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जानिए क्यों जरूरी हैं ग्रह शान्ति ?? कब देती है लाभ?? कितने जाप का मिलता है फल ??


जीवन में जब कष्टों के लगातार आना और पूरा जीवन संघर्षपूर्ण दिखाई देना, इस बात का सबूत देता है कि आपके ग्रह –नक्षत्र अशान्त है। आपकी जन्म कुंडली में स्थित नौ ग्रहों की बेकार दशा से आपको जीवन में सही दिशा प्राप्त नही हो पा रही है। इसी वजह से ज्योतिषी द्वारा ग्रह-नक्षत्र का जन्मपत्री द्वारा हाल जानकर उनका उपाय किया जा सकता है और जीवन में आने वाली कठनाईयों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

इन अरिष्ट ग्रहों को शान्त करवाने के लिए किसी साधारण मंदिर का पूजारी से काम नहीं चलेगा। नवग्रह शान्ति पूजा के लिए वह पंडित योग्य होता है जो शक्ति साधना और भैरव साधना की विधा जानता हो या नवग्रह मंदिर का पूजारी हो जिसे नवग्रह के बारे में पूर्ण ज्ञान हो वह पंडित नवग्रहों को शान्त करवा सकता है. वैसे  कई अनुभवी ज्योतिषाचार्य भी होते है जो नवग्रह को शान्त करवाते है। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं कि वर्तमान हर कोई किसी न किसी ग्रह दोष से ग्रस्त रहता है. कई बार उसे पता नहीं चलता कि किस वजह से उसकी जिंदगी में तूफान थमने का नाम नहीं ले रही। किस वजह से जीना मुश्किल हो रहा है।

यदि आपके घर में बिना बात घर में कलह क्लेश हो, हर काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, शत्रु अकारण परेशान कर रहे हों , सेहत नहीं दे रही साथ, मान सम्मान का हो रहा हो नाश, बच्चे की बुद्धि का नहीं हो रहा विकास तो आप नवग्रह दोषों से ग्रस्त हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी से जानते है कि आपकों किस ग्रह को शान्त करने के लिए जातक को स्वंय को किस  भगवान की पूजा-पाठ करनी चाहिए. बारह राशियों में नौ ग्रहों का आने-जाने से जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है इसलिए इन नौ ग्रहोंकी शान्ति के लिए इनके अनुसार भगवान की पूजा करनी चाहिए।
पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं कि अनिष्ट ग्रहों की शांति की कई प्रक्रियाएं हैं, जैसे अनिष्ट ग्रह के जाप-अनुष्ठान, अनिष्ट ग्रह का दान, अनिष्ट ग्रह के शत्रु या कुंडली के अतीव शुभ ग्रह का रत्न धारण, औषधि स्नान आदि। इन सभी में अनिष्ट ग्रहों का जाप अनुष्ठान सर्वाधिक लाभदायक होता है किंतु इसमें उचित जाप संख्या, दशांश और पूर्णाहूति हवन करना आवश्यक होता है।

प्राचीन समय में निर्धारित जाप संख्या के दशांश का हवन किया जाता था किंतु वर्तमान समय में शास्त्र के निर्देशानुसार दशांश हवन ना कर पाने की स्थिति में दशांश अतिरिक्त जाप का विधान प्रचलन में है।

समझें क्या होता है चतुर्गुणित जाप : -

सनातन धर्म में कलियुग को चतुर्थ युग माना गया है। अत: कलियुग में किसी भी ग्रह के निश्चित जाप संख्या के 4 गुना जाप अर्थात चतुर्गुणित जाप को ही संपूर्ण व श्रेष्ठ माना जाता है। कलियुग में अनिष्ट ग्रहों के 4 चरण करवाना श्रेयस्कर रहता है किंतु इसे आवश्यकतानुसार 1, 2 अथवा 3 चरणों में विभाजित कर भी कराया जाता है किंतु यदि जाप चरणबद्ध तरीके से होते हैं तो प्रत्येक चरण की समाप्ति के पश्चात पूर्णाहुति हवन करवाना आवश्यक होता है।

क्या सम्भव हें एक साथ नवग्रह शान्ति पूजन??

