगा, वैसी ही वाणी होगी। बुध, गुरु, शुक्र में से किसी की दूसरे स्थान पर प्रभाव स्थिति व्यक्ति की वाणी को सौम्य, ज्ञान युक्त व प्रभाव शाली बनाती हैं, और यदि यें ग्रह नीचगत हो या अशुभ ग्रहों के प्रभाव में फल देने वाले हो तो विपरीत फल प्राप्त होते हैं।

यदि वाणी भाव में सूर्य हो तो जातक की वाणी तेजस्वी होगी।वाणी आदेशात्मक ज्यादा होगी।गलत बात होने पर जातक जोरदार आवाज से प्रतिक्रिया देगा।

यदि वाणी भाव में चंद्र हो तो जातक की वाणी शालीन होगी।जातक बहुत धीरे और कम शब्दों में अपनी राय रखेगा।जातक की मधुर वाणी की दुनिया कायल होगी।जातक बात रखने से पहले आज्ञा माँगेगा।

यदि वाणी स्थान में राहु-मंगल या राहु-शनि का प्रभाव हो तो मुहं के कई रोग उत्पन्न करते हैं, राहु व वक्री बुध हो तो हकलाने जैसी समस्या आती हैं।

यदि वाणी भाव में मंगल हो तो जातक की वाणी उग्र और तेज होगी। जातक की बात पड़ोसियों के कान तक पहुँच जायेगी।गुस्सा आने पर जातक गाली-गलौच में कभी निःसंकोच नही करेगा।जातक चिल्लाने और शौर मचाने में माहिर होगा।

यदि धनु, मकर, वृषभ और सिंह लग्न के दूसरे स्थान पर शनि या बुध स्थित हो तथा मंगल के साथ अन्य कोई पापी ग्रह का प्रभाव इन पर पडे तो जातक बोलने में असमर्थ होता हैं।

यदि वाणी भाव में बुध हो तो जातक बेवजह बातूनी होगा।मुफ्त की राय देना जातक का शौक का शौक होगा।चूंकि अकेला बैठा बुध कभी शुभकर्तरी में नही होता,यदि बुध पापकर्तरी में हुआ तो जातक चुगलखोर होगा।

यदि वाणी भाव में गुरु है तो जातक की वाणी सकारात्मक होगी जातक उपदेशक की तरह अपनी बात को विस्तारपूर्वक कहता है जैसे -“मतलब/अर्थात/Means/म्हणजे कि” ये उसकी बातो में ज्यादा प्रयोग होता है। जातक पुरुष से तीव्र और स्त्रियों से मधुर वाणी में बात करने वाला होता है।

यदि वाणी भाव में शुक्र हो तो जातक की वाणी अत्यंत विनम्र होगी।जातक कवि,गायक भी हो/बन सकता है।वाणी में प्यार और आनंद की मिठास होगी।जातक की बाते रोमांटिक होती है।

यदि वाणी भाव में शनि हुआ तो जातक की वाणी बहुत संतुलित और संयमित होगी। शब्दों की मर्यादा का उल्लंघन बहुत कम या ना के बराबर।जातक हमेशा “शासन कर रही सरकार” का वाणी से विरोध करेगा।

यदि वाणी भाव में राहू हुआ तो जातक गप्पे मारने वाला,बेवजह बहस करने वाला होगा।जातक के मुँह से हमेशा गाली/अपशब्द निकलेगे। वाणी नकारात्मक होगी।सीटी बजाना जातक का शौक हो सकता है।

यदि वाणी भाव में केतु हो तो जातक मुँहफट होगा।यदि केतु शुभकर्तरी में हो तो जातक जो भी कहेगा उसकी 70% बाते/भविष्यवाणी सही होगी..और यदि केतु पापकर्तरी में हो तो जातक हमेशा “हाय देने वाला” और “कडवी जुबान” रहेगा साथ ही उसकी बाते 70% सच साबित होगी।


इन उपाय से होगा लाभ-

1- सरस्वति देवी की उपासना समस्त प्रकार के वाणी दोषों को दूर करने में सक्षम होती हैं।
2- शंख बजाने से तथा शंख के जल से हकलाना दूर होता हैं, वाणी में स्पष्टता आती हैं, तथा कण्ठ के रोग दूर होते हैं।
3- भगवान गणेश का अथर्व शीर्षम का पाठ वाणी दोषों को हमेशा के लिये दूर रखता हैं।
4- बुध ग्रह की शांति व दान करना भी व्यक्ति के वाणी विकार दूर करते हैं।

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