यदि आप चाहे तो एक साथ किसी विद्वान पंडित से नवग्रह पूजा करवा सकते है। नवग्रह पूजा के लिए सबसे पहले ग्रहो का आह्वान किया जाता है. उसके बाद अपने घर के मन्दिर में उनकी स्थापन की जाती है. फिर बाएं हाथ से चावल के दाने लेकर मंत्रो का उच्चारण करते हुए दाएं हाथ से चावल नवग्रहों को अर्पित करना चाहिए। पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार यदि आप चाहे तो आप नवग्रह मंडल की भी स्थापना कर उनकी विधि-विधान के साथ पूजा करवा सकते है या फिर किसी अपने घर के नजदिक नवग्रह मंदिर में भी किसी विद्वान पंडित द्वारा यह पूजा सम्पन्न करवा सकते हैं।

जानिए नवग्रहों की शांति के लिए कितनी संख्या में जाप कराना लाभदायक होता है--

1. सूर्य- 7000 जाप प्रति चरण
2. चंद्र- 11000 जाप प्रति चरण
3. मंगल- 10000 जाप प्रति चरण
4. बुध- 9000 जाप प्रति चरण
5. गुरु- 19000 जाप प्रति चरण
6. शुक्र-16000 जाप प्रति चरण
7. शनि- 23000 जाप प्रति चरण
8. राहु- 18000 जाप प्रति चरण
9. केतु- 17000 जाप प्रति चरण।

जानिए किस मंत्र से कराएं अनिष्ट ग्रहों के जाप??

अनिष्ट ग्रहों के शांति-विधान में निर्धारित जाप संख्या के साथ ही उचित मंत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शास्त्रानुसार अनिष्ट ग्रहों का शांति अनुष्ठान बीज मंत्र व तांत्रिक मंत्र दोनों में से किसी भी एक के द्वारा संपन्न कराया जा सकता है। वर्तमान समय बीज मंत्र से जाप अनुष्ठान का प्रचलन अधिक है।


जानिए नवग्रहों के बीज एवं तांत्रिक मंत्र को : -

1. सूर्य- ॐ घृणि: सूर्याय नम: (बीज मंत्र), ॐ ह्राँ ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम: (तांत्रिक मंत्र)
2. चंद्र- ॐ सों सोमाय नम: (बीज मंत्र), ॐ श्रां श्रीं श्रौं चंद्रमसे नम: (तांत्रिक मंत्र)
3. मंगल- ॐ अं अंगारकाय नम: (बीज मंत्र), ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम: (तांत्रिक मंत्र)
4. बुध- ॐ बुं बुधाय नम: (बीज मंत्र), ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम: (तांत्रिक मंत्र)
5. गुरु- ॐ बृं बृहस्पतये नम: (बीज मंत्र), ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम: (तांत्रिक मंत्र)
6. शुक्र- ॐ शुं शुक्राय नम: (बीज मंत्र), ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम: (तांत्रिक मंत्र)
7. शनि- ॐ शं शनैश्चराय नम: (बीज मंत्र), ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम: (तांत्रिक मंत्र)
8. राहु- ॐ रां राहवे नम: (बीज मंत्र), ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम: (तांत्रिक मंत्र)
9. केतु- ॐ कें केतवे नम: (बीज मंत्र), ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स: केतवे नम: (तांत्रिक मंत्र)

यदि आप चाहे तो बिना मन्त्र जाप किए आपके खान पान(भोजन की दिनचर्या) बदलकर भी ग्रहों को अपने अनुकूल बना सकते है।
ग्रहों को मनाने के लिए जरूरी नहीं है कि हमेशा महंगे रत्नों के जरिए उपाय किया जाए। आम जीवन में भी तमाम उपायों को अपनाकर आप अपने जिंदगी में चमत्कारिक बदलाव ला सकते हैं। फिर चाहे परिजनों के साथ अच्छा व्यवहार हो या फिर खान—पान से संबंधी चीजों का दान। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द जी से कि आखिर किन चीजों को जीवन में अपनाने से ग्रहों की शुभता प्राप्त होगी ....

1. सूर्य —
सूर्यदेव की शुभता बढ़ाने और उनकी नाराजगी दूर करने के लिए कभी भी झूठ न बोलें। इस उपाय को करने से सूर्य से संबंधी दोष दूर हो जायेगा और उनके शुभ फल मिलने प्रारंभ हो जाएंगे। ध्यान रहे यदि आप झूठ बोलते हैं, जो कि अस्तित्व में नहीं है तो उस परिस्थिति में आपकी कुंडली से जुड़े सूर्य को उसका अस्तित्व पैदा करना पड़ेगा। ऐसे में सूर्य का काम बढ़ जाएगा और आपके संकट कम होने के बजाय बढ़ जायेंगे।

2. चंद्रमा —
चंद्र देव की शुभता पाने और उनसे जुड़े दोष दूर करने के लिए जितना ज्यादा हो सके साफ-सफाई पर ध्यान दें। न सिर्फ अपने आस-पास की साफ-सफाई रखें, बल्कि स्वयं भी साफ-सुथरे रहें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इस उपाय से निश्चित रूप से चंद्र देव की कृपा मिलने लगेगी। ध्यान रहे कि चंद्रमा को सबसे ज्यादा डर राहू से लगता है और राहू अदृश्य ग्रह है। आम जिंदगी में राहू गंदगी का प्रतीक है। वहीं चंद्रमा जो हमारे आपके मन को आकर्षित करता है, राहू से डरता है। ऐसे में यदि आप स्वच्छता पर ध्यान देंगे तो चंद्र देव प्रसन्न होंगे।

3. मंगल —
मंगल ग्रह सूर्य का सेनापति है। हमारे भोजन में वह गुड़ का स्वरूप हैं। जबकि गेहूं सूर्य का प्रतीक है। मंगल ग्रह की कृपा पाने के लिए रविवार के दिन को गेहूं के आटे का चूरमा गुड़ डालकर बनाकर खाएं और दूसरों को भी खिलाएं। इस उपाय से मंगल देवता प्रसन्न होंगे। ध्यान रहे सूर्य गेहूं, मंगल गुड़ और चंद्रमा घी है, और इन तीनों में मित्रता है। ऐसे में जब ये तीनों मित्र मिलकर खुश होंगे तो उनकी प्रसन्नता की कुछ बूंदे तो आप पर भी गिरेंगी ही। कहने का तात्पर्य आपको शुभ परिणाम प्राप्त होंगे।

4. बुध —
बुध ग्रह का रंग हरा है। वह नौ ग्रहों में शारीरिक रूप से सबसे कमजोर और बौद्धिक रूप में सबसे आगे है। बुध ग्रह की शुभता पाने और उससे जुड़े दोष को दूर करने के लिए गाय को हरी घास खिलाएं। विदित हो कि पृथ्वी और गाय दोनों ही शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि हरी घास बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है। आप तो जानते ही हैं कि अन्य पेड़ पौधों के मुकाबले घास कमजोर है। बिल्कुल वैसे ही, जैसे अन्य ग्रहों के मुकाबले बुध ग्रह कमजोर है। घास यानी बुध और धरती यानी शुक्र। ऐसे में गाय हरी घास खाकर खुश होती है औ आपको भी बुध की कृपा प्राप्त होती है।

5. बृहस्पति —
बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए तोते को चने की दाल खिलाने का उपाय काफी कारगर साबित होता है क्योंकि तोता बुध ग्रह का प्रतीक है और चने की दाल बृहस्पति ग्रह का। आप तो जानते हैं कि पारिवारिक विवाद के चलते बृहस्पति अपनी पत्नी तारा से नाराज रहते हैं। यह बात बुध को पसंद नहीं आती और वे इसे लेकर अपने पिता बृहस्पति से दुखी रहते हैं। ऐसे में जब आप यह उपाय करेंगे तो बुध स्वरूप तोता चने की दाल खाकर पेट भरेगा और खुश होगा तो बृहस्पति अपने आप प्रसन्न हो जाएंगे और आप पर अपनी कृपा बरसायेंगे।

6. शुक्र —
यदि आप शुक्र ग्रह के दोष से पीड़ित हैं तो आपको गाय को रोटी खिलाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि सूर्य गेहूं है और शुक्र गाय है। कहते हैं न कि किसी बलवान व्यक्ति को स्वयं के अलावा किसी और को बड़े पद पर आसीन होना नहीं रास आता, उसी तरह शुक्र को भी सूर्य के अधीन रहना पसंद नहीं है। इसलिए जब आप उसके शत्रु सूर्य यानी गेहूं को गाय यानी शुक्र को खिलाएंगे तो निश्चित रूप से उनका गुस्सा खत्म हो जाएगा और आप पर उनकी कृपा बरसनी शुरु हो जायेगी।

7. शनि —
शनि न्याय के देवता हैं। श्रम के पुजारी हैं। ऐसे में यदि हम किसी मेहनत-मजदूरी करने वाले को तन, मन और धन से उचित सम्मान प्रदान करते हैं, उसकी मदद करते हैं तो शनिदेव प्रसन्न होंगे। उनकी कृपा से वो सभी दोष दूर हो जाएंगे जिनके कारण आपको परेशानी झेलनी पड़ रही है।

8. राहू —
राहु छाया ग्रह है, जो भोज देने से बहुत जल्दी शांत होता है। ऐसे में यदि आप राहु से संबंधित व्यक्ति जैसे कुष्ठ रोगी, निर्धन व्यक्ति, सफाई कर्मचारी आदि को भोजन आदि देकर प्रसन्न करते हैं तो आपको राहु की कृपा अवश्य मिलेगी। इस भोज में आप गरीब व्यक्ति को वनस्पति घी में बनी बड़ी साइज की पूड़ियां, गुड़ का हलवा, सब्जी के लिए छाछ के आलू और मूली का लच्छा रखें। निश्चित रूप से लाभ होगा।

9. केतु —
केतु ग्रह के दोष के कारण अक्सर व्यक्ति भ्रम का शिकार होता है। जिसके कारण उसे तमाम परेशानियां झेलनी पड़ती है। केतु के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सबसे पहले आप अपने बड़े-बुजुर्ग की सेवा करना प्रारंभ कर दें। साथ ही कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं। इस उपाय से निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

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